इस वक़्त देश एक महामारी के दौर से गुज़र रहा है जिसमें संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 19 मार्च को पीएम मोदी ने अपने भाषण में कोरोना वायरस से बचने के उपाय सुझाए. उन्होंने लोगों से रविवार 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने की अपील करते हुए सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक अपने घर में रहने की सलाह दी.

इसके बाद से सोशल मीडिया यूज़र्स एक मेसेज शेयर कर रहे हैं. जिसका दावा है कि कोरोना वायरस का जीवन एक जगह पर अधिकतम 12 घंटे का होता है, इसीलिए 14 घंटे का ‘जनता कर्फ्यू’ इस चेन को ख़त्म कर देगी. ये मेसेज हिन्दी, अंग्रेजी और तेलुगु में #JantaCurfew के साथ शेयर हो रहा है.

ये दावा ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप पर वायरल है.

वर्डिक्ट

ग़लत

फ़ैक्ट्स

1. ये वायरस तीन दिन तक जीवित रहता है

2. इस वायरस से संक्रमित होने के बाद कोई व्यक्ति अगले 2 हफ़्ते तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है.

फ़ैक्ट-चेक

एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में ये वायरस कई तरह से ट्रांसफ़र कर सकता है-

डायरेक्ट : संक्रमित व्यक्ति को छूने से या उसके अन्य व्यक्तियों के नज़दीक खांसने या छींकने से.
इनडायरेक्ट : जब संक्रमित व्यक्ति कोई चीज़ छूता है और दूसरा व्यक्ति उसी चीज़ को छू लेता है.

इस आर्टिकल में हम ये देखेंगे कि कैसे 14 घंटे का ‘जनता कर्फ्यू’ इस संक्रमन को रोकने में कामयाब नहीं होगा. क्यूंकी कोरोना वायरस 2-3 दिनों तक एक संक्रमित जगह पर मौजूद रहता है. हालांकि ये ‘जनता कर्फ्यू’ काफ़ी हद तक नए संक्रमण रोकने में कामयाब होगा.

संक्रमित व्यक्ति से ये वायरस 2 हफ़्ते तक फैल सकता है

नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा है. इम्पीरियल कॉलेज, यूके के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हर कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति औसतन 2.6 दूसरे लोगों को संक्रमित करता है. इससे ये इन्फ्लुएंजा के रूप में संक्रमित हो जाता है. आम इन्फ्लुएंजा वायरस के फैलने की ज़्यादा संभावना नहीं होती है और ये खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है. 2019-nCoV दो हफ़्ते तक फैल सकता है, जिससे अन्य लोगों के संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति, चाहे उसमें इसके लक्षण दिखें या न दिखें, दो सप्ताह तक किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है. इन्हीं वजहों से कोरोना वायरस संक्रमण के संभावितों तक को दो हफ़्ते अकेले में रहने की सलाह दी जा रही है. WHO ने बाकायदे इसके लिए गाइडलाइंस जारी की हैं.

कोरोना वायरस 3 दिन तक संक्रमित स्थान पर मौजूद रहता है

ऑल्ट न्यूज़ ने एक डीटेल्ड फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट में बताया था कि कोरोना वायरस किसी जगह पर कितने समय तक ज़िंदा रहता है. न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिसर्च (Doremalen et al 2020) प्रकाशित हुई है. ये बताती है कि नोवेल कोरोना वायरस (COVID-19) कई घंटों तक हवा में मौजूद रह सकता है और 2-3 दिन तक संक्रमित स्थान पर जीवित रहता है. उन्होंने एक संक्रमित व्यक्ति की खांसी की नक़ल करते हुए नेब्लायुइज़र से हवा में छिड़काव करके वायरस का टेस्ट किया. उन्होंने पाया कि ये वायरस का हवा में कम से कम 3 घंटे तक, तांबे की सतहों पर 4 घंटे तक, कार्डबोर्ड पर 24 घंटे तक और प्लास्टिक या स्टेनलेस स्टील सतहों पर 2-3 दिन तक मौजूद था.

Image adapted from (Doremalen et al 2020)

किसी भी वायरस का जीवनकाल उसके ख़त्म होने या उसकी आधी उम्र (हाफ़-लाइफ़) से जाना जा सकता है. ये वो वक़्त है जब वायरस प्रति लीटर हवा में 50% टिश्यू-कल्चर इन्फ़ेक्शस डोज़ (TCID50) तक रह जाता है. इससे ये बात तय हो जाती है कि वायरस कॉपर (तांबा) या ऐरोसिल की तुलना में कार्डबोर्ड, स्टेनलेस स्टील और प्लास्टिक पर लंबे समय तक रह सकता है.

ऐवरेज के हिसाब से वायरस का हाफ़ लाइफ़ टाइम प्लास्टिक की सतह पर सबसे ज़्यादा रहता है, जो कि 15.9 घंटे हैं (ज़्यादा से ज़्यादा 19.2 घंटे). इसकी तुलना में कॉपर का सबसे कम 3.4 घंटे (ज़्यादा से ज़्यादा 5.11 घंटे) है. स्टेनलेस स्टील की सतह पर 13.1 घंटों तक (ज़्यादा से ज़्यादा 16.1 घंटे). कपड़ों की सतह के बारे में अभी तक कोई रिसर्च नहीं की गई है.

स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक़, ये वायरस हवा से संक्रमित लोगों द्वारा छुई हुई चीज़ों को छूने से या डायरेक्ट ह्यूमन कॉन्टैक्ट के ज़रिए फैलता है. इस वायरस को HCoV-19 का नाम दिया गया है. मगर इस स्टडी में इसकी पहचान SARS-CoV2 के रूप में की गई है जिसके जीवनकाल की तुलना पहले कोरोना वायरस संक्रमण में पाए गए वायरस SARS-CoV या SARS-CoV1 से की गई है.

निष्कर्ष

इस तरह, जो कोई भी व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हुआ है वो इसे 14 दिनों तक किसी और व्यक्ति तक पहुंचा सकता है. कोरोना वायरस को प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतह पर कम से कम 2 से 3 दिन तक पाया जा सकता है. इस स्टडी के आधार पर ये बात मालूम हुई कि ये वायरस एरोसोल (हवा में मौजूद कोरोना वायरस का क्लस्टर यानी कि समूह) और fomites (वस्तुएं जैसे कि प्लास्टिक, स्टील और अन्य मेटल) पर मौजूद हो सकते हैं. ये थोड़ी राहत की बात है क्योंकि ये वायरस मेटल की सतह की तुलना में हवा में काफ़ी कम वक़्त तक मौजूद रह सकता है. इस तरह, जैसा कि सोशल मीडिया में दावा किया गया है, 14 घंटों तक कर्फ्यू में रह कर इस वायरस के संक्रमण की चेन को तोड़ा नहीं जा सकता है. हालांकि ये बात सही है कि 14 घंटे तक लॉकडाउन होकर इस वायरस के इन्फ़ेक्शन को फैलने से काफ़ी हद तक रोका जा सकता है.

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About the Author

Dr. Sumaiya Shaikh is the Founding-Editor for Alt News Science and works as a Neuroscientist in Sweden. She holds a PhD in Medicine from Sydney, Australia. Her current research is in biological psychiatry to study the human brain during violent extremism. Also, she is writing a book on the science behind why ordinary people commit violent crimes. She advocates for evidence-based medical practice & critiques misinformation for public health.