पश्चिम बंगाल पुलिस ने 5 नवंबर को ‘X’ पर एक मैसेज पोस्ट किया, जिसमें नागरिकों से ज़िम्मेदारी के साथ दीवाली मनाने की अपील की गई. AI से बने इस पोस्टर में एक आवारा कुत्ता और दो बिल्लियां पटाखों से बचने के लिए कहीं छुपे लिए हुए दिखाई दे रहे थे. इसमें लिखा था, “कृपया ज़िम्मेदारी से दीवाली मनाएं. ये हमारी भी दीवाली है.”
हालांकि, सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर की गई इस पोस्ट को 3 घंटे के भीतर ही हटा दिया गया. (आर्काइव)

हाल के सालों में दीवाली के दौरान पटाखों के पर्यावरणीय प्रभाव को उजागर करने वाले और उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले अभियानों को राईटविंग विचारधारा के एक वर्ग द्वारा हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया गया है. नतीजतन, वायु प्रदूषण के मुद्दे को अक्सर एक सांप्रदायिक बहस का रूप दे दिया गया है, जिसमें पटाखों पर रोक लगाने की मांग को हिंदू त्योहारों को विशेष रूप से निशाना बनाने के तौर पर पेश किया जाता है.
इसी तरह, बंगाल पुलिस की एक जागरूकता पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने आपत्ति जताई और दावा किया कि ये हिंदुओं के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया है. यूज़र्स ने पोस्ट के नीचे कमेंट्स करना शुरू कर दिया; कुछ ने तो सुवेंदु अधिकारी को टैग करते हुए ये सवाल भी पूछा कि ईद और क्रिसमस के दौरान इस तरह के जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाए गए.
कुछ कमेंट्स नीचे गैलरी में दी गई हैं. (इनमें से कुछ में अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया है. पाठकों से सावधानी बरतने का अनुरोध है.)
विरोध के बाद, ईद पोस्ट को हटा दिया गया. पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस बात का कोई स्पष्टीकरण या सफाई नहीं दी कि पोस्ट क्यों हटाई गई. कई लोगों को पहले से ही अंदेशा था कि पश्चिम बंगाल पुलिस अपने जागरूकता अभियान से पीछे हट जाएगी, क्योंकि ये घटना उस पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें दीवाली से पहले पटाखों के बारे में जागरूकता फैलाने वाली पोस्ट को, विरोध के चलते सरकारी अधिकारियों द्वारा हटा दिया जाता है.
हटाने का पैटर्न
ऑल्ट न्यूज़ ने पहले रिपोर्ट दी थी कि 25 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें बिना पटाखों वाली दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया गया था. लेकिन पोस्ट करने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने इसे हटा दिया. उस वक्त भी सोशल मीडिया यूज़र्स ने पहले ही अंदाज़ा लगा लिया था कि इस पोस्ट को ज़ल्द ही हटा दिया जाएगा.
इसी तरह, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो हटा दिया, जिसमें अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाने की अपील कर रही थीं. ये दोनों फैसले तब लिए गए जब BJP-RSS समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध जताया और दावा किया कि इन पोस्ट से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी ने BMC को दीया मिर्ज़ा का वीडियो फिर से अपलोड करने का निर्देश दिया. उन्होंने कमेंट किया, “उन्होंने (दीया मिर्ज़ा ने) वायु प्रदूषण को लेकर बहुत ही अच्छा मैसेज दिया है… (दीया मिर्ज़ा का विरोध करने वाले) कुछ ही लोगों के अलग-थलग विचार हैं, और हमें इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए…”
इसी तरह, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने पर्यावरण के अनुकूल दीवाली मनाने की अपील करते हुए अपलोड किया. इस वीडियो की भी हिंदुत्व ब्रिगेड ने कड़ी आलोचना की थी.
4 नवंबर को अभिनेत्री सोनी राजदान ने सोशल मीडिया पर प्रदूषण मुक्त दीवाली मनाने की वकालत की, जिसका कई यूज़र्स ने मज़ाक उड़ाया. उन्हें निशाना बनाने वाले एक ‘X’ पोस्ट का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “लोग एक सीधा-सा मैसेज भी नहीं समझ पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि हर बात का संबंध धर्म से है.”
ऑल्ट न्यूज़ ने ये भी पाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस के ऑफ़िशियल X हैंडल ने 2024 और 2025, दोनों सालों में दीवाली के दौरान इसी तरह के जागरूकता अभियान चलाए थे. ये पोस्ट अभी भी मौजूद हैं.





