विवादों से घिरे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (2019) के ख़िलाफ़ राजधानी दिल्ली में चल रहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन 23 फ़रवरी को हिंसा में बदल गया. हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच एक हफ़्ते तक चले इन दंगों में 53 लोगों की जानें गईं. दिल्ली दंगों से पहले ऑल्ट न्यूज़ ने मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ फै़लाई गई दर्जनों गलत ख़बरों की सही जानकारी सामने रखी थी. दंगो के दौरान कई वीडियोज़ और लाइव स्ट्रीम्स सोशल मीडिया पर देखने को मिले. इन्हीं में से एक वीडियो फ़ेसबुक यूज़र सुदेश ठाकुर ने अपलोड किया था, जो पेशे से इलेक्ट्रिशियन है.

सुदेश ठाकुर ने फ़ेसबुक लाइव के दौरान कबूला, “एक मुल्ले को आज़ादी दी.” उनके आस-पास दर्जनों लोगों की भीड़ थी और वहां जश्न का माहौल था – लोग ‘हर हर महादेव’ की आवाज़ पर नाचते देखे जा सकते हैं. ये वीडियो ठाकुर ने कुछ ही वक़्त में डिलीट कर दिया. हमारे रिकॉर्ड के अनुसार यह 24 फ़रवरी को शाम 5 से 6 बजे के बीच पोस्ट किया गया था.

सुदेश ठाकुर की फे़सबुक प्रोफ़ाइल छानने पर ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए ऐसे बहुत सारे पोस्ट किए थे (पीडीएफ़ देखें) और 24 और 26 जनवरी के बीच हुए दंगों में लोगों से हिस्सा लेने की अपील की थी. यही नहीं उनके फे़सबुक बायो में लिखा है, ‘हिंदू ही सर्वोपरिय’. इसके अलावा ऑल्ट न्यूज़ ने उनकी प्रोफ़ाइल में ऐसी कई फ़ोटोज़ पायीं जिससे ये साफ़ होता है कि वो हिंदू रक्षा दल के सदस्य हैं.

इस आर्टिकल में हम सुदेश ठाकुर की फे़सबुक प्रोफ़ाइल की ऐक्टिविटी और हमारी उनसे फोन पर हुई बात के आधार पर कुछ तथ्य शेयर करेंगे जिससे मालूम चलता है कि उनकी सोच को कट्टर बनाने में गलत सूचना और ग़लत जानकारियों का कितना बड़ा हाथ है.

ऑल्ट न्यूज़ ने सुदेश से पूछा कि मुस्लिम व्यक्ति को आज़ादी देने से उनका क्या मतलब है. उन्होंने कहा “मैं आपको बताता हूं क्या हुआ. वहां पर शनि मंदिर है. मैं वहां AC और फ़्रिज का काम करता हूं और वहां कंप्रेसर खरीदने गया हुआ था. मुझे पता नहीं था वहां दंगे-वंगे का हिसाब चल रहा है. मंदिर पे हनुमान चालीसा हो रही थी. उस भीड़ में एक मुसलमान लड़का कमर में बेल्ट के नीचे चाकू रख कर और भगवा गमछा सिर पर बांध कर घूम रहा था. उसपे पता नहीं किसी को शक हुआ क्या हुआ, उससे उसका नाम पूछा. उसने माथे पे तिलक नहीं लगाया हुआ था, पता नहीं उसने क्या नाम बताया, एकदम से हाथापाई शुरू हो गयी. तो जिस दुकान पर मैं कम्प्रेसर ले रहा था, वहां का मालिक, हरी सिंह जी और मैं, हम दोनों वहां दौड़ते हुए पहुंचे. वहां बहुत भीड़ लग रही थी. हम देखने लगे क्या हो रहा है, तो किसी ने बताया, एक ‘मुल्ला आतंकवादी’ पकड़ा गया. उस समय वहां कोई दंगे नहीं हो रहे थे. तो फिर मैंने वीडियो बनाया कि एक आतंकवादी को आज़ादी दी. फिर हमें बाद में पता चला कि वहां दंगे हो रहे थे और उन्होंने एक लड़के को ऐसे-ऐसे पकड़ा था.”

