“यूपी बदनाम हुआ था, हां टीपू तेरे मारे, टीपू के यार मवाली, करे दलाली, बड़े बवाली रे, वर्दी बेईमान हुई थी, हां टीपू तेरे मारे“

ये बॉलीवुड गाना ‘मुन्नी बदनाम हुई’ की धुन पर बनाए गए गाने के बोल हैं, जिसे ‘याद रखेगा यूपी’ नाम के फ़ेसबुक पेज ने 27 अगस्त को शेयर किया था. इसके जरिए अखिलेश यादव को टारगेट किया गया है. गाने में हूबहू उनके जैसा एक AI कैरेक्टर बनाया गया है. इसमें अखिलेश यादव का मज़ाक उड़ाते हुए उनके बचपन के नाम ‘टीपू’ का इस्तेमाल किया गया. मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कुशासन और अराजकता के आरोप लगाए गए.

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, राज्य की दो सबसे बड़ी पार्टियां, जिसमें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी समाजवादी पार्टी, रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक-दूसरे पर ज़ुबानी हमले करने के बाद, अब एक-दूसरे के खिलाफ़ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बने वीडियोज़ और गानों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसकी शुरुआत ‘याद रखेगा यूपी’ नाम के फ़ेसबुक पेज ने की. ये पेज लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से बने आलोचनात्मक वीडियोज़ पोस्ट कर रहा है और साथ में विज्ञापन भी चला रहा है. ऊपर दिखाए गए वीडियो को इस पेज ने कई बार शेयर किया और ये वायरल हो गया.

ध्यान देने वाली बात ये है कि पेज द्वारा शेयर किये गए वीडियोज़ में अखिलेश यादव को दर्शाने के लिए किसी सामान्य कार्टून या मीम का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि डीपफेक और एआई की मदद से हूबहू अखिलेश यादव के जैसे दिखने वाले AI कैरेक्टर का इस्तेमाल हुआ है.

फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर ‘याद रखेगा यूपी’ नाम का पेज एआई से बने इस गाने वाले वीडियो और इसके जैसे कई अन्य वीडियो के ज़रिए विज्ञापन चला रहा है, जिसके निशाने पर मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव हैं. (लिंक 1, लिंक 2, लिंक 3)

‘याद रखेगा यूपी’ पेज का BJP से डायरेक्ट कनेक्शन

2023 में ऑल्ट न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि किस तरह राजनीतिक दलों द्वारा गुमनाम पेजों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को अनुचित ढंग से निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था. उस समय की पड़ताल में ऐसे कई पेजों और भाजपा के बीच सीधा संबंध पाया गया था. ऑल्ट न्यूज़ द्वारा उजागर किए गए पेजों की उस लिस्ट में ‘बुआ बबुआ‘ नाम का एक पेज भी शामिल था, जिसके माध्यम से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के खिलाफ मोटी रकम खर्च करके दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक विज्ञापन चलाए गए थे. इन विज्ञापनों का मुख्य उद्देश्य बिना किसी आधिकारिक जवाबदेही के राजनीतिक विरोधियों पर तीखे हमले करना था.

फ़ेसबुक पर सक्रिय गुमनाम पेज ‘याद रखेगा यूपी’ के मामले में भी हमारी जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि इस पेज का सीधा संबंध भारतीय जनता पार्टी से है. हमारी ताज़ा पड़ताल में यह सामने आया है कि वर्तमान में सक्रिय गुमनाम पेज ‘याद रखेगा यूपी’ असल में उसी पुराने ‘बुआ बबुआ’ पेज का ही नया रूप है. कुछ महीने पहले इस पेज का नाम बदलकर ‘याद रखेगा यूपी’ कर दिया गया है.

पूर्व में अखिलेश यादव और मायावती को निशाना बनाने के लिए 50 लाख रुपये से अधिक के विज्ञापन चला चुके इस पेज ने अब महज़ अपना नाम बदला है. अपने इस नए अवतार में यह पेज एक बार फिर से भारी-भरकम खर्च के साथ अखिलेश यादव को टारगेट करते हुए विज्ञापन चला रहा है. इस पेज द्वारा पिछले तीन महीने से कम समय में अखिलेश यादव को टारगेट करते हुए करीब 20 लाख रुपये विज्ञापन पर खर्च किये गए हैं.

‘याद रखेगा यूपी’ पेज द्वारा पोस्ट किया गया और विज्ञापन चलाया गया एआई से बना वीडियो, जिसमें “यूपी बदनाम हुआ, टीपू तेरे मारे” गाना शामिल था, सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया. ‘याद रखेगा यूपी’ के वीडियो वायरल होने के बाद कई भाजपा समर्थक अकाउंट्स ने भी इन्हीं वीडियोज़ को आगे बढ़ाया और अन्य अपमानजनक वीडियोज़ बनाकर पोस्ट किए, जिसमें अखिलेश यादव को रात के अंधेरे में चुपके से दूसरों के घरों के बाहर से नल चुराते हुए दर्शाया गया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनकी और उनकी पत्नी डिंपल यादव की छवि ख़राब करने के लिए एआई वीडियो का इस्तेमाल हो रहा है.

