पश्चिम बंगाल के राजारहाट न्यू टाउन के बूथ नंबर 164 में आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने स्थानीय लोगों, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जब ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने इस निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया और मतदाताओं से बात की, तो कई लोगों ने नतीजों को अजीब और असंभव बताया.

16 जून को भाजपा से 316 वोटों से हारने वाले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार तपश चटर्जी ने नतीजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

CPI(M)-ISF गठबंधन के उम्मीदवार सप्तर्षि देब को बूथ 164 से सिर्फ़ एक वोट मिला. TMC उम्मीदवार तपश चटर्जी को पांच वोट मिले, जबकि BJP उम्मीदवार पीयूष कनोडिया को कुल 656 वोटों में से 637 वोट मिले, जिन्होंने इस सीट पर जीत हासिल की.

बूथ 164 और 165 ‘मुसलमान पाड़ा’ नामक इलाके में स्थित हैं, जो मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाला इलाका है. पास के बूथ 165 में, जहां इसी इलाके और कई मामलों में एक ही परिवार के लोग वोट डालते हैं, पीयूष कनोडिया को 32 वोट मिले, जबकि सप्तर्षि देब को 299 और चटर्जी को 290 वोट मिले. इसके ठीक उलट, बूथ 164 में, जहां 88% मतदाता मुस्लिम हैं, BJP को 97% वोट मिले.

स्थानीय लोगों ने ‘ऑल्ट न्यूज़’ को बताया कि बूथ 164 के नतीजों का उस इलाके की राजनीतिक और जनसांख्यिकीय स्थिति से कोई मेल नहीं बैठता.

गिनती के उस एक्स्ट्रा राउंड ने नतीजे बदल दिए

न्यू टाउन के नतीजे 5 मई को घोषित किए गए, जो पश्चिम बंगाल के बाकी चुनावी नतीजों के एक दिन बाद आए.

नतीजे शुरू से ही विवादों में रहे क्योंकि इस सीट पर पहले से तय 17 राउंड के बजाय गिनती के 18 राउंड हुए. इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 330 पोलिंग स्टेशन थे, जिनमें 10 अतिरिक्त बूथ भी शामिल थे. गिनती के हर राउंड में 20 EVM की गिनती होनी थी. इसलिए, उम्मीदवारों को 17 राउंड की गिनती की उम्मीद थी — 16 राउंड में हर बार 20 EVM और आखिरी राउंड में बाकी बचे 10 EVM की गिनती होनी थी.

गिनती के एक एक्स्ट्रा राउंड की ज़रूरत क्यों पड़ी?

18वें राउंड का संबंध पोलिंग के दिन बूथ नंबर 164 पर EVM में दर्ज़ हुए 52 अतिरिक्त वोटों से हो सकता है. वहां, पोलिंग एजेंटों ने देखा कि EVM में असल में डाले गए वोटों से 52 वोट ज़्यादा दिख रहे थे, जिसके बाद लगभग दो घंटे तक वोटिंग रोक दी गई थी.

एक पोलिंग एजेंट ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि मॉक पोल (जो वोटिंग शुरू होने से पहले हुआ था) के बाद EVM में ज़ीरो वोट दिख रहे थे, लेकिन ये साफ़ नहीं था कि मॉक वोट की VVPAT पर्चियां हटाई गई थीं या नहीं. कई राजनीतिक दलों के एजेंटों ने मिलकर बूथ 164 के लिए VVPAT गिनती की मांग करते हुए एक लिखित अनुरोध सौंपा. यही 18वां राउंड था.

गिनती के 17वें राउंड तक, BJP उम्मीदवार पीयूष कनोडिया, TMC के तपश चटर्जी से पीछे चल रहे थे. हालांकि, बिल्कुल आखिर में बूथ 164 की गिनती ने नतीजे को पूरी तरह बदल दिया.

18वें और आखिरी राउंड (बूथ 164 के लिए) में 656 वोट सामने आए. इनमें से कनोडिया को 637 वोट मिले, तपश चटर्जी को पांच वोट मिले और सप्तर्षि देब को सिर्फ़ एक वोट मिला. यही आंकड़े फ़ॉर्म 20 में भी दिखाए गए हैं.

दूसरे शब्दों में, बूथ नंबर 164 के परिणाम ने सीधे तौर पर इस निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा तय कर दिया. 4 मई की रात 11 बजे चटर्जी 316 वोटों से आगे चल रहे थे और केवल एक बूथ की गिनती बाकी थी. 18वें और अंतिम दौर (राउंड) के बाद, जिसमें केवल बूथ नंबर 164 शामिल था, बढ़त पूरी तरह से पलट गई और कनोडिया ने ठीक 316 वोटों से जीत दर्ज की.