जब सुदेश ठाकुर से इस बारे में पूछा गया कि उन्होंने अपने फेसबुक लाइव में ‘आतंकवादी’ की जगह ‘मुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल क्यूं किया तो उन्होंने इस पर सफ़ाई देना ज़रूरी नहीं समझा. यहां तक कि उसके फे़सबुक पर लाइव होने के आस-पास ही उन्होंने एक गर्व से भरा हुआ फ़ेसबुक स्टेटस अपलोड किया जिसमें एक ‘जिहादी’ को जन्नत पहुंचाने की बात लिखी है. इस पोस्ट पर चर्चा करते हुए ठाकुर ने कहा, “मेरा मानना है कि जो देश के ख़िलाफ, चाहे किसी भी धर्म, किसी भी मज़हब का हो, जो देश के ख़िलाफ बोलता हो, उसे सीधा गोली मार दो.”

इस बातचीत के दौरान सुदेश ठाकुर ने एक रिपोर्टर के पाकिस्तानी होने की बात कही. उन्होंने ये भी कहा, ”हमारे जो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं उनको भी एक कॉल आया था, धमकी भरा. पहले उन्होंने ऐसे ही बात करी, जैसे आप कर रहे हैं. करीब एक डेढ़ घंटे बात हुई. उसके बाद उसने अपना पाकिस्तानी राग अलापना शुरू करा. अगर आप वहां से बोल रहे तो डायरेक्ट बोलिए मैं वहां से बात कर रहा हूं.” आखिरकार जब उन्हें भरोसा हुआ कि वो एक भारतीय नागरिक से बात कर रहे हैं तो फिर फे़सबुक पोस्ट पर चर्चा शुरू की.

सुदेश ठाकुर ने कहा कि वह 24 फ़रवरी की रात को शादी अटेंड करने बरेली के लिए निकले थे. और अगले ही पल उन्होंने ये भी कबूला – “मैं आपको यही तो बता रहा हूं, उस समय दिल्ली में था ही नहीं, अगर मैं दिल्ली में होता तो भगवान कसम मेरे हाथ से कुछ ऐसा जरूर होता, कि आज मैं उसके लिए पुलिस कस्टडी में होता.”

उसी दिन सुदेश ने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें लोग “मोदी जी लट्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं” चिल्ला रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो चाहते हैं कि प्रधानमंत्री हिंसा कराएं तो सुदेश ने हंसते हुए कहा, “देखिये लट्ठ बजाना मोदी जी का काम नहीं है, वो हम लोगों का काम है. बजाएंगे वो नहीं, बजाने का काम तो हम जैसे लोगों को करना पड़ेगा, पर वो एक बार इशारा करेंगे तभी तो …”

उन्होंने 24 फ़रवरी को एक और वीडियो भी शेयर किया था. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि चांद बाग में हिंसा हो रही थी और सुदेश लोगों को इसमें हिस्सा लेने और सड़क पर आने के लिए भड़का रहे थे. उन्होंने पूछा, “कब तक घर पर बैठे रहोगे?”

अगले दिन, यानी 25 फ़रवरी को, उन्होंने धमकी भरे शब्दों में लिखा, “रात का समय प्रसासान को दे इन सब से कुछ नही होता तो कल फिर तांदव होगा” उन्होंने सफ़ाई दी कि 23 फ़रवरी को दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता कपिल मिश्रा के भाषण से प्रभावित होकर यह पोस्ट किया. आगे कहा, “मैं पुलिस को याद दिला रहा था कि उनके पास 2 दिन का वक्त है.” इस बातचीत में सुदेश ने ये भी माना कि कानून अपने हाथ में लेना कोई ग़लत काम नहीं है.

