पश्चिम बंगाल: 2019 लोकसभा चुनाव में गलत व भ्रामक सूचनाओं का प्रमुख केंद्र

2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल राजनीतिक रूप से एक महत्त्वपूर्ण राज्य के रूप में उभरा है। राज्य में 42 लोकसभा सीटें हैं। यह राज्य सभी के लिए किस्मत के दरवाज़े खोल सकता है, राज्य में बीजेपी सुंदर भविष्य तलाश कर रही है, वही तृणमूल कांग्रेस अपने गढ़ को बचाए रखने का लक्ष्य लेकर बैठी है। राज्य में चुनाव के दौरान पार्टियों के अभियानों के साथ-साथ सोशल मीडिया में राज्य से सम्बंधित गलत सूचनाओं में भी वृद्धि हुई है। ऑल्ट न्यूज़ ने ऐसे कुछ खबरों का संकलन किया है।

 1. बंगाल बीजेपी ने भ्रामक वीडियो से ममता बनर्जी पर साधा निशाना

“मोदी लहर के चलते – ममता बनर्जी ने सबको बीजेपी को वोट देने की अपील की” – बंगाल बीजेपी के ऑफिशल टविटर हैंडल पर यह बात कही गई है कि, रैली में ममता बनर्जी ने सबको भाजपा को वोट देने के लिए कहा था। इस टवीट में एक 18 सेकंड का वीडियो भी शामिल किया गया है जिसमे ममता ने कहा “भाजपा सरोकार के वोट दीये” जिसका मतलब “भाजपा को वोट दीजिए” है।

बीजेपी बंगाल ने एक भ्रामक वीडियो टवीट किया, ताकि इस वीडियो क्लिप से लोगों पर गलत प्रभाव पड़ सके। ममता बनर्जी ने 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के खानकुल में एक रैली को संबोधित किया था। अपने भाषण की समाप्ति में उन्होंने व्यंगनात्मक तरीके से भाजपा को वोट देने के लिए कहा था। बनर्जी ने कहा,”6 मई आचे दिन, एकने भेल कोरे गोनोटोंट्रोए बीजेपी सरकार के वोट दी भलो कोरे कोबोर दिन, भलो कोरे कोबोर दिन, भलो कोरे कोबोर दिन” जिसका अनुवाद है ,
“6 मई को भाजपा सरकार को अपना वोट दें और उन्हें उचित दफन दें, उन्हें उचित दफन दें, उन्हें उचित दफन दें।”

भाजपा बंगाल ने इस वीडियो के उस हिस्से को निकाल दिया था जिसमें ममता ने कहा की,”भालो कोरे कोबोर दिन“, जिसका मतलब है, “उन्हें उचित दफ़न करो” और उस हिस्से को पेश किया गया जिसमें ममता बनर्जी व्यंगनात्मक रूप से बोल रही है,“बीजेपी को वोट करो”।

2. “रोहिंग्या/बांग्लादेशियों द्वारा बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यव्वहार” ?

अप्रैल 2019 में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें दावा किया कि वीडियो में “रोहिंग्या और बांग्लादेशी शरणार्थी” है और जब पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्त्ता उनकी बस्तीओ से गुज़र रहे थे तब उनके साथ शर्णार्थीओ ने बुरा व्यव्हार किया। “यदि आप भाजपा को वोट नहीं देते हैं, तो यह बहुत जल्द पूरे देश में होगा,” इस क्लिप के साथ यह चेतावनी साझा की गई। “2019 के लोकसभा चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन नहीं दिया तो यह घटना पूरे भारत में जल्दी देखने को मिलेगी।”

 

2019 के लोकसभा चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन नहीं दिया तो यह घटना पूरे भारत में जल्दी देखने को मिलेगा

पश्चिम बंगाल मे रोहिंग्या और बांग्लादेशी रिफ्यूजी के बस्तियों से जब भाजपा कार्यकर्ता गुज़र रहे थे तब वहां के रहने वाले रोहिंग्या मुसलमान और बांग्लादेशी उनके साथ ऐसा सलूक कर रहे थे

Posted by पंडित राम शर्मा – भट्ट ब्राह्मण on Thursday, 25 April 2019

ऑल्ट न्यूज़ को  इस वीडियो की पड़ताल में मालूम हुआ की यह वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं, बल्कि गुजरात का है। यह वीडियो 2017 में लिया गया था, जब सूरत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भाजपा कार्यकर्ताओ के बीच हाथापाई हुई थी।

3. हनुमान जैसी पोशाक में भाजपा उम्मीदवार

एक टीएमसी समर्थक ने टवीटर पर फोटो अपलोड किया जिसमे एक व्यक्ति हनुमान के जैसे कपडे पहने हुए है और साथ ही दावा किया की यह व्यक्ति ‘रानाघाट से भाजपा उम्मीदवार जगन्नाथ सरकार’ है। यह दावा फेसबुक और टवीटर दोनों पर व्यापक रूप से प्रचलित हुआ था।