‘हमारे वोट कहां गए?’

इस अजीब नतीजे के बारे में सबसे पहले ‘स्क्रॉल’ ने 21 मई को छपी एक रिपोर्ट में बताया था.

जब ‘ऑल्ट न्यूज़’ मुसलमान पाड़ा पहुंचा, तो स्थानीय लोगों ने नतीजे पर हैरानी जताई और खुलकर बताया कि उन्होंने किसे वोट दिया था. इनमें CPI(M) के पंचायत सदस्य और ISF के सक्रिय कार्यकर्ता भी शामिल थे. अगर बूथ 164 के आखिरी नतीजे पर यकीन करें, तो उन्होंने बड़ी संख्या में BJP को वोट दिया था.

कई निवासियों ने कहा, “ये बिल्कुल सच नहीं है. तो फिर हमारे वोट कहां गए?”

स्थानीय लोगों ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि वोटरों की संख्या बढ़ने के कारण, मूल पोलिंग स्टेशन को दो अतिरिक्त बूथों — बूथ 164 और 165 — में बांट दिया गया था. एक ही इलाके के वोटरों को बिना किसी साफ़ पैटर्न के इन दो बूथों में बांट दिया गया. कई मामलों में एक ही परिवार के सदस्यों को भी अलग-अलग बूथों में वोट डालने के लिए भेजा गया था.

एक निवासी, रुखसाना बेगम ने बताया कि उन्होंने बूथ नंबर 165 पर वोट डाला, जबकि उनके 25 साल के बेटे साहीनूर ने बूथ नंबर 164 पर वोट दिया. ऑल्ट न्यूज़ को ऐसे कई उदाहरण मिले.

एक निवासी ने कहा, “हम समझ नहीं पा रहे हैं कि बीजेपी को हमारे बूथ से इतने वोट कैसे मिले. निश्चित रूप से कुछ तो असामान्य लग रहा है.”

जगदीशपुर इलाके (जिसमें बूथ 164 और 165 आते हैं) से दो बार चुने गए CPI(M) पंचायत सदस्य अहमद अली मंडल ने बताया कि उन्होंने और उनके परिवार के आठ सदस्यों ने बूथ 164 पर CPI(M)-ISF गठबंधन के पक्ष में वोट डाला था.

अहमद अली मंडल ने कहा, “मैंने और मेरे परिवार के सभी सदस्यों ने गठबंधन के उम्मीदवार के लिए बूथ नंबर 164 से वोट किया था. लेकिन नतीजों में इस बूथ से केवल एक वोट ही दिख रहा है. हमारे वोट कहाँ चले गए?”

CPI(M) के एक और स्थानीय समर्थक, अशरफ़ अली ने कहा कि नतीजे तर्क से परे हैं, खासकर तब जब एक ही इलाके के लोगों वाले दो आस-पास के बूथों के नतीजों में इतना बड़ा अंतर हो.

सरकारी आंकड़ों का ज़िक्र करते हुए अली ने कहा, “बूथ 165 में CPI(M) नौ वोटों से आगे थी, जबकि बूथ 164 में पार्टी को सिर्फ़ एक वोट मिला. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इतना अंतर कैसे हो सकता है.”

अली ने बताया कि उन्होंने बूथ 165 पर वोट डाला था, जबकि उनकी पत्नी ने बूथ 164 पर वोट डाला था.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पक्का पता है कि उनकी पत्नी ने CPI(M) उम्मीदवार को ही वोट दिया था, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल. हम CPI(M) के समर्थक हैं.”

उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, “ये सारे वोट कहां गए?” अली ने आगे तर्क दिया कि अगर CPI(M)-ISF गठबंधन बूथ 165 में बढ़त बना सकता था, तो बूथ 164 में भी गठबंधन को अच्छा-खासा समर्थन मिलना चाहिए था.

उन्होंने दावा किया, “यहां BJP के जीतने का कोई चांस नहीं था. असली मुकाबला हमेशा CPI(M) और TMC के बीच ही रहा है.”

इसी तरह की चिंता जताते हुए, स्थानीय निवासी और ISF नेता अख्तर अली मुल्ला ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार के कम से कम आठ सदस्यों ने बूथ नंबर 164 पर CPI(M)-ISF गठबंधन के उम्मीदवार को वोट दिया था.