सुदेश ठाकुर ने मुस्लिम महिलाओं का एक वीडियो शेयर किया था जिसमें वो प्रदर्शनकारियों पर फेंके गए आंसू गैस के गोलों के कारण खांस रही थीं. उन्होंने लिखा कि ये गोले इनकी योनि में डाल देने चाहिए. पोस्ट को सही बताते हुए कहा, “वो हमारे देश के ख़िलाफ बोल रहे हैं, हम उनके ख़िलाफ बोल रहे हैं. गलत भाषा का प्रयोग मैंने किया है लेकिन जो कोई हमारे देश के लिए ग़लत बोलेगा, मोहल्ले के लिए ग़लत बोलेगा, हमारे भाई के लिए ग़लत बोलेगा तो इससे भी ज्यादा गन्दी भाषा का प्रयोग किया जा सकता है.” (पोस्ट का आर्काइव किया हुआ लिंक)

जब ऑल्ट न्यूज़ ने सुदेश को बताया कि दिल्ली पुलिस का रिकॉर्ड बताता है कि ज़्यादातर मौतें और नुकसान मुस्लिम समुदाय के लोगों का हुआ है, तो उन्होंने जवाब में कहा, “मैं आपको दो कारण बताऊंगा जो मेरे हिसाब से बनते हैं…. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट मैंने नहीं पढ़ी कि क्या उसमें था क्या नहीं था. मैक्सिमम माॅमडंस लोग क्यूं मरे. मैक्सिमम मुस्लिम लोग इसलिए मरे क्यूंकि वो सीएए का विरोध कर रहे थे… सीधा-सीधा. हर हिन्दू इसके सपोर्ट में थे. उसका सपोर्ट और विरोध इतना हो गया था कि मॉमडंस उसके लिये देश विरोधी बनने को तैयार थे, मरने-मारने को तैयार थे.” (मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों के लिए एक स्लैंग के रूप में गैर मुस्लिम लोग ‘मॉमडंस’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं.)

सुदेश ने कहा, “इस प्रोटेस्ट के ज़रिये, इस प्रोटेस्ट की आड़ में इतने गलत धंधे हो रहे थे, इतने सारे गलत काम.” जब उन्हें बताया गया कि इन बातों का कोई सबूत नहीं है तो उन्होंने कहा, “सर वहां जिस्मफरोशी का धंधा हो रहा था. उसके वीडियोज़ आप फ़ेसबुक पे ही देखें, कितने हो रहे थे.” दिल्ली दंगों से पहले ऑल्ट न्यूज़ ने महिला प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ झूठी खबरों और अफ़वाहों की सच्चाई को उजागर किया था. इनमें से कुछ झूठे दावों के अनुसार मुस्लिम महिलाएं नशे का सामान बेच रही थीं और देह व्यापार में संलिप्त थीं. ठाकुर ने कहा, “एक वीडियो है सर मेरे पास जिसमें ना, लाइन लगाके जो उस प्रोटेस्ट में जा रहे थे और सीएए दंगों में जो पार्ट ले रहे थे, उसमें एक वीडियो है मेरे पास, जिसमें पैसे बांटे जा रहें हैं मॉमडंस के इलाके में..” इस वीडियो का ऑल्ट न्यूज़ ने 3 मार्च को फै़क्ट चेक किया था.

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इसके अलावा सुदेश ने ये भी बताया कि वो रोज़मर्रा के समाचारों के लिए सुदर्शन न्यूज़ देखते हैं. पिछले 1 साल में ऑल्ट न्यूज़ ने 13 मौकों पर सुदर्शन न्यूज़ और इसके मैनेजिंग एडिटर-इन-चीफ़ सुरेश चव्हाणके द्वारा फै़लाई गयी ग़लत जानकारियों के बारे में बताया है. पिछले साल हमने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें सुदर्शन न्यूज़ द्वारा फैलाई गयी ऐसी गलत सूचनाओं की जानकारी दी गई है जो सामुदायिक हिंसा भड़का सकती थीं.

