दो AI-जनरेटेड तस्वीरों का एक कोलाज सोशल मीडिया पर वायरल है. इनमें एक तस्वीर बंगाल चुनाव में पानीहाटी सीट के लिए भाजपा के उम्मीदवार की है और दूसरी वकील और तृणमूल की राज्यसभा सदस्य मेनका गुरुस्वामी की है. दावा किया गया है कि जहां बीजेपी ने RG कर बलात्कार और हत्या पीड़िता की मां को टिकट दिया, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा की सदस्यता दी, जो इस मामले में आरोपी की वकील थीं.

कई भाजपा-गठबंधन वाले नेताओं और इन्फ्लुएंसर ने तस्वीर शेयर की और वायरल दावे को बढ़ाया. इनमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तजिंदर बग्गा भी शामिल थे. (आर्काइव)

बीजेपी समर्थक और इन्फ्लुएंसर अर्पिता चटर्जी को X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं. इन्होंने भी वायरल तस्वीर शेयर की. उन्होंने कहा, “ये आपको पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति के बारे में सब कुछ बताता है.” (आर्काइव)

कई अन्य लोगों ने वायरल दावे को आगे बढ़ाया. (आर्काइव- 123)

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फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पश्चिम बंगाल सरकार के वकील के रूप में पेश हुई थीं, अभियुक्तों के वकील के रूप में नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ऑब्जर्वर की कार्यवाही की कवरेज के मुताबिक, अदालत के समक्ष प्रमुख पक्ष पश्चिम बंगाल सरकार थे, जिसका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वकील मेनका गुरुस्वामी और अन्य लोगों ने किया और सीबीआई का प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य ने किया.

द टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल के कानूनी प्रतिनिधित्व की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई. यूज़र्स ने राज्य पर अपनी पूरी कानूनी मशीनरी को पीड़ित के लिए न्याय मांगने के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए क्लीन चिट सुरक्षित करने के लिए लगाने का आरोप लगाया. इस रिपोर्ट में भी राज्य सरकार की ओर से कानूनी सलाहकार के रूप में गुरुस्वामी का ज़िक्र किया गया है.

दूसरी ओर, एडिशनल सेशन जज, सियालदह की अदालत में जहां आरोपी संजय रॉय का मुकदमा चला, उसका प्रतिनिधित्व सौरव बंद्योपाध्याय, सुब्रत कुमार गिरि, कबिता सरकार और सेनजुति चक्रवर्ती सहित कानूनी सहायता बचाव सलाहकारों (LADC) की एक टीम ने किया. LADC तब सामने आता है जब किसी आरोपी व्यक्ति के पास कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं होता है. इस मामले में LADC को संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत सियालदह अदालत द्वारा सौंपा गया था, जो उन लोगों को मुफ्त कानूनी प्रतिनिधित्व की गारंटी देता है जो इसे वहन नहीं कर सकते हैं या जिनके मामले वकीलों द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किए जाते हैं.

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की वकील और अब-तृणमूल कांग्रेस सांसद मेनका गुरुस्वामी ने RG कर बलात्कार और हत्या मामले में आरोपियों का प्रतिनिधित्व नहीं किया.

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Student of Economics at Presidency University. Interested in misinformation.