एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें एक गाड़ी पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट, हरियाणा सरकार लिखा है. कई पुलिसवाले दो महिलाओं को घर से निकालकर पुलिस की गाड़ी में बैठा रहे हैं. इसी क्रम में एक पुलिसवाला उनपर डंडा चलाता है. इस वीडियो को नूंह में हुए सांप्रदायिक हिंसा से जोड़कर शेयर किया जा रहा है. कई यूजर्स ने वीडियो शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि नूंह में कर्फ्यू लगने के बाद वहां की पुलिस औरतों को घर से उठाकर ले जा रही है.

राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकांत त्यागी ने ये वीडियो ट्वीट करते हुए इसे हरियाणा के नूंह का बताया. (आर्काइव लिंक)

ट्विटर यूज़र ‘Randomsena’ ने भी ये वीडियो ट्वीट करते हुए इसे नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ा. (आर्काइव लिंक)

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भी ये वीडियो ट्वीट करते हुए कहा, “किसने अधिकार दिया है इन पुलिसवालों को इसतरह से लाठियों से महिलाओं को मारने का? इन जैसे पुलिसवालों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून कब बनेगा?” (आर्काइव लिंक)

ऐसे ही कई यूज़र्स ने ये वीडियो हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जोड़कर शेयर किया.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने देखा कि वीडियो में सभी पुलिसवाले मास्क लगाए हुए हैं. इससे हमें लगा कि शायद ये वीडियो लॉकडाउन के वक्त का हो सकता है. हमने देखा की सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने लिखा था कि ये वीडियो पुराना है और पलवल का है. इस आधार पर हमने की-वर्ड्स सर्च किया और मोहम्मद खलीद नाम के यूज़र द्वारा ये वीडियो 24 अप्रैल 2020 को ट्वीट किया हुआ मिला. यूज़र ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा था कि ये मामला हरियाणा के पलवल ज़िले के उत्तवर गांव का है. हालांकि ऑल्ट न्यूज़ इस घटना की जगह की पुष्टि नहीं कर पाया है लेकिन इतना तो साफ है कि ये वीडियो कम से कम 3 साल पुराना है. और इसका हाल में हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है.

कुल मिलाकर, कई नेताओं और सोशल मीडिया यूज़र्स ने 3 साल पुराना वीडियो हाल में हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जोड़कर शेयर किया.

ग़लत
दावा:
नूह में कर्फ्यू लगने के बाद वहाँ की पुलिस औरतों को घर से उठाकर ले जा रही है

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