भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 17 अगस्त को अपनी नई नेशनल सोशल मीडिया टीम का ऐलान किया और अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को IT सेल का इंचार्ज बनाया. पार्टी ने चार नए सोशल मीडिया को-कन्वीनर — प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को नियुक्त किए.

ऑल्ट न्यूज़ ने पहले रिपोर्ट किया था कि BJP के ऐलान के कुछ ही मिनटों बाद, X ​​पर सर्च करने पर पता चला कि इन चारों सोशल मीडिया को-कन्वीनर के अकाउंट या तो गायब हो गए थे या उनकी पोस्ट्स तक पहुंच नहीं बन पा रही थी. हालांकि, उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट और आर्काइव्ड वर्ज़न मौजूद हैं. इनमें अक्सर निजी और विवादित राय होती थी; इस तरह उनके अकाउंट्स के अचानक गायब होने पर सवाल खड़े हुए हैं. उदाहरण के लिए, अरुण यादव ने अपना X हैंडल दोबारा एक्सेस करने से पहले 60 हज़ार से ज़्यादा पोस्ट्स डिलीट कर दिए, वहीं दीपक म्हास्के ने कम से कम 1,342 पोस्ट्स डिलीट किए.

प्रीति गांधी का X अकाउंट, इस आर्टिकल के पब्लिश होने के समय तक ‘प्रोटेक्टेड’ या आम लोगों की नज़र से छिपा हुआ है. उनके 5 लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं. प्लेटफॉर्म की ओर से दिख रहे एक नोटिस में कहा गया है, “सिर्फ़ फॉलोवर्स ही ‘@MrsGandhi’ की पोस्ट्स देख सकते हैं.”

BJP के IT सेल की नई को-कन्वीनर ने अब अपना X अकाउंट ‘प्रोटेक्टेड’ कर लिया है जिससे उनकी पोस्ट आम लोगों को दिखाई नहीं देंगी. उनकी आर्काइव की गई पोस्ट्स से लगातार प्रॉपगैंडा, सांप्रदायिक ग़लत जानकारी और नाथूराम गोडसे के प्रति ‘बेहद सम्मान’ का पता चलता है.

ऑल्ट न्यूज़ ने प्रीति गांधी से बात की और पूछा कि उन्होंने अपनी X पोस्ट क्यों छिपाई हैं? लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उनके फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल बायो में उन्हें ‘सभी 7 BJP मोर्चों के लिए IT और सोशल मीडिया नेशनल इंचार्ज’ और ‘महाराष्ट्र BJP की आधिकारिक प्रवक्ता’ बताया गया है.

नवंबर 2025 में, प्रीति गांधी तब विवादों में घिर गईं जब उन्होंने भारतीय क्रिकेटर जेमिमाह रोड्रिग्स को मैच के बाद के इंटरव्यू में अपनी आस्था ज़ाहिर करने के लिए निशाना बनाया. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत की सेमीफ़ाइनल जीत के बाद, जिसमें रोड्रिग्स को ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ चुना गया था, उन्होंने अपनी टीम के साथियों के सहयोग को सराहा, कहा कि उन्हें ईश्वर पर भरोसा है और इंटरव्यू में जीसस का शुक्रिया अदा किया. इसकी आलोचना करते हुए प्रीति गांधी ने तर्क दिया कि भारतीय जर्सी पहने हुए रोड्रिग्स भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं, “न कि अपने चर्च का.”

उनके 2012-13 के पुराने ट्वीट्स में उन्होंने अपने सरनेम के प्रति नापसंदगी ज़ाहिर की थी और कहा था कि वो ‘मोदी’ या ‘गोडसे’ को सरनेम के तौर पर अपनाना पसंद करेंगी. उन्होंने अपने ट्वीट्स में कई बार महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की तारीफ़ की थी.

