पिछले महीने लोगों को होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए ईद की पारंपरिक नमाज़ को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन इंटरनेशनल योग डे के जश्न के लिए रेड रोड को एक हफ़्ते तक बंद रखने के फ़ैसले में दिख रहे “दोहरे मापदंड” के बारे में पूछे जाने पर, बंगाल के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने 16 जून को कहा, “बांग्लादेश या पाकिस्तान जाकर नमाज़ पढ़िए; वहां कोई विरोध नहीं करेगा. यहां ऐसा कुछ नहीं होगा.”

शहर में 12वें इंटरनेशनल योग डे के आयोजन के लिए रेड रोड को 14 जून से ही गाड़ियों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था, ताकि 21 जून को होने वाले कार्यक्रम की तैयारी की जा सके. रविवार को, एक हफ़्ते की तैयारी के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ये कार्यक्रम इसी मशहूर सड़क पर आयोजित किया गया.

PM नरेंद्र मोदी 21 जून 2026 को कोलकाता के रेड रोड पर एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए | फोटो: X/@narendramodi

स्थानीयन्यूज़ चैनल ‘RPlus’ के एक पत्रकार से बातचीत के दौरान, घोष से उस आलोचना के बारे में पूछा गया जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार को ईद की नमाज़ की जगह बदलने के फ़ैसले पर झेलनी पड़ी थी. मुसलमान 1919 से ही सेना की इजाज़त से रेड रोड पर नमाज़ पढ़ते आ रहे हैं, लेकिन इस साल, राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद नमाज़ की जगह बदल दी गई.

BJP सरकार ने इस कदम को अपने उस बड़े निर्देश का हिस्सा बताया, जिसका मकसद ये पक्का करना था कि धार्मिक आयोजनों की वजह से सड़कों पर रुकावट न आए, ट्रैफ़िक में बाधा न पड़े और आम लोगों को परेशानी न हो. प्रशासन ने ये भी निर्देश दिया था कि खास मौकों को छोड़कर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल सिर्फ़ धार्मिक जगहों के अंदर ही किया जाए.

पत्रकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईद की नमाज़ के लिए कुछ समय के लिए ही ट्रैफिक का रास्ता बदलना पड़ता है, और ऐसा साल में सिर्फ़ दो बार होता है. जबकि योग दिवस के कार्यक्रमों की तैयारी के लिए सड़क को लगातार सात दिनों तक बंद रखा गया — जिसे आलोचकों ने प्रशासन का दोहरा रवैया बताया.

इसके जवाब में, घोष ने कहा कि बड़े नेताओं के दौरे के समय सड़क बंद करना एक आम बात है, “जब भी प्रधानमंत्री आते हैं, तो सड़कें बंद की जाती हैं — सिर्फ़ रेड रोड ही नहीं. वे जिस भी रास्ते से गुज़रते हैं, वहां आवाजाही पर रोक लगानी पड़ती है.”

उन्होंने तर्क दिया कि जगह का चुनाव लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर समझदारी से किया गया था, “ये जगह इसलिए चुनी गई क्योंकि वहां ट्रैफिक का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है. छुट्टी का दिन होने के कारण, उस इलाके में कम लोगों के आने की उम्मीद थी. इसीलिए कार्यक्रम वहां आयोजित किया गया, वरना लोगों को और ज़्यादा परेशानी होती.”

‘आखिर वे हैं कौन?’

पत्रकार ने फिर कहा कि रेड रोड पर नमाज़ पढ़ने में मुश्किल से 15 मिनट लगते हैं. घोष ने इस तुलना को खारिज करते हुए कहा, “उन 15 मिनटों के लिए ट्रैफिक कितने घंटों तक बाधित रहता है? आखिर वे हैं कौन? कोई भी आम आदमी! उनके लिए रेड रोड क्यों बंद की जाए?” उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री के लिए सड़कें बंद की जाएंगी. मुख्यमंत्री के लिए भी बंद की जाएंगी. ये तो स्वाभाविक है. आखिरकार, प्रधानमंत्री साल में सिर्फ़ एक बार आते हैं — बल्कि कई सालों बाद आ रहे हैं.”

रेड रोड पर मुसलमानों के नमाज़ पढ़ने को गलत बताते हुए विधायक ने आगे कहा: “107 सालों से ये अन्याय चल रहा है और अब सिर्फ़ एक साल बाद ही लोगों को घुटन महसूस हो रही है? बांग्लादेश या पाकिस्तान जाकर नमाज़ पढ़ें; वहां कोई आपत्ति नहीं करेगा. यहां अब इसकी इजाज़त नहीं दी जाएगी. सरकार बदल गई है और लोगों ने बदलाव के लिए ही वोट दिया था ताकि ऐसी प्रथाओं को ख़त्म किया जा सके. और मैं साफ़ कर दूं: उन्हें रोका जाएगा.”

रेड रोड — जो लगभग 2 किलोमीटर लंबी है और जिसे आधिकारिक तौर पर इंदिरा गांधी सरणी के नाम से जाना जाता है — मैदान को दो हिस्सों में बांटती है और ईडन गार्डन्स के पास से फ़ोर्ट विलियम तक जाती है. ये दक्षिण और मध्य कोलकाता और शहर के प्रमुख संस्थागत, व्यावसायिक और कानूनी इलाकों के बीच आने-जाने वालों के लिए एक मुख्य रास्ता है. इस सड़क पर पश्चिम बंगाल के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किए जाते हैं, साथ ही ममता बनर्जी सरकार द्वारा शुरू किया गया सालाना दुर्गा पूजा कार्निवल भी यहीं होता है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दखल देने से इनकार किया

योग दिवस समारोह से पहले, ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन ने रेड रोड को बंद करने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी. इसके जवाब में, जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कार्यक्रम की अहमियत को देखते हुए पुलिस के आदेश और 14 जून से 21 जून तक वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के राज्य के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया.

हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि कार्यक्रम ब्रिगेड परेड ग्राउंड में क्यों आयोजित नहीं की जा सकती थी. उन्होंने कहा, “क्या ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने पर कार्यक्रम का महत्व कम हो जाता? तब स्थानीय लोग सड़क का इस्तेमाल कर सकते थे.”

एसोसिएशन की तरफ़ से पेश हुए सीनियर वकील और राज्यसभा के पूर्व सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि क्या सभी अंतरराष्ट्रीय दिवस समारोहों के लिए सात दिनों तक सड़कें बंद की जानी चाहिए. इसके जवाब में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि “ये कार्यक्रम गैर-राजनीतिक है.”

हालांकि, एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) बिल्वदल भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि ये राज्य का कार्यक्रम है, न कि किसी व्यक्ति या निजी संस्था द्वारा आयोजित या धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया गया कार्यक्रम.

‘द प्रिंट’ से बात करते हुए, चौरंगी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी सदस्य संतोष कुमार पाठक ने दावा किया, “पहले, जब रेड रोड पर ईद की नमाज़ होती थी, तो लोगों को घंटों तक ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता था. अब जब इसे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया गया है, तो ट्रैफिक की वजह से लोगों को कोई परेशानी नहीं होती है. मैं सरकारी आदेशों का पालन करने वाले लोगों को धन्यवाद भी देना चाहता हूं.”