मीडिया हाउसेज़ ने छापी फ़र्ज़ी ख़बर, मास्क न पहनने पर किसी बकरे की गिरफ़्तारी नहीं हुई

27 जुलाई को एक अजीबोग़रीब ख़बर सुर्ख़ियों में रही कि एक बकरे को मास्क न पहनने की वजह से कानपुर पुलिस ने ‘गिरफ़्तार’ कर लिया. IANS की इस ख़बर को नेशनल हेरल्ड, ओडिशा पोस्ट और न्यूज़ 18 इंग्लिश ने रिपोर्ट करते हुए बताया, “वीकेंड पर यह घटना हुई जब बेकन गंज पुलिस बकरे को जीप में भरकर थाने ले गई.”

हालांकि IANS ने अनवरगंज पुलिस स्टेशन के सर्किल ऑफ़िसर सफ़ीउद्दीन बेग का बिल्कुल अलग स्टेटमेंट भी छापा जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस को बिना मास्क पहने एक लड़का मिला था जिसके साथ बकरा था. IANS में छपे उनके स्टेटमेंट के मुताबिक, “जब उसने पुलिस को आते देखा तो बकरे को वहीं छोड़कर भाग गया, इसलिए पुलिस बकरे को साथ लेकर थाने आ गई. बाद में बकरे को उसके मालिक को सौंप दिया गया.” IANS ने पुलिस पर उनकी स्टोरी का वर्ज़न बदलने का आरोप लगाया.

न्यूज़18 को यह स्टोरी इतनी महत्वपूर्ण लगी कि इसे तेलुगू और बांग्ला में भी पब्लिश किया गया. चैनल ने पुलिस का एक वीडियो ब्रॉडकास्ट किया जिसमें वो बकरे को जीप में रखकर ले जा रही है.

टाइम्स नाउ, रिपब्लिक और इंडिया टाइम्स ने भी ऐसी रिपोर्ट पब्लिश की है. टाइम्स नाउ ने भी पुलिस पर कहानी बदलने का आरोप लगाया. रिपोर्ट में लिखा, “अब वो कह रहे हैं कि बकरे की बजाय उस आदमी को अरेस्ट करना चाहते थे जिसे बिना मास्क के देखा गया था.”

इस अजीब स्टोरी पर आर्टिकल पब्लिश करने वाले कुछ और मीडिया संस्थान एशियानेट न्यूज़ (कन्नडा और हिंदी), कश्मीर टुडे, ज़ी न्यूज़ तमिल, दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स और लोकसत्ता हैं.

हास्यास्पद गलत ख़बर

पहली बार पढ़ने पर ही स्टोरी में कॉमन सेंस गायब नज़र आता है. लगता है कि इसे किसी व्यंग्य छापने वाली वेबसाइट पर होना चाहिए लेकिन यह सम्मानित मीडिया संस्थानों के द्वारा ‘ख़बर’ के रूप में परोसी गई है. पुलिस की गाड़ी में धकेले जा रहे बकरे का वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर घूम रहा है. एक ट्विटर यूज़र ने कहा कि एक आदमी ने बेकनगंज पुलिस पर उसके बकरे को जबरदस्ती ले जाने का आरोप लगाया है. कानपुर पुलिस ने यूज़र को रिप्लाई किया कि दादामियां चौराहे पर लॉकडाउन के दौरान एक बकरा लावारिस घूम रहा था जिसे बेकनगंज पुलिस थाने लाया गया और बाद में उसके मालिक मोहम्मद अली पुत्र खनीकुज्जमा को सौंप दिया गया.

ऑल्ट न्यूज़ ने बेकनगंज पुलिस से संपर्क किया. हुमें बताया गया कि एक पुलिस वैन गुज़र रही थी तो स्थानीय लोगों ने बताया कि एक लावारिस बकरा गली में घूम रहा है. पुलिस ने कहा, “हम बकरे को पुलिस थाने ले आए ताकि वह खो न जाए और उसके मालिक को बुलवाया. वो आया और बकरे को ले गया. मास्क न पहनने के कारण हमने बकरे को ‘गिरफ़्तार’ कर लिया, ये ख़बर पूरी तरह से गलत है.”

हमने बकरे के मालिक मोहम्मद अली को उनका स्टेटमेंट लेने के लिए कॉल किया तो वो इस अजीब ख़बर पर हंस पड़े. उन्होंने कहा, “पुलिस ने हमारी मदद की. हमारा बकरा खो जाता अगर वो उसे लेकर थाने न आते और मुझे न बताते.”

हमने अनवरगंज पुलिस स्टेशन के सर्किल ऑफ़िसर सफ़ीउद्दीन बेग से भी संपर्क किया, जिनका स्टेटमेंट कई मीडिया संस्थानों ने पब्लिश किया था. उन्होंने कहा कि एक आदमी बिना मास्क के घूम रहा था, उसके पास बकरा था. पुलिस ने उसे पकड़ना चाहा तो वह बकरे को छोड़कर भाग गया. हालांकि उनका वर्जन बेकनगंज पुलिस के बयान से अलग है, CO बेग ने कहा कि मास्क न पहनने के कारण बकरे को अरेस्ट करने की ख़बर हास्यास्पद है. उन्होंने कहा, “क्या ऐसा हो भी सकता है?”

यानी IANS की अगुवाई में कई मीडिया संस्थानों ने एक बेकार स्टोरी को सच्ची ख़बर के रूप में पब्लिश किया. यह बताना बकवास है कि पुलिस ने मास्क न पहनने के लिए एक बकरे को ‘अरेस्ट’ कर लिया जबकि भारत की सड़कें आवारा जानवरों (बिना मास्क के) से भरी पड़ी हैं. हमने पहले भी नोटिस किया है कि मीडिया संस्थान कई बार व्यंग्य के झांसे में आ जाते हैं, इस बार एक हास्यास्पद स्टोरी को असली ख़बर बना दिया गया. IANS ने कानपुर में COVID-19 के दौरान मास्क न पहनने के कारण बकरे की गिरफ़्तारी पर विश्वास करते हुए पुलिस को “butt of jokes” बताया. ये 2017 की उस घटना को भी याद करने का समय है जब मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट्स पब्लिश की थीं कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने महंगे पौधे खाने वाले गधों को ‘हिरासत में ले लिया.’

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