मुल्ला ने सवाल किया, “उम्मीदवार को इस बूथ से सिर्फ़ एक वोट कैसे मिल सकता है? सिर्फ़ मेरा आठ लोगों का परिवार और मैं ही नहीं, बल्कि इलाके में और हमारे बूथ पर भी पार्टी के कई कार्यकर्ता हैं. हमारे सारे वोट कहां गए?”

स्थानीय निवासी और बूथ नंबर 164 के पोलिंग एजेंट रमज़ान अली ने बताया कि उन्होंने, उनकी पत्नी और उनकी दो बेटियों ने इसी बूथ पर वोट डाला था.

अली ने कहा, “मैंने खुद बूथ नंबर 164 पर CPI(M) को वोट दिया और मेरे परिवार के सदस्यों ने भी ऐसा ही किया.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि BJP को उस बूथ से इतना भारी समर्थन मिल सकता था, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं. मुझे नहीं लगता कि BJP उस बूथ से इतने सारे वोट हासिल कर सकती थी.”

TMC के बूथ प्रेसिडेंट मोक्षेद मंडल ने कहा कि वे इस नतीजे को समझा नहीं सकते. उन्होंने इसे “चौंकाने वाला” और “अविश्वसनीय” बताया.

उन्होंने कहा, “मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि क्या हुआ. नतीजे निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं.”

मोक्षेद मंडल ने बताया कि उनके परिवार के सात सदस्य वोटर थे. उनमें से सिर्फ़ एक का नाम बूथ 164 की वोटर लिस्ट में था, जबकि बाकी लोगों ने बूथ 165 पर वोट डाला. उन्होंने कहा कि सातों ने TMC को ही वोट दिया था.

उनका मानना है कि किसी व्यक्ति के वोटिंग व्यवहार के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता.

उन्होंने कहा, “हम कभी भी असल में ये नहीं जान सकते कि लोग क्या सोच रहे हैं. हो सकता है कि उनमें से कुछ ने किसी एक पार्टी को वोट दिया हो और कहा कुछ और हो. फिर भी, बूथ 164 का नतीजा अजीब है.”

ऑल्ट न्यूज़ ने इलाके में BJP के पार्टी ऑफ़िस का दौरा किया और पूछा कि पार्टी को मुस्लिम-बहुल बूथ पर 98% वोट कैसे मिले.

बीजेपी का कहना है कि लोगों ने हमें वोट दिया और नतीजे खुद सब कुछ बता रहे हैं. 

बीजेपी ऑफ़िस में मौजूद कार्यकर्ताओं ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि इन सवालों का जवाब सिर्फ़ विधायक ही दे सकते हैं. उनमें से एक, शुभो नस्कर ने कहा, “आप ये क्यों नहीं देखते कि 2021 में TMC ने ये सीट कैसे जीती थी?”

हालांकि नस्कर ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन ऐसा लगा कि उनका इशारा इस बात की तरफ़ था कि TMC ने पिछले चुनाव में गड़बड़ी करके ये सीट जीती थी.

ऑल्ट न्यूज़ ने विधायक पीयूष कनोडिया से फ़ोन पर बात की. हमने उनसे पूछा कि मुस्लिम-बहुलता वाले बूथ पर बीजेपी को भारी संख्या में वोट मिलने के बारे में उनकी क्या राय है. उन्होंने कहा, “इस बारे में मेरी क्या राय हो सकती है? लोगों ने हमें वोट दिया. ये हम नहीं कह रहे हैं. नतीजे खुद सब कुछ बता रहे हैं.”

ऑल्ट न्यूज़ ने इलाके के लोगों से बीजेपी के चुनाव प्रचार के बारे में भी पूछा. लोगों ने कहा कि उन्होंने बीजेपी का कोई खास चुनाव प्रचार नहीं देखा. उनके मुताबिक, बीजेपी उम्मीदवार पीयूष कनोडिया न तो चुनाव से पहले और न ही जीतने के बाद इस इलाके में आए.

अख्तर अली मुल्ला, रमज़ान अली और मोक्षेद मंडल ने इस बात की पुष्टि की.

‘पूरी गिनती की प्रक्रिया संदिग्ध थी’ 

ऑल्ट न्यूज़ से बात करते हुए, CPI(M)-ISF के उम्मीदवार सप्तर्षि देब ने गिनती की प्रक्रिया से जुड़ी घटनाओं का ब्योरा दिया.

तीन निर्वाचन क्षेत्रों — बिधाननगर, न्यू टाउन-गोपालपुर और न्यू टाउन-राजारहाट — के वोटों की गिनती एक ही केंद्र पर की गई.

