दो मंदिरों की दीवारों पर स्प्रे-पेंट से “आई लव मोहम्मद” और “आई लव ममुद” शब्दों वाले विजुअल्स सोशल मीडिया पर शेयर किये गए. ग्रैफ़िटी दिखाने वाले एक वीडियो में वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति को ये कहते हुए सुना जाता है कि ये विजुअल उत्तर प्रदेश के बुलाक गढ़ी गांव के एक शिव मंदिर के हैं.

राईटविंग समर्थक सोशल मीडिया यूज़र, @KreatelyMedia (जिसकी पोस्ट की अक्सर ऑल्ट न्यूज़ द्वारा फ़ैक्ट-चेक की जाती रही है) ने मंदिर को अपवित्र करने के लिए ‘इस्लामवादियों’ को दोषी ठहराते हुए विजुअल्स शेयर किए. यूज़र ने टिप्पणी की, “जैसे-जैसे आबादी बढ़ेगी, वैसे-वैसे उनका आतंक भी बढ़ेगा.” (आर्काइव)

एक अन्य यूज़र, @SonOfभारत7 ने भी इस घटना के लिए ‘जिहादियों’ को दोषी ठहराते हुए वीडियो शेयर किया और दावा किया कि ये दंगे भड़काने के लिए किया गया था. इस आर्टिकल के लिखे जाने तक पोस्ट को लगभग 53 हज़ार बार देखा गया और लगभग 2 हजार बार रिशेयर किया गया. (आर्काइव)

कई अन्य लोगों ने भी वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि इसके लिए ‘इस्लामिक गुंडे’ और ‘जिहादी’ जिम्मेदार हैं. (आर्काइव 1234)

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फ़ैक्ट-चेक

दावों को वेरिफ़ाई करने और ये समझने के लिए कि क्या हुआ था, हमने अलीगढ़ पुलिस के एक बयान की तलाश की. अलीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक ने अपने शुरूआती बयान में खुलासा किया कि दो पड़ोसी गांवों – बुलाक गढ़ी और भगवानपुर में चार मंदिरों को अपवित्र किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि वे सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं, जिसमें सामने आया पिछला विवाद भी शामिल है.

अलीगढ़ पुलिस द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में से एक में एक पुलिस अधिकारी को गुलाबी मंदिर के सामने दो व्यक्तियों के साथ बातचीत करते हुए दिखाया गया है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सफेद मंदिर पर थोड़ा अलग ग्रैफ़िटी भी स्प्रे किया गया था.

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बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में SSP नीरज जादोन ने खुलासा किया कि मामले में चार हिंदू युवकों, बुलाक गढ़ी से जिशांत कुमार और भगवापुर से अभिषेक, आकाश और दिलीप को गिरफ़्तार किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि राहुल नाम का एक व्यक्ति फरार है. पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए CCTV फ़ुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाले और पाया कि दीवारों पर लिखे टेक्स्ट में वर्तनी की गलतियां थीं. पुलिस ने पुराने मामलों को भी खंगाला और पाया कि मुख्य आरोपियों में से एक जिशांत सिंह का मुस्तकीम नाम के एक व्यक्ति से झगड़ा हुआ था, जबकि राहुल का गुल मोहम्मद से झगड़ा हुआ था. अपने विरोधियों को फंसाने के लिए आरोपियों ने मंदिर की दीवारों पर ग्रैफ़िटी बनवाए. SSP जादोन ने कहा, “उन्होंने सोचा कि इस तरह की धार्मिक ग्रैफ़िटी बनाने से पुलिस तुरंत जांच करेगी और उनके विरोधी पक्षों को गिरफ़्तार कर लेगी.”

कुल मिलाकर, ये असल में कुछ हिंदू युवा थे जिन्होंने यूपी के अलीगढ़ के दो गांवों में हिंदू मंदिरों की दीवारों पर ‘आई लव मुहम्मद’ ग्रैफ़िटी के अलग-अलग संस्करणों का छिड़काव किया था. सोशल मीडिया यूज़र्स का ये दावा झूठा और निराधार है कि ये ‘इस्लामिक जिहादियों’ का काम था. पुलिस के मुताबिक, व्यक्तिगत झगड़े के कारण बदला लेने के लिए उपद्रवियों ने अपने मुस्लिम विरोधियों को फंसाने के लिए मंदिर को अपवित्र किया.

ग़लत
दावा:
मुसलमानों ने मंदिर की दीवारों पर लिखा 'आई लव मोहम्मद'

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