खुद को गोडसे का “बहुत बड़ा फ़ैन और फ़ॉलोवर” बताते हुए, उन्होंने कई ट्वीट किए हैं जिनमें कहा गया है कि वो “उन्हें याद करती हैं”, “1000 और गोडसे” की ज़रूरत है और “भारत उन्हें याद करता है.” हालांकि, उनमें से ज़्यादातर ट्वीट अब आसानी से एक्सेस नहीं जा सकते. लेकिन उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट आर्टिकल में आगे रखे गए हैं:

लंबे समय से BJP की समर्थक

BJP के साथ उनका जुड़ाव पार्टी में औपचारिक भूमिका निभाने से पहले से है. प्रीति गांधी 2012 के आसपास से ही BJP के पक्ष में आवाज़ उठाती रही हैं. शुरुआत में उनका X (तब Twitter) हैंडल ‘@pritirules’ था. जब BJP के बड़े नेताओं ने उनके कांग्रेस-विरोधी पोस्ट शेयर करने शुरू किए, तो उन्होंने अपना हैंडल बदलकर ‘@MrsGandhi’ कर लिया. उन्होंने ‘द टेलीग्राफ़‘ को बताया, “मुझे एहसास हुआ कि इस नाम में बहुत संभावना है. क्योंकि एक प्रीति गांधी, दूसरे गांधी से सवाल करेगी. इसलिए मैंने अपना हैंडल बदल लिया.”

2012 में मोदी ने ट्विटर पर प्रीति गांधी को फ़ॉलो करना शुरू किया. उनके मुताबिक, वो अपनी राय ज़ोर-शोर से रखती थीं जिससे नरेंद्र मोदी का ध्यान उन पर गया. प्रीति गांधी को मोदी से मिलने के लिए गांधीनगर भी बुलाया गया था. उन्होंने ‘द टेलीग्राफ़’ को बताया, “उन्हें [मोदी को] ये बात पसंद आई कि मैं एक स्वतंत्र व्यक्ति के तौर पर सोशल मीडिया पर उनका बचाव करती हूं.”

जनवरी 2014 में प्रीति गांधी ने एक ग़लत दावा किया था कि विकिलीक्स (WikiLeaks) के संस्थापक जूलियन असांज ने कहा है कि “मोदी भ्रष्ट नहीं हो सकते” (incorruptible). प्रीति गांधी ने कथित तौर पर असांज की तरफ़ से मोदी के समर्थन का एक फ़र्ज़ी दावा फैलाया; इसमें असांज का एक पोस्टर था जिसके साथ लिखा था, “अमेरिका मोदी से डरता है क्योंकि वो जानते हैं कि वो भ्रष्ट नहीं हो सकते.”

विकिलीक्स ने इस मामले में जवाब देते हुए कथित जानकारी को गलत बताया था:

ग़लत जानकारी फैलाने का इतिहास

बीजेपी के डिजिटल इकोसिस्टम में प्रीति गांधी का नाम, ग़लत जानकारी फैलाने और उसे बढ़ावा देने के उनके लंबे रिकॉर्ड के साथ-साथ सामने आया. ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने पिछले कुछ सालों में उनके दावों के बारे में कई बार फ़ैक्ट-चेक किए हैं.

उदाहरण के लिए, 2019 में प्रीति गांधी ने एक एडिट किया हुआ वीडियो शेयर किया जिसमें ये दिखाया गया था कि राहुल गांधी भारत छोड़कर विदेश में बसना चाहते हैं. 2020 में प्रीति गांधी ने ‘आलू-सोना’ वाली बात को फिर से उठाया—ये दावा एक ऐसे वीडियो से निकला था जिसे ग़लत संदर्भ में काट-छांट कर पेश किया गया था—ताकि राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाया जा सके और लोगों को गुमराह किया जा सके.

2021 में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान, प्रीति गांधी ने एक भ्रामक वीडियो भी शेयर किया जिसमें दावा किया गया था कि कुंभ मेले के समय हरिद्वार में भीड़ नहीं थी. ये पोस्ट उस धार्मिक आयोजन की कड़ी आलोचना के बीच आया था जिसमें लाखों श्रद्धालु जमा हुए थे और बाद में उसमें शामिल लोगों और साधु-संतों में कोविड-19 के हज़ारों मामले सामने आए थे.

