सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे एक वीडियो में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कार्यक्रमों में लगातार उपस्थिति के कारण ही दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा अपने करियर में तेज़ी से आगे बढ़ीं है.

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस मामले में सुनवाई के दौरान, AAP नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने “हितों के टकराव” का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति शर्मा को अलग करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि वो अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुई थीं, जिसके बारे में उनका दावा था कि वो RSS से संबद्ध है. 14 अप्रैल को अदालत में पेश होकर उन्होंने कहा, “आप इनके कार्यक्रमों में चार बार शामिल हुई हैं योर ऑनर. वे जिस विचारधारा का पालन करते हैं उसका हम दृढ़ता से विरोध करते हैं… ये मामला राजनीतिक है. अगर आप एक विशेष विचारधारा के कार्यक्रमों में भाग ले रहीं हैं, तो मेरे मन में एक आशंका पैदा होती है…”

20 अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने से इनकार कर दिया. इसी संदर्भ में वीडियो शेयर किया जा रहा है. इसमें वो कहती सुनाई दे रही हैं, “जब आपने मुझे पहली बार आमंत्रित किया था, मैं जिला अदालत की जज थी. अगले साल जब आपने मुझे आमंत्रित किया, तो मैं जिला सत्र न्यायाधीश थी, और अब जब आपने मुझे आमंत्रित किया है, तो बाबा ने मुझे उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बना दिया है. आप बस मुझे आमंत्रित करते रहिए, और (मुझे यकीन है) बाबा मुझे बढ़ावा देते रहेंगे.”

वीडियो को AAP नेता देवेश विश्वकर्मा ने X पर शेयर करते हुए दावा किया कि जस्टिस शर्मा ने खुद स्वीकार किया था कि जब भी वो RSS-बीजेपी कार्यालय गईं, उन्हें प्रमोशन मिला. इस पोस्ट को 100,000 से ज़्यादा बार देखा गया है और 2,900 से ज़्यादा बार रीपोस्ट किया गया है. (आर्काइव)

यही वीडियो समाजवादी पार्टी के नेता IP सिंह ने भी पोस्ट किया है. उनके पोस्ट को भी व्यापक रूप से रिशेयर किया गया. (आर्काइव)

द न्यूज़ बास्केट नाम के एक अन्य X यूज़र ने भी इसी दावे के साथ वीडियो शेयर किया है.

फ़ैक्ट-चेक

हमने वायरल वीडियो से कई फ्रेम निकाले और गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें 20 मार्च, 2024 को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कानून विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के बारे में मालूम हुआ. कार्यक्रम का विवरण विभाग के ऑफ़िशियल X हैंडल पर शेयर किया गया था, और स्वर्णकांता शर्मा दो तस्वीरों में दिख रहीं हैं.

उनका पहनावा, पोडियम के पीछे का बैनर और पैनल के हिस्से सभी वायरल क्लिप में देखे गए फ्रेम से मेल खाते हैं. नीचे तुलना देखें:

इससे ये स्थापित होता है कि फ़ुटेज किसी RSS कार्यक्रम का नहीं है. न्यायमूर्ति शर्मा एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के हिस्से के रूप में “बदलते भारत में नए आपराधिक कानूनों की प्रासंगिकता” विषय पर छात्रों को संबोधित करने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय में शामिल हुईं थीं.

सोशल मीडिया पर आगे की खोज से हमें उसी कार्यक्रम में दिए गए जस्टिस शर्मा का पूरा भाषण मिला, जो कानून विभाग के फ़ेसबुक पेज पर अपलोड किया गया था.

पूरा वीडियो 6 मिनट 47 सेकेंड लंबा है. वायरल हो रहा सेगमेंट लगभग 1 मिनट 25 सेकेंड से 2 मिनट 10 सेकेंड के बीच क्लिप किया गया है.

वीडियो में स्वर्ण कांता शर्मा हिंदू देवता शिव को धन्यवाद देती हैं और कहती हैं कि जब भी वो काशी आती हैं, तो उन्हें पेशेवर सफलता का आशीर्वाद मिलता है. उस संदर्भ में वो विश्वविद्यालय को बार-बार आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद देती हैं और कहती हैं: “जब आपने पहली बार मुझे आमंत्रित किया था, मैं जिला अदालत की न्यायाधीश थी. अगले वर्ष, मैं जिला सत्र न्यायाधीश थी, और अब जब आपने मुझे आमंत्रित किया है, तो बाबा ने मुझे उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बना दिया है. आप मुझे आमंत्रित करते रहें, और बाबा (शिव) मुझे आगे बढ़ाते रहेंगे.”

कुल मिलाकर, वायरल वीडियो में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अपनी उपलब्धियों में RSS की भूमिका को स्वीकार करते हुए नहीं दिखाया गया है. ये क्लिप वाराणसी के एक विश्वविद्यालय के भाषण का है और इसे संदर्भ से हटाकर शेयर किया जा रहा है.

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