18 मार्च को कई X अकाउंट्स (जिनमें से कई अक्सर भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचनात्मक व्यंग्यात्मक या पैरोडी कंटेंट पोस्ट करते थे) भारत में बैन कर दिए गए. इस लिस्ट में @Nehr_who, @DrNimoYadav, @ Indian_armada और @DuckKiBaat जैसे लोकप्रिय पैरोडी हैंडल के साथ-साथ संदीप सिंह (@ActivistSanदीप), मनीष आरजे (@mrjethvani_) और डॉ. रंजन (@Doc_RGM) जैसे स्वतंत्र पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के अकाउंट्स भी शामिल हैं.
इन प्रोफ़ाइलों को एक्सेस करने की कोशिश करने पर अब एक मैसेज दिखाई पड़ता है जिसमें कहा गया है कि अकाउंट “कानूनी मांग के जवाब में भारत में सस्पेन्ड कर दिया गया है.” नीचे इन अकाउंट्स को ओपन करने पर दिखाई देने वाले मेसेज के उदाहरण हैं:
ये सस्पेंशन ऐसे वक्त में आया, जब अमेरिका-इज़रायल-ईरान के बीच चल रहा संघर्ष सार्वजनिक चर्चा पर हावी हो रहा है. साथ ही देश के कई हिस्सों से रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति सहित भारत पर संभावित प्रभावों की ख़बरें आ रही हैं. हालांकि, इन एकाउंट्स पर रोक लगाने के विशिष्ट आधारों का खुलासा नहीं किया गया है. लेकिन कई प्रभावित यूज़र्स वर्तमान संघर्ष, इज़राइल-हमास युद्ध और भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर केंद्र सरकार की स्थिति पर सक्रिय रूप से कमेंट कर रहे थे.
एक अन्य फ़ेमस पैरोडी अकाउंट ‘@RoflGandhi_’ ने कहा कि उसे X से एक नोटिस मिला है जिसमें कहा गया है कि राजस्थान पुलिस ने भारतीय कानून का उल्लंघन करने के लिए उसके एक पोस्ट को मार्क किया है. पोस्ट में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की सफेद दाढ़ी, कुर्ता और भगवा दुपट्टा पहने AI-जनरेटेड तस्वीर दिखाई गई.
I have been informed that @PoliceRajasthan thinks that I have violated the ‘Indian Law’ by posting an AI Generated pic of North Korean dictator Kim Jong Un. They seem to be concerned about a dictator’s image.
Putting it here, so that you all know why I disappeared suddenly. pic.twitter.com/CgolZFPxpT
— Rofl Gandhi 2.0 🏹 Commentary (@RoflGandhi_) March 20, 2026
19 मार्च को डिजिटल अधिकारों की वकालत करने वाली संस्था, इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन (IFF) ने एक बयान जारी कर कई X अकाउंट्स के सस्पेंशन पर चिंता व्यक्त की. इसमें कहा गया है, “इंटरनेट फ्रीडम फ़ाउंडेशन (IFF) भारत में फ़ेसबुक, X और इंस्टाग्राम पर पोस्ट और अकाउंट को रोके जाने की लगातार मामलों से चिंतित है जिसमें व्यंग्य और सरकार की आलोचना भी शामिल है. हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि यूज़र्स को सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से धारा 69 A के तहत सामान्य ‘भारत में रोके गए’ नोटिस या ईमेल प्राप्त हो रहे हैं जिनमें बहुत कम या कोई स्पष्टीकरण नहीं है. जबकि स्वतंत्र रिपोर्टिंग में साफ तौर पर गैरकानूनी के बजाय राजनीतिक, व्यंग्यपूर्ण या आलोचनात्मक भाषण को प्रभावित करने वाले निष्कासन का डॉक्यूमेंटेशन किया गया है.”
संगठन ने आगे केंद्र सरकार से आग्रह किया कि “धारा 69A को रोकने वाली शक्तियों को और ज़्यादा विकेंद्रीकृत करने के किसी भी कदम को रोकें, केवल श्रेया सिंघल फैसले और भावना के अनुसार रोकने का आदेश प्रकाशित करें, और प्रभावित यूज़र्स को उपचार के लिए स्पष्ट आधार और रास्ते के साथ समय पर नोटिस सुनिश्चित करें.”
IFF statement against the Alarming Escalation of Social Media Censorship and Proposed Expansion of Takedown Powers
New Delhi, March 19, 2026
The Internet Freedom Foundation (IFF) is concerned by continuing reports of posts and accounts being withheld in India on Facebook, X and…
— Internet Freedom Foundation (IFF) (@internetfreedom) March 19, 2026
कई विपक्षी नेताओं ने भाजपा सरकार की आलोचना करने वाले X एकाउंट्स के अचानक सस्पेंशन की आलोचना की है.
कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिज़िटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने 19 मार्च को इस मुद्दे को उठाने के लिए X पर कदम उठाया, जिसमें भारत में रोके गए कई एकाउंट्स को टैग किया गया.
From content being randomly blocked and deleted, now social media accounts are being withheld in India@Nher_who @DrNimoYadav @ActivistSandeep @mrjethwani_ @indian_armada @Doc_RGM@DuckKiBaat
are the latest among several others to be withheld
This is unacceptable
Coward PM
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) March 19, 2026
ऑल्ट न्यूज़ ने प्रसार भारती के रिटायर्ड CEO और पूर्व सांसद जवाहर सिरकर से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि आम तौर पर कोई सरकार तब इसी तरह काम करती है जब उसका पतन हो रहा हो और वो पतन की राह पर हो. जवाहर सरकार IT और दूरसंचार पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य भी थे.