सुदेश ठाकुर ने 26 फ़रवरी को एक वीडियो शेयर किया था जिसमें अशोक नगर में मस्जिद की मीनार पर चढ़ती और भगवा झंडा लहराती उपद्रवियों की भीड़ दिख रही थी. मुस्लिम समुदाय के प्रार्थना स्थल को हानि पहुंचाने पर खुशी जताते हुए सुदेश ठाकुर ने लिखा, “इन हिन्दू भाइयों ने जो साहसी कार्य किया कारसेवको की तरह आप भी हमेसा दिखाई देते रहोगे सिर्फ और सिर्फ एक नारा। हिन्दू एकता जिन्दाबाद” सुदेश यह मानता है कि ये कारनामा इतिहास में वैसे ही दर्ज हो गया है जैसे 1992 का बाबरी मस्जिद विध्वंस. सुदेश से हमारी बातचीत से कुछ पहले ही उसने बाबरी मस्जिद विध्वंस का वीडियो शेयर किया था जिसमें बॉलीवुड फिल्म ‘तान्हाजी’ का गाना पीछे बजते हुए सुना जा सकता है. इसके साथ लिखा, “ये सिर्फ सोरोआत है जो अपनी धरती और सब वापस लिये जाएंगे इस राज मैं”

“देखिये, उस अयोध्या ढांचे के टाइम में मैं तो था नहीं, वो मेरे जन्म से पहले की बात है. जन्म के बाद नहीं होगी तो मैं छोटा रहा हूंगा बहुत. पर उस समय के दो भाइयों की फोटो देखा हूं, कोठारी बंधू-जिन्हें गोली मार दी गयी थी गवर्नमेंट के तरफ़ से. और उनका नाम आया था कि उन्होंने हथोड़े बजाये थे, मस्जिद के ऊपर चढ़ के, उस मस्जिद के ऊपर, जब वो मस्जिद गिरी थी. लोग आज भी जब व्हाट्सऐप पर उसकी फोटो आती है तो लोग आज भी याद करते हैं कि मस्जिद इन लोगों ने गिराया था” फिर अशोक नगर में मस्जिद पर झंडा लहराने पर कहा, “मस्जिद पर चढ़कर झंडा लहराया है न तो उनको बोला गया है कि जैसे उन्हें(कोठारी बंधुओं को) याद किया जाता है न वैसे ही आपको भी याद किया जाएगा कि आपने किसी मस्जिद पे तिरंगा लहरा दिया था.”

जब हमने सुदेश से पूछा कि दिल्ली दंगों के दौरान मस्जिद पर भगवा झंडा लगाना सही था, तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल, अच्छी बात थी. अगर कोई हमारे मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाता है तो उस मस्जिद को तो बिलकुल तोड़ना चाहिए. और मैं तो ये कहता हूं कि जितनी भी मस्जिदें हैं अगर आप सारी की सारी तोड़ोगे तो उसके नीचे कुछ न कुछ तो ज़रुर मिलेगा और मिल ही रहा है आजकल. जहां भी मस्जिद टूट रहे हैं वहां मंदिर मिल रहे हैं. क्यूंकि या तो इन्होंने पहले ही स्ट्रेटजी बनाली कि मंदिर तोड़ दो मस्जिद बना लो, पहले ही ज़मीन कब्ज़ा ली जाएगी. आजतक इन्होंने कभी एक मस्जिद ज़मीन खरीद के बनाया?… मैंने मंदिर के ऊपर मस्जिद देखा है लेकिन किसी मस्जिद के ऊपर मंदिर नहीं देखा… सुप्रीम कोर्ट ने भी बोल दिया नीचे मंदिर था.”

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 2 दिन बाद यानी 11 नवंबर को स्क्राॅल( Scroll) ने रिपोर्ट किया था, “रामजन्मभूमि आंदोलन ने 30 साल पहले ही राष्ट्रव्यापी उन्माद को हवा दी जिसके दावे के अनुसार बाबरी मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर बनायीं गयी थी. इस आंदोलन की सफ़लता इस बात से समझी जा सकती है कि सुप्रीम कोर्ट के इस दावे को ख़ारिज कर देने के बाद भी लोग आज तक ऐसा ही मानते हैं.”

पहले भी ऑल्ट न्यूज़ ने उन गलत सूचनाओं और अफ़वाहों का खुलासा किया था जिनके अनुसार, कर्नाटक में रोड निर्माण के लिए तोड़ी जा रही मस्जिदों के नीचे मंदिर के अवशेष मिले थे. ग्वालियर किले की तस्वीरें भी ‘मस्जिद के नीचे मिले मंदिरों के अवशेष’ बताकर शेयर की गयीं. एक अन्य ग़लत दावे के अनुसार काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए ‘सफ़ाई’ करते हुए मुस्लिम प्रॉपर्टी के नीचे 40 पौराणिक मंदिर मिले थे.