 

 

hanuman

सोशल मीडिया में वायरल हुई तस्वीरों में पश्चिम बंगाल के रानाघाट निर्वाचन क्षेत्र में हुई भाजपा रैली को दिखाया गया है। भाजपा के पश्चिम बंगाल यूनिट के अध्यक्ष दिलीप घोष ने 22 अप्रैल को इस कैप्शन के साथ तस्वीरें साझा की – “রানাঘাট লোকসভা কেন্দ্রে প্রার্থী জগন্নাথ সরকারকে নিয়ে রোড শো जिसका अनुवाद है,- रानाघाट लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार जगन्नाथ सरकार के साथ रोड शो।” घोष ने कई अन्य तस्वीरें भी अपलोड की थीं, जिनमें हनुमान के जैसे कपड़े पहने हुए एक व्यक्ति को जीप के ऊपर बैठे देखा जा सकता है, जो कि भाजपा उम्मीदवार जगन्नाथ सरकार नहीं थे।

4. पश्चिम बंगाल में बूथ कैप्चरिंग को लेकर भाजपा/कॉंग्रेस पर निशाना

हाल ही में लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए बूथ कैप्चरिंग के वीडियो को “भाजपा संसद बृजेश सिंह” का बताकर साझा किया गया। इस वीडियो में दावा किया गया कि ,“बीजेपी सांसद बृजेश सिंह प्रत्येक मतदाता को बीजेपी को वोट देने को कह रहे है। मोदी के पास इसके लिए क्या जवाब है? इस वीडियो को इतना वायरल करो ताकि अधिकतम लोगों को पता चले कि क्या हो रहा है। ” -(अनुवाद)

 

BJP MP Brijesh Singh Going With Each Voter To _ensure_ Vote For bjp. What Reply Does modi Have For This?
This _Video_ Has To Go Viral So That Maximum People Know What Is _Happening_…..

Posted by Dheeman Das on Monday, 6 May 2019

इसी वीडियो को एक अलग कैप्शन के साथ भी सांझा किया गया,जिसमे ”भाजपा विधायक अनिल उपाध्याय की इस हरकत पर क्या कहेगे मोदी जी, इस वीडियो को इतना वायरल करो की ये पूरा हिन्दुस्तान देख सके।” इस वीडियो में तृणमूल कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया गया हैं।
ऑल्ट न्यूज़ ने पता लगाया की यह वीडियो जूठे दावों के साथ सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, हालांकि यह घटना पश्चिम बंगाल में हुई थी, लेकिन घटना के साथ जिन एमपी/एमलए बृजेश सिंह और अनिल उपाध्याय का नाम लिया गया, वो गलत था।

 

5. बिहार की घटना को “टीएमसी के गुंडों द्वारा बीजेपी कार्यकर्ता पर हमला” बताया

भाजपा के कृष्णानगर संसदीय सीट से उम्मीदवार कल्याण चौबे, जो फुटबॉल के खिलाडी भी रह चुके हैं, उन्होंने एक वीडियो टवीट किया जिसमें दो लोग एक महिला के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं और बाद में एक अन्य व्यक्ति पर दरांती से हमला करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अपराधी “टीएमसी के गुंडे” थे और जिस आदमी पर बेरहमी से हमला किया गया, वह पश्चिम बंगाल का “भाजपा कार्यकर्ता सागर रॉय” था। चौबे ने बाद में अपना टवीट डिलीट कर दिया था, लेकिन इससे पहले दो घंटे से कम समय में इसे लगभग 30,000 बार देखा गया था।

कुछ यूज़र्स ने वीडियो के कमेंट बॉक्स में कमेंट करके कहा कि यह वीडियो बंगाल का नहीं बल्कि भागलपुर, बिहार का है। ऑल्ट न्यूज़ ने वहां के स्थानीय पत्रकारों के साथ इस ख़बर की पुष्टि की। यह वीडियो 16 अप्रैल का है। प्रभात ख़बर के मुताबिक पिता और छोटे भाई ने मिलकर बड़े बेटे की दरांती से हत्या कर दी थी।

6. मुस्लिमों द्वारा एक ब्राह्मण को मारने का झूठा आरोप

सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल में सफ़ेद कपड़े पहने हुए एक व्यक्ति का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था की एक ब्राह्मण पर कुछ मुस्लिमों ने हमला किया।

इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि, “पश्चिम बंगाल में मुस्लिमो द्वारा एक ब्राह्मण को उसी की बेटी के सामने पीटा गया। उसके घर में पूजा के दौरान घंटी की आवाज़ किसी को भी सुनाई नहीं देनी चाहिए। मुस्लिम बहुल इलाको में यह आम बात है। कोई भी मीडिया हिंदुओ की समस्याओ को नहीं उठा रहा है। जहा भारत में रोहिंग्या मुसलमानों के आश्रय देने के लिए मानवाधिकारों की बात हो रही है।” ट्विटर पर, एक ही घटना के वीडियो को एक अलग दृष्टिकोण और अलग स्थान के साथ चलाया गया।

इस वीडियो में गलत आरोप लगाया गया कि एक हिन्दू पुजारी को पूजा करने से रोकने के लिए मुस्लिमो ने उसकी पिटाई की थी। यही वीडियो 2017 में भी वायरल हुआ था, जिसे बाद में पुलिस ने ट्विट्टर पर खारिज किया था। पुलिस के बयान के अनुसार, “यह व्यक्ति हिन्दू पुजारी था जिसने एक महिला के साथ छेड़छाड़ की थी, उसके बाद लड़की के परिवार ने उसकी हत्या कर दी थी।” -(अनुवाद)

 

7. पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा इस्कॉन भक्तों को परेशान करने का गलत दावा

मई 2019 में, सोशल मीडिया पर एक वीडियो इस दावे के साथ वायरल हुआ कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ने कृष्णा पंथ,इस्कॉन के भक्तों को भागवत गीता बांटने से रोक दिया। इस वीडियो में भगवा कपड़े पहने हुए लोगों को खाकी कपड़े वाले लोगों द्वारा रोकते हुए देखा जा सकता है।

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ऑल्ट न्यूज़ ने पता लगाया कि यह वीडियो 2008 से सोशल मीडिया पर वायरल है। उस लेख के मुताबिक यह घटना गोवा में हुई थी, जिसमें हरे राम हरे कृष्ण समूह के रूसी सदस्यों को रोकने की कोशिश करते हुए पुलिस दिखाई दे रही है, क्योंकि स्थानीय लोगों से उनके खिलाफ कई शिकायतें पुलिस को मिली थी।

8. ममता बनर्जी के झूठे बयान के साथ फॉटोशॉप समाचार पत्र की कॉपी

 

एक लोकप्रिय बंगाली दैनिक समाचार पत्र র্তমান (बर्तमान) का  क्लिप सोशल मीडिया पर को साझा किया गया जिसका शीर्षक था,”৪২টা আসন দিন হিন্দু কীভাবে কাঁদা তে হয় দেখিয়ে দেব: মমতা (मुझे 42 सीटें दीजिये और मैं आपको दिखायूंगी की हिन्दूओ को कैसे रुलाया जाता है )। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थी।

ऑल्ट न्यूज़ ने पता लगाया कि यह तस्वीर फोटोशॉप की हुई है। तस्वीर को ध्यान पर देखनेपर पता चलता है कि तस्वीर को फोटोशॉप किया गया है। शीर्षक में “হিন্দু” (हिन्दू) और কাঁদা তে (रोना)” शब्द के फॉन्ट का आकर और रंग बाकि शब्दों से अलग है। ये शब्द सही रेखा में भी नहीं है और अन्य शब्दों से ज़्यादा गहरे दिखाई देते है। इसके अलावा, कुछ शब्दों को मूल शीर्षक से बदल दिया गया था।

 

9. तृणमूल नेता के हाथ में माइक, लेकिन आरोप लगा बंदूक पकड़ने का

चौकीदार पियूष नाम के ट्विट्टर यूज़र ने एक वीडियो इस दावे के साथ पेश किया कि तृणमूल नेता ने लाइव शो के दौरान बंदूक निकाली। रैल मंत्री पियूष गोयल और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजेंदर पाल सिंह बग्गा पियूष को ट्विट्टर पर फॉलो करते हैं।

कुछ लोगो ने पियूष के इस ट्वीट पर कमेंट करके कहा कि तृणमूल नेता ने माइक निकाला था ना की बंदूक। इस वीडियो को ध्यान से देखने पर मालूम होता है कि यह बात सच है। ज़ी न्यूज़ ने पश्चिम बंगाल के कूच बेहर में इस लाइव बहस को आयोजित किया गया था। राज्य मंत्री रविंद्र नाथ घोष ने अपना आपा खो दिया और माइक उठाया, आरोप के मुताबिक उनकी बंदूक उठाने की बात गलत है।

अंतिम के दो चरणों, 12 और 19 मई को पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं। यह बात सच है कि मतदान के दिन तक झूठी खबरों में बढ़ावा देखने को मिलेगा, ताकि मतदाताओं को भ्रमित किया जा सके। ऐसी घटनाओ में और भी तेजी देखने को मिल सकती है क्योंकि चुनाव की तारीखें नज़दीक है।

अनुवाद: किंजल परमार

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