सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक लड़के को मंदिर के अंदर रखे दीये से सिगरेट जलाते और फिर मंदिर में धूम्रपान करते हुए देखा जा सकता है. इस वीडियो को शेयर करते हुए कई यूज़र्स यह दावा कर रहे हैं कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले के अडोनी स्थित रणमंडल आंजनेय स्वामी मंदिर के पास एक मुस्लिम युवक ने इस कृत्य को अंजाम दिया है.

वराह वॉरियर नाम के यूज़र ने वीडियो शेयर कर दावा किया कि कुरनूल के रणमंडल आंजनेय स्वामी मंदिर में एक मुस्लिम व्यक्ति ने पवित्र दीप से सिगरेट जलाई. वीडियो में वह व्यक्ति मंदिर में धूम्रपान कर, भद्दे इशारे करते हुए कैमरे की ओर घमंड से मुस्कुराते हुए बाहर जाता दिखता है. यूज़र ने कहा कि यह केवल देवता का अनादर नहीं बल्कि हिंदू भावनाओं और मंदिर की पवित्रता पर जानबूझकर किया गया प्रहार है. (आर्काइव लिंक)

हेरिटेज गर्ल नाम की एक अन्य यूज़र ने भी ठीक इसी दावे के साथ यह वीडियो शेयर किया. (आर्काइव लिंक)

शिवम, पीयूष और कई अन्य यूजर्स ने भी ऐसे ही दावे के साथ इस वायरल वीडियो को शेयर किया.

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फ़ैक्ट-चेक

वायरल वीडियो से जुड़े की-वर्ड्स गूगल पर सर्च करने पर हमें डेक्कन क्रॉनिकल की वेबसाइट पर 7 जुलाई को पब्लिश्ड एक आर्टिकल मिला. इस रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो को लेकर गवलीपेट के निवासी बोया शिवराजू ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए अडोनी वन टाउन पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में शिवराजू ने आरोप लगाया था कि युवक ने जानबूझकर हिंदू मान्यताओं का अपमान करने के लिए मंदिर के पवित्र दीये का इस्तेमाल सिगरेट जलाने के लिए किया है, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने आरोपी की पहचान विरूपापुरम गांव का रहने वाला वड्डे एरन्ना नाम के युवक के रूप में किया और उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. प्रारंभिक पूछताछ के दौरान वड्डे एरन्ना ने पुलिस को बताया कि यह वीडियो हाल का नहीं है बल्कि साल 2022 का है. उस समय वह अपने दोस्तों के साथ कक्षा 10 की सप्लीमेंट्री परीक्षा के दौरान मंदिर में गया था, जहां यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था.

आंध्र प्रदेश सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक विंग ने अपने एक्स अकाउंट से इस बात की पुष्टि की कि यह घटना 2022 में हुई थी और उस समय इस कृत्य को लेकर कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया था. अब, चूंकि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर इस पुराने वीडियो को गलत दावों के साथ वायरल किया गया है, इसलिए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब इस कोण से जांच कर रहे हैं कि इतने सालों बाद इस पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर अचानक क्यों शेयर किया गया. पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे विभिन्न धर्मों और जातियों के बीच वैमनस्य पैदा करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने की कोई बड़ी साजिश हो सकती है.

हमें इंडिया टुडे की विशेष संवाददाता अपूर्वा जयचंद्रन की एक एक्स पोस्ट मिली, जिसमें बताया गया है कि पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में बीएनएस की धारा 299 के तहत वड्डे ईरन्ना को गिरफ्तार किया है. इस पोस्ट में एफआईआर और शिकायत की प्रति भी शेयर की गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता बोया शिवराजू ने अपने दोस्तों काशी विश्वनाथ और कंबली महेश के साथ मिलकर इस वायरल वीडियो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. हमने एफआईआर में दिए गए मोबाइल नंबर से शिकायतकर्ता बोया शिवराजू से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन हमारी उनसे बात नहीं हो सकी. हालांकि, इसके बाद हमें शिकायतकर्ता के मित्र काशी विश्वनाथ ने संपर्क किया, उन्होंने हमें स्पष्ट रूप से बताया कि इस मामले का आरोपी मुस्लिम समुदाय से नहीं है, बल्कि वह हिंदू समुदाय से ही है.

कुल मिलाकर, कई यूज़र्स ने मंदिर में दीये से सिगरेट जलाते हुए युवक का पुराना वीडियो सांप्रदायिक एंगल से शेयर करते हुए झूठा दावा किया कि आरोपी मुस्लिम समुदाय से है, जबकि असल में आरोपी का नाम वड्डे ईरन्ना है और वह हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखता है.

ग़लत
दावा:
वीडियो में मंदिर के दीये से सिगरेट जलाने वाला आरोपी मुस्लिम समुदाय से है.

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