सुदेश ठाकुर ने ये भी आरोप लगाया कि ऐंटी-सीएए भीड़ ने भजनपुरा का पेट्रोल पंप जलाया. द कारवां (The Caravan) की रिपोर्ट के अनुसार एक फ़ोटो जर्नलिस्ट ने पाया था कि ‘पेट्रोल पंप को हिंदू राइट-विंग भीड़ ने जलाया था’.

ऑल्ट न्यूज़ ने जून में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें उस फ़ोटो जर्नलिस्ट के बयान थे. उन्होंने हमें बताया, “ऐंटी-सीएए प्रोटेस्टर्स महिलाओं के धरनास्थल (टेंट) के आखिर में मौज़ूद थे. जैसा कि वहां पर मौज़ूद प्रदर्शनकारियों ने बताया, सुबह में पुलिस की कार्रवाई के बाद वो मुख्य सड़क की तरफ आ गए. तुरंत ही, दिल्ली पुलिस ने उनको तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया. लगभग 1 बजे दोपहर को, वहां पर लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया. आधे लोग चांदबाग़ (मुस्लिम बहुल इलाक़ा) से थे और आधे लोग भजनपुरा (हिंदू बहुल इलाक़ा) के थे जिन्होंने दिल्ली पुलिस को जॉइन कर लिया. इसके बाद पत्थरबाज़ी और आगजनी की घटना शुरू हो गई. मैंने शाम के 6 बजे तक एक सुरक्षित जगह से दंगे देखे. उस वक़्त तक, एंटीसीएए प्रदर्शनकारियों की भीड़ पेट्रोल पंप तक नहीं पहुंच पाई थी क्योंकि भजनपुरा से आई सीएए समर्थकों की भीड़ भारी पड़ रही थी. मैंने पेट्रोल पंप और गाड़ियों को धूधू कर जलते हुए देखा. मेरे ऑब्ज़र्वेशन के अनुसार, प्रदर्शनकारी, भजनपुरा की तरफ़ से होने वाले हमले से बचने की कोशिश कर रहे थे.”

फ़ोटो जर्नलिस्ट के अनुसार संघर्ष वाला क्षेत्र लगातार दाईं तरफ बढ़ता चला गया. (नीचे देखा जा सकता है.)

सुदेश ठाकुर का हिंदू रक्षा दल के साथ संबंध

ऑल्ट न्यूज़ को सुदेश के हिंदू रक्षा दल (एचआरडी) के साथ संबंधों के कई सबूत मिले. सुदेश की एचआरडी के राष्ट्रीय मुखिया भूपेंद्र तोमर जिन्हें पिंकी भैय्या के नाम से भी जाना जाता है, के साथ पहली तस्वीर जनवरी, 2017 की मिली. इस साल की शुरुआत में ही भूपेन्द्र तोमर ने दिल्ली की जवाहरलाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में स्टूडेंट्स पर हुए हिंसक हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी. कुछ मीडिया आउटलेट्स ने तोमर के कबूलनामे को रिपोर्ट भी किया था और ऐसा ही एक आर्टिकल सुदेश ठाकुर ने अपनी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी शेयर किया हुआ है. भूपेन्द्र तोमर ने दिसंबर 2019 में एक फे़सबुक लाइव शेयर किया था जिसमें एचआरडी सदस्य अमित प्रजापति ने लोगों को ऐंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों का सिर फ़ोड़ने के लिए कहा था. इस वीडियो को 22,000 से ज़्यादा बार देखा गया.

डेक्कन हेरल्ड के अनुसार हिंदू रक्षा दल बीजेपी का समर्थन करता है और इसका मुख्यालय गाज़ियाबाद में है. यह संगठन पहली बार खबरों में आया जब 2014 में इसने आम आदमी पार्टी के कौशांबी स्थित कार्यालय पर हमला कर दिया था. द हिंदू के अनुसार गाजियाबाद पुलिस ने भूपेन्द्र तोमर और इस घटना से जुड़े 12 अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया था.