SP का पलटवार

इसके बाद समाजवादी पार्टी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसका जवाब केवल किसी साधारण बयान से नहीं, बल्कि उन्होंने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों को पहले वायरल वीडियो दिखाया जिसमें उन्हें टारगेट किया गया था, इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक अन्य वीडियो चलवाकर पलटवार किया, पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो उन्हें किसी ने भेजा था.

अखिलेश यादव द्वारा चलाया गया वीडियो भी एक AI से बना गाना था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसा गया था. गाने के बोल कुछ इस प्रकार थे, “वनस्पति बदनाम हुई, बाबा तेरे मारे, महंगाई आम हुई, बाबा तेरे मारे”.

“बच्चों का खेल न खेले सरकार”- अखिलेश यादव

एआई से बने इस वीडियो के ज़रिए मुख्यमंत्री को चिलम से गाँजा पीते हुए दिखाया गया था, जबकि इसके गाने में राम मंदिर के दान में भ्रष्टाचार, महंगाई और राज्य की कानून-व्यवस्था का ज़िक्र था. 31 अगस्त को किये इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा, “सरकार से यही अपील है सरकार बच्चों का खेल ना खेले और इसमें अपना पैसा बर्बाद ना करे, क्योंकि बच्चों का खेल खेलोगे तो इसी तरह का खेल हम भी खेलेंगे आपके साथ.”

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टारगेट करते हुए एआई से बने कॉन्टेंट पोस्ट करना शुरू कर दिया, जिसमें उन्हें चिलम से गाँजा फूंकते हुए और दान पात्र से पैसे चुराते हुए दिखाया गया है.

 

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल के X अकाउंट से योगी आदित्य नाथ को निशाना बनाते हुए नियमित तौर पर कई वीडियोज़ पोस्ट किये जाने लगे. साथ ही बीजेपी आईटी सेल को चेतावनी दिया गया कि “उनके मुख्यमंत्री बिष्ट ठाकुर आदित्यनाथ के खिलाफ समाजवादी पार्टी के लोग AI तस्वीरें बनाने लगे तो तहमद उतर जाएगा”. (लिंक 1, लिंक 2, लिंक 3, लिंक 4, लिंक 5, लिंक6)

 

8 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने योगी आदित्यनाथ के 2 AI वीडियो पोस्ट किये. (लिंक1, लिंक2)

चेतावनी देने के बाद से अखिलेश यादव योगी आदित्यनाथ के ऐसे एआई से बने वीडियोज़ लगातार अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंसों में बार-बार चलवा रहे हैं. लखनऊ की जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह विवाद सुर्खियों में आया, उसके बाद भी कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सामने इसी तरह के वीडियो चलाए गए.

नीचे उन प्रेस कॉन्फ्रेंस की तारीख और लिंक दिए गए हैं जिनमें योगी आदित्यनाथ के AI से बने वीडियोज़ चलाए गए हैं.

31 अगस्त

8 सितंबर

10 सितंबर

17 सितंबर

19 सितंबर

21 सितंबर

इसके बाद एक अन्य कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने ऐसे वीडियोज़ बनाने वाले राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को खुली चेतावनी दी कि “अगर वे वीडियो बनाते हैं, तो हमारी तरफ से भी वीडियो बनाए जाएंगे. हम उनसे बेहतर गाने देंगे.” उनकी यह टिप्पणी एक ओर जहाँ उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा के लिए सख्त चेतावनी थी, वहीं दूसरी ओर यह इस बात की एक प्रकार की स्वीकारोक्ति भी थी कि समाजवादी पार्टी भी इस डिजिटल लड़ाई में उसी आक्रामकता के साथ जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी.

समाजवादी समर्थक पेज

भाजपा से जुड़ी कथित गुमनाम पेज और समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल के अलावा, इन पार्टियों के कई समर्थक अकाउंट्स ने लगातार ऐसे वीडियोज़ पोस्ट करने शुरू कर दिए. दूसरी तरफ़ सपा से जुड़े माने जाने वाले समर्थक अकाउंट्स ने भी “बाबा तेरे मारे” वाले वीडियो और उसी तर्ज़ के अन्य वीडियोज़ शेयर करने शुरू कर दिए, जिसमें एक एक्स हैंडल ‘क से कलम’ काफी चर्चा में रहा, जिसने लगातार योगी आदित्यनाथ के एआई से बने वीडियोज़ पोस्ट किये. (लिंक 1, लिंक 2, लिंक 3, लिंक 4)

‘समाजवाद एक सोच’ पेज से भी योगी आदित्यनाथ के AI वीडियो शेयर किये गए.

