फोटोशॉप रिपोर्ट: शाहरुख़ खान ने 2 करोड़ में लिखवाया बुर्ज़ खलीफा पर अपना नाम

“ये क्या हो गया सच्चा मुसलमान कभी ऐसा नही कर सकता तो इसका मतलब क्या समझा जाये शाहरुख खान सच्चे मुसलमान नही है ओ भी मात्र दो करोड़ रुपये के लिए ..! #ShahRukhKhanBirthday”

उपरोक्त संदेश को ट्विटर पर NDTV इंडिया  के एक लेख के स्क्रीनशॉट के साथ साझा किया गया है। लेख का शीर्षक है –“2 करोड़ में लिखवाया बुर्ज खलीफा पर अपना नाम। पैसे देने की बारी आयी, अब फ़ोन नहीं रिसीव कर रहे शाहरुख़ खान।” इस स्क्रीनशॉट को साझा करने वाले पिंकू शुक्ला को ट्विटर पर करीब 85,000 हज़ार लोग फॉलो करते हैं, जिनमें कैबिनेट मंत्री पियूष गोयल, निर्मला सीताराम के कार्यालय और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का ट्विटर हैंडल भी शामिल है। (आर्काइव)

समान दावे के साथ फेसबुक पर भी NDTV इंडिया के स्क्रीनशॉट को पोस्ट किया गया है।

ये क्या हो गया सच्चा मुसलमान कभी ऐसा नही कर सकता तो इसका मतलब क्या समझा जाये शाहरुख खान सच्चे मुसलमान नही है ओ भी मात्र दो करोड़ रुपये के लिए ..!
#ShahRukhKhanBirthday

Posted by Umakant Misra on Sunday, 3 November 2019

सोशल मीडिया के दावों पर दक्षिणपंथी वेबसाइट ओपइंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था –“SRK ने ख़ुद को जन्मदिन विश करने के लिए खर्च कर दिए ₹2 करोड़? सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा”। इस लेख में दुबई की समाचार वेबसाइट ‘अरब बिजनेस’ का हवाला दिया गया, जिसमें बुर्ज खलीफा में अपना नाम लिखवाने की कीमत के बारे में जानकारी दी गई है। हालांकि, शीर्षक से अलग ओपइंडिया ने अपने लेख में कहीं भी शाहरुख़ खान और 2 करोड़ की कीमत का ज़िक्र नहीं किया है।ओपइंडिया के लेख को ट्विटर पर कई उपयोगकर्ताओं ने साझा किया है।

NDTV इंडिया के स्क्रीनशॉट की पड़ताल करने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के अधिकृत एप पर भी अनुरोध प्राप्त हुए है।

फोटोशॉप तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने इस खबर की पड़ताल करने के लिए NDTV इंडिया की वेबसाइट को खंगाला और हमें शाहरुख़ के जन्मदिन के अवसर पर प्रकाशित किया गया एक लिखा मिला। वेबसाइट पर मिले लेख का शीर्षक है, “शाहरुख खान के रंग में रंगा दुबई का ‘बुर्ज खलीफा’, देखने पहुंची लोगों की भारी भीड़…देखें वायरल Video.” नीचे प्रसारित तस्वीर में इस लेख और NDTV इंडिया  के स्क्रीनशॉट के बीच की समानताओं को दिखाया गया है।

  1. लेख को प्रकाशित करने की तारीख।
  2. लेख में शामिल तस्वीरें।
  3. तस्वीरों के कैप्शन।

हालाँकि, दोनों लेखों के शीर्षक एक दूसरे से पूरी तरह अलग है और दोनों शीर्षक के फॉन्ट भी अलग है।

इस प्रकार, NDTV इंडिया के मूल लेख को फोटोशॉप कर सोशल मीडिया में प्रसारित किया गया। अक्सर मीडिया संगठनों के स्क्रीनग्राफ या तस्वीर को फोटोशॉप कर यह दर्शाने की कोशिश की जाती है कि संबंधित खबर वास्तविक है, जैसे कि न्यूज़18 के ग्राफ़िक को फोटोशॉप कर IS प्रमुख बगदादी की मौत का श्रेय पीएम मोदी को दिया गया, आज तक के प्रोमो की तस्वीर को फोटोशॉप कर के साझा किया गया।

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