सप्तर्षि देब ने कहा, “शुरुआत में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था. मैंने देखा कि 17 राउंड के बाद तपश चटर्जी आगे चल रहे थे. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, उनके अलावा कोई और कभी आगे नहीं रहा. शुरुआत में बढ़त काफी बड़ी थी, फिर वो कम होती गई. लेकिन नतीजे कभी पूरी तरह से पलटे नहीं.”

उनके मुताबिक, एक समय गिनती केंद्र के अंदर ये ख़बर फैल गई कि TMC सरकार गिर सकती है, जिससे तृणमूल के गिनती एजेंट निराश हो गए. बताया जाता है कि उनमें से कई लोग केंद्र छोड़कर चले गए, और वहां केवल उम्मीदवार और कुछ वरिष्ठ नेता ही रिटर्निंग ऑफ़िसर की मेज पर बैठे रह गए.

सप्तर्षि देब ने बताया कि इसके बाद हंगामा हुआ और आखिर में BJP और TMC, दोनों ही उम्मीदवारों से काउंटिंग सेंटर से बाहर जाकर लॉबी में इंतज़ार करने के लिए कहा गया. बाद में उन्हें वापस अंदर आने दिया गया.

सप्तर्षि देब 4 मई की रात करीब 11 बजे काउंटिंग सेंटर से निकले. रात लगभग 12 बजकर 30 मिनट पर, चुनाव आयोग की वेबसाइट देखने पर उन्हें पता चला कि काउंटिंग राउंड की संख्या 17 से बढ़कर 18 हो गई थी. तब भी उनके मुताबिक, TMC उम्मीदवार ही आगे चल रहे थे.

“अगली सुबह, मुझे BDO ऑफ़िस से फ़ोन आया कि वोटों की दोबारा गिनती हो रही है. मैं वहां गया, लेकिन अंदर नहीं जा सका.” जब हमने वजह पूछी, तो उन्होंने कहा, “वे (अधिकारी) दूसरे दिन किसी को भी अंदर नहीं जाने दे रहे थे… मुझे यकीन है कि BJP उम्मीदवार अंदर थे… उनकी कार बाहर खड़ी थी, और बाद में हमने उन्हें जीत का सर्टिफ़िकेट लेकर काउंटिंग सेंटर से बाहर आते हुए वीडियो में देखा. तृणमूल उम्मीदवार वहां मौजूद नहीं थे.”

सप्तर्षि देब के साथ ऑल्ट न्यूज़ की बातचीत के कुछ अंश यहां देखे जा सकते हैं:

जब हमने उनसे दोबारा गिनती की प्रक्रिया के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता. एक उम्मीदवार या मेरे एजेंट के तौर पर मुझे कोई सूचना नहीं दी गई. हमें इसके बारे में सिर्फ़ एक फ़ोन कॉल से पता चला, और वो भी सुबह के समय. मैं पिछली रात 11 बजे वहां से निकला था. अगर दोबारा गिनती का फ़ैसला रात 2 बजे भी लिया गया होता, तो भी सभी उम्मीदवारों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी. उम्मीदवारों को अपने काउंटिंग एजेंट को बताना होता… मैं अपने सभी 50 काउंटिंग एजेंट को साथ ले जा सकता था… ये सब इतनी गुपचुप तरीके से क्यों हुआ?”

“दोबारा गिनती की मांग किसने की? बीजेपी कह रही है कि TMC ने मांग की थी, और TMC कह रही है कि बीजेपी ने मांग की थी.” जब उनसे पूछा गया कि कितने राउंड की दोबारा गिनती हुई, तो देब ने हमें बताया, “मुझे लगता है कि उन्होंने तय किया था कि वे आख़िरी 2-3 राउंड की गिनती करेंगे. मुझे पक्का नहीं पता. लेकिन मुझे अपने सूत्रों से जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक वे आख़िरी तीन राउंड (15वें, 16वें और 17वें) की दोबारा गिनती करने वाले थे.”

देब ने कहा, “एक बात जो मुझे परेशान करती है, वो ये है कि उम्मीदवारों को दो दिनों के भीतर अपना फ़ॉर्म 20 मिल जाना चाहिए, लेकिन हमें वो नहीं मिला.”

“जब मैंने दो दिन बाद फ़ोन किया, तो मुझे बताया गया, ‘हमें अभी इसे जारी करने के निर्देश नहीं मिले हैं.”

DYFI के ज़िला सचिव के तौर पर, देब ने कहा कि उन्हें पता था कि दूसरे चुनाव क्षेत्रों के उम्मीदवारों को उनके ‘फॉर्म 20’ डॉक्यूमेंट पहले ही मिल चुके थे.