जवाहर सिरकर ने कहा, “जुलाई और दिसंबर 2023 के बीच, उन्होंने संशोधनों की एक सीरिज पेश की. इसमें सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम, दूरसंचार अधिनियम, डेटा संरक्षण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में संशोधन शामिल हैं. सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम के मामले में, उन्होंने दावा किया कि चोरी से निपटने के लिए बदलाव लाए जा रहे थे, लेकिन असल में ये सेंसरशिप के लिए है. इसी तरह, डेटा संरक्षण अधिनियम जिसे असल में बड़ी तकनीक से उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए थी. अगर यूज़र्स की रक्षा करना मुश्किल हो गया है; इसके बजाय, सरकार एक धारा के माध्यम से RTI को नियंत्रित करके एक बड़ी लाठी पकड़ रही है.”
जवाहर सिरकर 2008 से 2012 तक केंद्रीय संस्कृति सचिव रहे, साथ ही उन्होंने दो बार I&B मंत्रालय का अंशकालिक प्रभार भी संभाला है. इन्होने आगे कहा, “दूरसंचार अधिनियम को मुश्किल से दो घंटे में संसद में पारित कर दिया गया. 146 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया था, और हम सभी विरोध में बाहर चले गए. तभी सरकार ने इस अधिनियम को बिना किसी बहस के पारित कर दिया. ये खतरनाक उपकरण हैं जिन्हें एक के बाद एक पेश किया गया है. पहले, सिर्फ IT अधिनियम का इस्तेमाल सरकार की आलोचना करने वाली कंटेंट को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर सभी पक्षों से शिकंजा कसने के लिए किया गया था और सरकार विशिष्ट असंतुष्टों के पीछे चली गई थी. अब, घबराहट की स्थिति में, सरकार ने इस हथियार को भी बढ़ा दिया है.”
जवाहर सिरकर ने आगे कहा, “असल में ये एक शुभ संकेत है क्योंकि इससे पता चलता है कि एक सरकार पूरी तरह से हताश है. एक गिरती हुई सरकार इसी तरह काम करती है.”
हमने उस व्यक्ति से भी बात की जो X हैंडल ‘@DrNimoYadav’ चलाता है. उन्होंने ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “मेरा अकाउंट लंबे समय से बीजेपी IT सेल के रडार पर था और इसीलिए इस बार उन्होंने ऐसा किया. मैं कानूनी कार्रवाई कर रहा हूं, मैं आज अदालत में एक रिट याचिका दायर कर रहा हूं.”
सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी के सह-संस्थापक और एक पॉलिसी रिसर्चर प्रणेश प्रकाश ने उन X एकाउंट्स की एक लिस्ट तैयार की जिन्हें भारत सरकार के अनुरोध पर रोक दिया गया था. सूची में वो एकाउंट्स शामिल हैं जो 5 मई, 2025 से भारतीय IP पते से पहुंच योग्य नहीं हैं और इसमें 316 यूज़र्स के नाम शामिल हैं. इसे यहां एक्सेस किया जा सकता है.
जब सत्ता, व्यंग्य से डरती है
व्यंग्य और हास्य लंबे समय से राजनीतिक प्रवचन का अभिन्न अंग रहे हैं जो सत्ता पर सवाल उठाने, सत्ता को भेदने और जटिल वास्तविकताओं को व्यापक जनता के लिए सुपाठ्य बनाने का एक तरीका प्रदान करते हैं. लिस्सिस्ट्रेटा से जहां अरस्तूफेन्स ने युद्ध और शासन कला की आलोचना करने के लिए कॉमेडी का इस्तेमाल किया, जोनाथन स्विफ्ट की गुलिवर्स ट्रेवल्स तक, व्यंग्य बुद्धि के रूप में प्रच्छन्न असहमति के एक उपकरण के रूप में पनपा है. 20वीं सदी में जॉर्ज ऑरवेल की एनिमल फ़ार्म जैसी कृतियों ने इस परंपरा को जारी रखा, प्रत्यक्ष विवाद के बजाय व्यंग्य के माध्यम से राजनीतिक पाखंड को उजागर किया.
व्यंग्य और हास्य नागरिकों को सत्ता की विषमताओं से जुड़ने की अनुमति देते हैं, अक्सर वो बातें कहते हैं जो साफ तौर पर नहीं कही जा सकतीं. इस क्षेत्र में राजनीतिक कार्टून, पैरोडी अकाउंट और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां संचालित होती हैं. और राजनीतिक व्यंग्य अक्सर अतिशयोक्ति, विडंबना और यहां तक कि उत्तेजना पर निर्भर करता है जिसे लोकतंत्रों ने ऐतिहासिक रूप से समायोजित किया है. क्योंकि मजाक उड़ाने की स्वतंत्रता असहमति की स्वतंत्रता के साथ जुड़ी हुई है.
ये एक प्रकार की विडंबना है कि जब कोई सरकार व्यंग्य पर अंकुश लगाना चाहती है, चाहे सेंसरशिप, कानूनी कार्रवाई या धमकी के माध्यम से ही, तो वो केवल सत्ता को चुनौती देने और जनमत को आकार देने की अपनी शक्ति को पहचानती है.





