पुलवामा हमले के बाद पीएम के कार्यक्रम को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी तथ्य-जांच बदल ली

फेक : पुलवामा हमले के 3 घंटे बाद पीएम के कॉर्बेट में फिल्म शूटिंग करने का कांग्रेस ने झूठा दावा किया – (अनुवाद)।” टाइम्स फैक्ट चेक का यह ट्वीट 6000 से ज्यादा बार रीट्वीट किया गया था। पुलवामा हमले के दिन प्रधानमंत्री का यात्रा कार्यक्रम बड़ी चर्चा का विषय बना था। कांग्रेस के इस दावे के साथ कि वे डिस्कवरी फ़िल्म के लिए शूटिंग कर रहे थे, उस दावे के सत्यापन के लिए कई तथ्य-जांच की गई। एक तरफ उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर कार्यक्रम को सिलसिलेवार बनाने/समझने की कोशिश की गई, वहीं, टाइम्स फैक्ट चेक ने अनाम सरकारी स्रोत के हवाले से भाजपा के बयान के समर्थन में परिणाम जारी कर दिया। [पुराने आर्काइव का लिंक]

किसी भी तथ्य-जांच का सार दावे का स्वतंत्र सत्यापन होता है। ऑल्ट न्यूज़ ने इसे पूरा करने के लिए घंटों व्यापक अनुसंधान किया। सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए लाइव वीडियो को देखने, स्थानीय मीडिया की खबरों की समीक्षा करने, जिम कॉर्बेट रिजर्व के निशान नक्शे का अध्ययन करने, और पार्क को ठीक से जानने वाले वन अधिकारियों से बात करने के बाद, ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि डिस्कवरी की पीएम मोदी के साथ शूटिंग शाम 6:30 बजे तक चलने का कांग्रेस का दावा सही नहीं है। फिर भी, भाजपा का यह दावा, कि पीएम मोदी के पास पुलवामा हमले की सूचना पहुंचने से पहले डिस्कवरी की शूटिंग पूरी हो चुकी थी, का समर्थन करने वाला कोई निर्णायक सबूत नहीं है। कई प्रश्न के जवाब नहीं मिले। भाजपा के इस दावे, कि पीएम शाम 3:30 बजे रुद्रपुर सभा के लिए निकल गए और रास्ते में उन्हें आतंकी हमले की जानकारी मिली और पीएम की पार्क से निकालने का भी कोई सबूत नहीं है। इस विषय पर सनसनीखेज निष्कर्ष पहले दे देने की बजाय संपूर्ण छानबीन की जरूरत वाली ऑल्ट न्यूज़ की तथ्य-जांच संभवतः अंतिम थी। आप ऑल्ट न्यूज़ की तथ्य-जांच यहां पढ़ सकते हैं।

ऑल्ट न्यूज़ की विस्तृत तथ्य-जांच के कुछ ही घंटों में, टाइम्स ऑफ इंडिया का तथ्य-जांच-ट्वीट हटा दिया गया। लेख का नया शीर्षक है, “पुलवामा हमले के तीन घंटे बाद पीएम मोदी के कॉर्बेट में फ़िल्म शूटिंग करने को लेकर कांग्रेस-भाजपा के आरोप-प्रत्यारोप -(अनुवाद)” और लेख के शुरुआत में निम्नलिखित अपडेट किए गए :

अपडेट : टाइम्स फैक्ट चेक ने पहले इस मामले में निष्कर्ष जारी किया था जो कांग्रेस के आरोपों पर सरकार से प्राप्त प्रतिक्रिया पर आधारित था। चूंकि, तथ्य-जांच टीम स्वतंत्र रूप से दोनों तरफ के दावों को सत्यापित करने में असमर्थ रही, और इसीलिए इस मसले पर हमारा मूल निष्कर्ष अपरिपक्व था। इसलिए हम यह लेख नए अपडेट के साथ पुनः जारी कर रहे हैं -(अनुवाद)।”

यह “निष्कर्ष” यह कहने के लिए अपडेट किया गया कि “टाइम्स फैक्ट चेक इस मामले में कोई निष्कर्ष देने में असमर्थ है, इसलिए यहां केवल दोनों पक्षों के तर्कों को दिया जा रहा है -(अनुवाद)।”

मूल लेख व्यापक रूप से शेयर

इसका मूल लेख केंद्रीय मंत्री, सांसदों, विधायकों और दूसरे भाजपा पदाधिकारियों व समर्थकों द्वारा व्यापक रूप से शेयर किया गया था। गृह राज्यमंत्री किरण रिजूजू उन लोगों में से थे जिन्होंने इस लेख को रीट्वीट किया था। कुछ लोगों ने इसे वास्तविक तथ्य-जाँच के लिए गलत समझा, जबकि अन्य ने इसे शेयर किया, क्योंकि इससे, उनके पक्ष(पात) की पुष्टि होती थी और उन्हें विपक्ष के लिए हथियार मिलता था।

भाजपा  IT सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने भी यह लेख शेयर किया था।

हालांकि, यह प्रशंसनीय है कि कोई अपनी गलती सुधारे, मगर इस मामले में नुकसान हो चुका था। मूल ट्वीट 6000 से ज्यादा बार शेयर किया गया, लेकिन संशोधित ट्वीट के 12 घंटे में शून्य रीट्वीट हुए थे। वह लेख अपडेट होने से पहले फेसबुक पर 46,000 बार शेयर किया गया था। आल्ट न्यूज़ ने यह भी पाया कि केवल अंग्रेजी लेख को संशोधित निष्कर्ष के साथ अपडेट किया गया है, क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित संस्करणों का अपडेट होना बाकी है। वे जब अपडेट होंगे, तब यह संभावना नहीं है कि उन्हें उतने व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा, जितने व्यापक रूप से सनसनीखेज शीर्षक के साथ पुराना संस्करण किया गया।

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