भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की तस्वीर के साथ एक कथित बयान वायरल है. इसमें लिखा हुआ दिख रहा है, “मुसलमान पैदाईशी आतंकवादी नहीं होते. उन्हें मदरसों में कुरान पढाई जाती है, जिसके अनुसार वे हिन्दू, बौद्ध, सिख, इसाई, यहूदी और अन्य गैर-मुसलमानों को चुन चुनकर मारते हैं. आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए भारत में चल रहे हज़ारों मदरसों पर प्रतिबन्ध लगाना बेहद ज़रूरी है.” दावा है ये बातें अब्दुल कलाम ने कही थीं.

ऑल्ट न्यूज़ के व्हाट्सऐप नंबर और मोबाइल ऐप पर इस तस्वीर की सच्चाई पता करने की दर्जनों रिक्वेस्ट मिलीं.

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ट्विटर पर भी इस कथित बयान की जांच के लिए ऑल्ट न्यूज़ को टैग किया गया.

फ़ैक्ट-चेक

हमने देखा कि ये मेसेज कई सालों से सोशल मीडिया पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की तस्वीर की साथ शेयर किया जा रहा है. 2 साल पहले इसे ‘शेयर चैट’ पर कलाम की एक अलग तस्वीर के साथ शेयर किया गया था. ऑल्ट न्यूज़ को इस कथित बयान को शेयर किए जाने का सबसे पुराना उदाहरण 2014 के एक ब्लॉग पोस्ट में मिला. ये ब्लॉग संजय तिवारी चलाते हैं जो खुद को उजाला न्यूज़ नेटवर्क का फ़ाउंडर बताते हैं. इनका ट्विटर हैंडल देखने से पता चलता है कि ये PM मोदी के समर्थक हैं और अरविन्द केजरीवाल के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करते हैं.

हमने इस बयान से सम्बंधित ख़बर ढूंढने की कोशिश की लेकिन हमें ऐसी कोई ख़बर नहीं मिली. ये नामुनकिन है कि कलाम ने ऐसा कोई विवादित बयान दिया और मीडिया में उस बारे में ख़बर न छपी हो. यानी, सालों से ये बयान इन्टरनेट पर कलाम का बताकर घूम रहा है.

परिवार ने इसे फ़र्ज़ी बताया

ऑल्ट न्यूज़ ने A.P.J.M.J शेख़ सलीम से इस तस्वीर की असलियत जानने के लिए संपर्क किया. सलीम अब्दुल कलाम के भतीजे हैं और वो अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन (AKIF) के मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं. उन्होंने बताया, “एपीजे अब्दुल कलाम ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया. उन्होंने कभी किसी धर्म से सम्बंधित कुछ कमेंट नहीं किया.”

यानी, सालों से एक फ़र्ज़ी बयान सोशल मीडिया पर एपीजे अब्दुल कलाम का बताकर शेयर किया जा रहा है.


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Priyanka Jha specialises in monitoring and researching mis/disinformation at Alt News. She also manages the Alt News Hindi portal.