BJP समर्थक भी लड़ाई में शामिल हो गए

हमने अभी तक देखा था कि ‘याद करेगा यूपी’ पेज से ये AI वॉर शुरू हुआ था और इस पेज का बीजेपी से सीधा संबंध भी है. ये लड़ाई आगे बढ़ने पर बीजेपी समर्थक पेज भी इसमें शामिल हो गए और अखिलेश यादव पर निशाना साधने के लिए AI वीडियोज़ का इस्तेमाल करने लगे. (लिंक 1, लिंक 2), लिंक 3)

बीजेपी ने इसे साधु-संतों का अपमान बताया

एक तरफ भाजपा ने अखिलेश यादव को टारगेट करते हुए बनाए गए एआई वीडियो से पल्ला झाड़ते हुए इसमें उनकी संलिप्तता होने से इनकार किया. वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश भाजपा ने ट्वीट करते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साधु-संतों, सनातन परंपरा और करोड़ों सनातनियों की आस्था का जिस प्रकार अपमान किया गया, वह उनकी सनातन विरोधी सोच का सार्वजनिक प्रदर्शन है.

भाजपा के कई नेताओं ने इस पर खुलकर बयान दिए. भाजपा नेता विनीत शारदा ने इसे समाजवादी पार्टी की नीच हरकत बताया और कहा कि योगी आदित्यनाथ किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और सनातन धर्म के प्रतीक हैं, उनके लिए इस तरह का वीडियो बनाना आपत्तिजनक है. उन्होंने अखिलेश यादव से सार्वजनिक माफी मांगने को कहा.

कांग्रेस भी इस AI वॉर में शामिल हुई

इसके बाद कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई भी एआई से बने राजनीतिक पलटवार में कूद पड़ी. उसने एक वीडियो जारी किया जिसमें योगी आदित्यनाथ को सरकारी प्रोजेक्ट्स और कामों में भारी कमीशन की मांग पर चर्चा करते हुए दिखाया गया है. सीएम योगी आदित्यनाथ को यह सुझाव देते हुए दिखाया गया है कि केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी जाए जिनसे उन्हें फ़ायदा हो. ये वीडियो भी उसी तरह का हमला है जैसा बीजेपी और एसपी एक-दूसरे पर करते रहे हैं.

इसी बीच, अखिलेश यादव को निशाना बनाने वाले एआई वीडियो पोस्ट करने वाले भाजपा समर्थक अकाउंट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लेकर भी एआई से बना वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्हें लोगों के बीच बीयर के ग्लास लेकर नाचते हुए दिखाया गया है. ये सिर्फ़ यूपी के विपक्षी नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे दलों के शीर्ष नेताओं को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों अब एक ही तरह के औज़ार का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं, जिसमें असली दिखने वाले एआई वीडियो शामिल हैं. फ़र्क इतना है कि कहीं यह काम गुमनाम पेज के ज़रिए व्यवस्थित तरीके से पैसे ख़र्च करके हो रहा है, कहीं पार्टी के आधिकारिक हैंडल से, और कहीं समर्थक अकाउंट्स के ज़रिए.

सिलसिलेवार तरीके से ऐसे वीडियोज़ की शुरुआत एक पेज के द्वारा की गई, जो आरोप-प्रत्यारोप में बढ़ते हुए दोनों पार्टियों के आधिकारिक तंत्र तक पहुँच गई. व्यक्तिगत हमले के साथ-साथ इसमें सनातन परंपरा और धार्मिक भावनाओं का अपमान करने के आपसी आरोप भी लगने शुरू हो गए.

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए गुमनाम पेजों के ज़रिए पोस्ट किये जा रहे एआई का यह फॉर्मेट भले ही नया हो, लेकिन इसके पीछे की ये रणनीति बहुत पुरानी है. अक्सर राजनीतिक दल भारी-भरकम बजट के साथ गुमनाम या अज्ञात पेजों का सहारा लेते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे विज्ञापनों को प्रसारित करना होता है जो अनैतिक, अनुचित या व्यक्तिगत हमलों से भरे हों. यदि कोई राजनीतिक दल इन्हें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट करे, तो उसे तीखी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए, इन गुमनाम पेजों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. यह कोई पहला मौका नहीं है जब चुनाव से पहले इस तरह का पैटर्न देखने को मिला है, भारतीय जनता पार्टी द्वारा अक्सर ऐसे हथकंडे का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को टारगेट करने के लिए किया जाता रहा है, ऑल्ट न्यूज़ ने लगातार इस पर कवरेज भी किया है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी सोशल मीडिया पर ऐसे गुमनाम पेज ने मीम्स और तंज के ज़रिए अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती पर तीखे हमले किए थे.

हाल ही में भाजपा की पंजाब इकाई ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का भी एक ऐसा ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से बना डीपफेक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्हें एक छात्र के अभिभावक द्वारा थप्पड़ खाते हुए दिखाया गया था, काफी आलोचना के बाद भाजपा पंजाब ने वो वीडियो डिलीट कर दिया था.