हालांकि, वीडियो में ‘हर की पौड़ी’ के आस-पास का मुख्य तीर्थ स्थल नहीं दिखाया गया था. ख़बरों के मुताबिक, इसे कई किलोमीटर दूर ‘गोविंद घाट’ पर तब शूट किया गया था जब वहां ज़्यादा भीड़ नहीं थी. इसलिए, इस वीडियो को ग़लत तरीके से इस सबूत के तौर पर पेश किया गया कि कुंभ मेले के दौरान हरिद्वार में भीड़ नहीं थी.

2021 में पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान, ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने प्रीति गांधी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो की सच्चाई सामने रखी थी. हकीकत में कथित वीडियो में छेड़छाड़ की गई थी. वायरल वीडियो को इस गलत क्लैम के साथ शेयर किया गया था कि कुछ लोग TMC के चुनावी गाने ‘खेला होबे’ पर नाचते हुए तलवारें लहरा रहे थे.

एक और मामले में, प्रीति गांधी ने एक भ्रामक वीडियो शेयर किया था जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान की संसद के अंदर “मोदी-मोदी” के नारे लगाए गए थे. ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने पाया कि असल में वो नारे “वोटिंग-वोटिंग” के थे.

आर्काइव: और प्रॉपगैंडा के साथ ग़लत जानकारी

सालों से प्रीति गांधी की सोशल मीडिया एक्टिविटी में एक बात बार-बार देखी गई है: सांप्रदायिक या लोगों को बांटने वाली ग़लत जानकारी को बढ़ावा देना.

2020 में उन्होंने प्रियंका गांधी की एक तस्वीर शेयर की जिसमें वो हाथरस रेप पीड़िता की मां को गले लगा रही थीं. उन्होंने उस महिला को “नकली नक्सल-भाभी” बताया. उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी दोनों पर ये झूठा आरोप लगाया कि वो उस “नक्सली ऑपरेटिव” को सांत्वना दे रहे थे “जो परिवार के घर में घुस गई थी और पीड़िता की भाभी होने का नाटक कर रही थी.”

उसी साल, उन्होंने पत्रकार आरफ़ा खानम शेरवानी की एक क्लिप्ड वीडियो भी शेयर की थी, जिसमें उन्हें सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) पर बोलते हुए दिखाया गया था. उन्होंने एडिट किए गए क्लिप का इस्तेमाल करके बात का संदर्भ बदल दिया और भाषण को सांप्रदायिक ऐंगल देने की कोशिश की.

न्यूजलॉन्ड्री के एक आर्टिकल में ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ ऑर्गनाइज़्ड हेट’ (CSOH) के 2021 के एक पेपर का ज़िक्र है. इस पेपर में गांधी को उन BJP नेताओं में शामिल बताया गया है जिन्होंने निकिता तोमर की हत्या के बाद ‘लव जिहाद’ के नैरेटिव को बढ़ावा दिया. निकिता तोमर एक स्टूडेंट थी जिसे बल्लभगढ़ में उसके कॉलेज के बाहर एक मुस्लिम युवक ने गोली मार दी थी.

लोकमत की 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रीति गांधी ने 27 अक्टूबर 2020 को एक ट्वीट में लिखा, “जो लोग ‘लव जिहाद’ के अस्तित्व को नहीं मानते, वो असलियत से आंखे मूंद रहे हैं, हो सकता है कि जान-बूझकर ऐसा कर रहे हों. जब तक हम समस्या को स्वीकार नहीं करते, उसका समाधान खोजना असंभव है. आज निकिता है, कल आप हो सकते हैं.”

ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निकिता तोमर मामले की चार्जशीट में ज़बरन धर्म-परिवर्तन और उससे जुड़े अन्य अपराधों से संबंधित IPC की कोई धारा शामिल नहीं थी.

2019 में प्रीति गांधी और बंगाल BJP, दोनों ने बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक भाषण का क्लिप वीडियो शेयर कर ये झूठा दावा किया था कि उसमें सांप्रदायिक भेदभाव था. उन्होंने उनके भाषण का 12 सेकंड का हिस्सा शेयर किया था. वीडियो से वो हिस्सा हटा दिया गया था जिसमें ममता बनर्जी ने हिंदू धर्मग्रंथों का ज़िक्र किया था. ऑल्ट न्यूज़ ने इस कथित मामले में फ़ैक्ट-चेक किया था.

2021 में प्रीति गांधी ने एक आदमी का वीडियो शेयर किया जिसमें वो खाने पर फूंक मारता हुआ दिख रहा था. उन्होंने दावा किया कि वो उस पर थूक रहा है और इस वीडियो को सांप्रदायिक ऐंगल देने की कोशिश की. 2022 में उन्होंने दावा किया कि पुणे में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” के नारे लगाए थे. फ़ैक्ट-चेक में सामने आया कि असल में नारा “पॉपुलर फ्रंट ज़िंदाबाद” था.

फिर 2022 में राहुल गांधी की एक लड़की के साथ तस्वीर शेयर करते हुए प्रीति गांधी ने ग़लत दावा किया कि वो लड़की अमूल्या लियोना थी, जिसने 2020 में बैंगलोर में CAA-विरोधी प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाए थे. असल में राहुल के साथ मौजूद लड़की मीवा जॉली थी जो कांग्रेस पार्टी की स्टूडेंट विंग, केरल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ी एक्टिविस्ट थी.

2024 के किसान आंदोलन के दौरान, प्रीति गांधी ने एक तस्वीर शेयर की जिसमें दावा किया गया कि एक किसान 3 करोड़ रुपये की मर्सिडीज़ कार पर बैठा है. इससे ये दिखाने की कोशिश की गई कि प्रदर्शनकारी ‘अमीर’ थे और इसलिए ये आंदोलन जायज़ नहीं था. ऑल्ट न्यूज़ की जांच में पता चला कि वो कार असल में फ़ोर्स मोटर्स की ‘गुरखा’ SUV थी जिसे मर्सिडीज़ जैसी दिखाने के लिए मॉडिफ़ाई किया गया था. हमने कार के मालिक से भी बात की.

जनवरी 2022 में प्रीति गांधी ने ग़लत दावा किया कि उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक विनय शाक्य का अपहरण कर लिया गया है. क्योंकि समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर किया था. स्थानीय पुलिस ने उनके ट्वीट का जवाब देते हुए साफ़ किया कि अपहरण का दावा पूरी तरह से ग़लत था. इसके बाद प्रीति गांधी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया.

खुद ग़लत जानकारी का शिकार बनीं

प्रीति गांधी खुद ग़लत जानकारी का शिकार तब बनीं, जब 2021 में एक वायरल थ्रेड में उनके पुराने पोस्ट के तीन असली स्क्रीनशॉट के साथ एक बनावटी ट्वीट शेयर किया गया. इस ट्वीट में दावा किया गया था कि उनके पति कैपिटल हिल दंगों से बाल-बाल बचे थे. इस थ्रेड को 10 हज़ार से ज़्यादा लाइक्स मिले और कई पत्रकारों और कांग्रेस सदस्यों ने इसे आगे बढ़ाया. इसमें उस बनावटी ट्वीट को एक ऐसे पैटर्न का हिस्सा बताया गया जिसमें प्रीति गांधी के पति कई बड़ी घटनाओं से बाल-बाल बचे थे. हालांकि, तीन स्क्रीनशॉट असली थे और एक घटना (26/11 मुंबई हमला) से जुड़े थे. लेकिन कैपिटल हिल वाला ट्वीट फ़र्ज़ी था.