अगस्त 2017 में सुदेश ठाकुर ने एचआरडी बैनर के सामने हाथ में तलवार लिए भूपेन्द्र तोमर (पिंकी भैय्या) के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की थी.

सुदेश ठाकुर ने अप्रैल 2018 में एचआरडी के किसी समारोह की तस्वीर डाली थी जिसमें इनकी हिन्दू रक्षा दल के साथ नज़दीकी साफ़ जाहिर हो जाती है. उन्होंने हमें बताया, “मैं पहले इन सब चीजों में बहुत ज्यादा रूचि रखता था. अब कुछ भी नहीं है. अब मैं ज्यादातर किसी चीज़ में समय नहीं दे पाता हूं, क्यूंकि मेरी शादी हो चुकी है, बच्चे हैं. अब मैं किसी को भी समय नहीं दे पाता हूं उस चीज़ के लिए. लोगों से मिलता हूं, संगठन के दोस्त हैं. अगर कोई भी बातचीत होती है… बट मैं किसी चीज़ को अब समय नहीं दे पा रहा हूं.”

यानी, सुदेश ने दिल्ली दंगों के दौरान कई वीडियोज़ और स्टेटस अपनी फे़सबुक प्रोफ़ाइल पर शेयर किये जो भड़काऊ थे. इसमें ‘मुस्लिमों को आज़ादी देने’ और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों के विध्वंस का समर्थन शामिल है. लेकिन उनकी कहानी और भी बड़ी वजहों से परेशान करती है. सुदेश ठाकुर एक आम आदमी है – लाखों की भीड़ में एक अंजाना नाम जो आस-पास के माहौल की वजह से कट्टरपंथी की राह पर चल पड़ा. वो अपने दोस्तों के शेयर किए गए भड़काऊ व्हाट्सऐप मेसेजेज़ पर आंख मूंद के विश्वास करते हैं और ख़बरों के लिए सुदर्शन न्यूज़ जैसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. हिन्दू रक्षा दल के सदस्य सुदेश को पूरी तरह लगता है कि सीएए प्रदर्शनकारी ‘ऐंटी-नेशनल’ हैं. उन्होंने कई बार यह भी कहा कि कानून को अपने हाथ में लेना उचित है. सुदेश ये भी मानते हैं कि जिन लोगों का राष्ट्रवाद के प्रति अलग नज़रिया है, उन लोगों को बिना सोचे गोली मार देनी चाहिए.

फे़सबुक के अनुसार हेट स्पीच यानी भड़काऊ भाषण/कथन की परिभाषा है-”संरक्षित विशेषताओं – नस्लीय पहचान, जातीयता, राष्ट्रीयता, धार्मिक संबद्धता, सेक्शुअल ओरिएंटेशन, जाति, लिंग, लैंगिक पहचान और गंभीर बीमारी या विकलांगता – के आधार पर लोगों पर सीधा हमला”. हमारी बातचीत के दौरान कई बार सुदेश ठाकुर ने अपनी बातों को सही ठहराया क्योंकि उन्होंने कोई वीडियो फे़सबुक या व्हाट्सऐप पर देखा. दिल्ली में हुए दंगों को 5 महीने बीत चुके हैं और फे़सबुक ने अभी तक सुदेश ठाकुर के तमाम पोस्ट्स पर कोई ऐक्शन नहीं लिया है. इतने बड़े सोशल मीडिया ब्रांड से की जा रही ऐसी अनदेखी बाकी यूज़र्स को हेट स्पीच यानी भड़काऊ भाषण और कॉन्टेंट पब्लिश करने की शह देती नज़र आती है.

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About the Author

He joined as an intern in 2019. Until June 2022, his work primarily focused on fact-checking. Now his primary responsibilities include catalysing all aspects of organisational growth — from fundraising to development of new projects at Alt News. He attended the Asian College of Journalism (2015-16) and The Maharaja Sayajirao University of Baroda (2012-2015). In past, he worked at The Hindu and Zee Media's WION.
Tipline Bling: archit@altnews.in