ज़ोर देने पर, रिटर्निंग ऑफ़िसर ने उनसे दो-तीन दिन और इंतज़ार करने को कहा. देब के मुताबिक, नतीजे आने के लगभग दो हफ़्ते बाद ये डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराया गया.

खास तौर पर बूथ 164 के बारे में बात करते हुए देब ने कहा, “मैं आपको ये नहीं बता सकता कि यहां किस तरह की गड़बड़ी हुई. लेकिन ये एक ऐसा बूथ है जहां हमने पंचायत चुनावों में भी बढ़त बनाई थी. डेमोग्राफ़िक नज़रिए से भी, ऐसा नहीं लगता कि यहां बीजेपी को भारी समर्थन मिला होगा.”

बंगाल के पूर्व मंत्री और CPI(M) के दिग्गज नेता गौतम देब के बेटे सप्तर्षि देब ने कहा कि कुछ अहम सवाल अभी भी अनसुलझे हैं और वे इस चुनाव क्षेत्र के अजीब नतीजों को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

पहला, पुनर्मतगणना की मांग किसने की, कितने राउंड की दोबारा गिनती की गई और कोई ऑफ़िशियल डॉक्यूमेंट क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया?

दूसरा, मुख्य रूप से अल्पसंख्यक बूथ पर, भाजपा ने वोटों का इतना बड़ा हिस्सा कैसे हासिल कर लिया?

और तीसरा, निर्वाचन क्षेत्र के लिए फॉर्म 20 इतनी देर से क्यों उपलब्ध कराया गया?

जब हमने सप्तर्षि देब से पूछा कि क्या उनकी पार्टी परिणाम को चुनौती देगी, “मुझे नहीं पता कि करने के लिए कुछ है या नहीं. हम ये देखने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या TMC कुछ करती है… अगर ये पंचायत चुनाव होते, तो मैं इसे न्यायपालिका के उच्चतम स्तर पर ले जाता. लेकिन चूंकि ये एक विधानसभा चुनाव है जहां मेरा वोट शेयर इतना ज़्यादा नहीं है… मैं मीडियाकर्मियों से बात करने की कोशिश कर रहा हूं. मैं चाहता हूं कि ये मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उजागर हो…”

जब हमने BJP विधायक पीयूष कनोडिया से कहा कि उनके राजनीतिक विरोधी मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं, तो भाजपा विधायक ने कहा कि वे “मूर्खों के स्वर्ग में रह रहे हैं.” उन्होंने सप्तर्षि देब के इस आरोप को भी सिरे से खारिज कर दिया कि 5 मई को पुनर्मतगणना के दौरान केवल कनोडिया को मतगणना केंद्र के अंदर जाने की अनुमति दी गई थी.

ऑल्ट न्यूज़ ने भारत के चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर राजारहाट न्यू टाउन निर्वाचन क्षेत्र में वोटों की दोबारा गिनती के बारे में जानकारी मांगी है. साथ ही, स्थानीय लोगों और CPI(M) उम्मीदवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी जवाब मांगा है. अगर उनकी ओर से कोई जवाब मिलता है, तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

 

नोट:

यह ध्यान देने वाली बात है कि राजारहाट विधानसभा क्षेत्र का मुसलमान पाड़ा, ऐतिहासिक रूप से पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ मतदान करता रहा है. 2016 में, यह राजारहाट न्यू टाउन (115) विधानसभा क्षेत्र का बूथ नंबर 138 था. मतदान केंद्र वही रहा — जगदीशपुर एफ.पी. स्कूल.

2016 के विधानसभा चुनावों में इस बूथ पर माकपा-भाजपा-तृणमूल कांग्रेस का वोट विवरण इस प्रकार था:

  • माकपा के नरेंद्र नाथ चटर्जी: 499

  • भाजपा की नूपुर घोष: 35

  • तृणमूल कांग्रेस के सब्यसाची घोष: 507

2021 में, इस इलाके को फिर से दो बूथों — 148 और 148A में विभाजित किया गया था. दोनों बूथों के लिए मतदान केंद्र जगदीशपुर एफ.पी. स्कूल का कमरा नंबर 2 था.

बूथ नंबर 148 में तीनों दलों को इस प्रकार वोट मिले:

  • माकपा के सप्तर्षि देब: 373

  • तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी: 221

  • भाजपा के भास्कर रॉय: 15

बूथ नंबर 148A में:

  • माकपा के सप्तर्षि देब: 353

  • तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी: 264

  • भाजपा के भास्कर रॉय: 30

स्रोत: इंडियास्टैट पब्लिकेशंस (https://www.indiastatpublications.com/), Form 20 (2016, 2021)