एक वीडियो, जिसमें पुलिस स्टेशन के सामने एक ट्रक है, जो लोगों से भरी हुई है, सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो के बैकग्राउंड में एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ट्रक पर सवार 26 लोग दलित हैं, जिन्हें सिर्फ इसलिए पकड़ कर लाया गया है क्योंकि इन्होंने क्षत्रिय बिरादरी के लोगों के खिलाफ शिकायत की थी, जो गाँव की जमीन पर कब्ज़ा कर रहे थे। यह गांव उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में पड़ता है। व्यक्ति कहता है, “इनकी शिकायत पर पुलिस ने इनको थाने पर बुलाया और थाने पर बुलाकर के कब्जाधारित और पुलिस ने मिलकर के इनकी पिटाई की। पिटाई करने के बाद इनको गोली भी मारी गई, जिसमें से 3 लोग घायल हुए, जिसमें से एक 12 साल का बच्चा है, एक 15 साल का बच्चा है और एक 65 साल के बुज़ुर्ग हैं। इन तीनों लोगों के घायल होने के बाद ग्रामीणों ने जब विरोध किया तो पुरे गाँव में PAC लगाकर के पुरे गाँव की महिलाओं और बच्चों को बर्बरता से मारा गया और उनमें से इन 26-27 बुज़ुर्गों को गिरफ्तार करके पुलिस ले आयी है। आप देख सकते हैं कि किस तरह से भेड़-बकरी की तरह ले करके आयी है।”

इमरान बंकवी पेज से शेयर किये गए इस वीडियो को 11 लाख से भी ज़्यादा लोगों ने देखा है और 71 हजार से ज़्यादा बार शेयर किया जा चूका है। वीडियो के साथ किया गया दावा है, “देखिए भाजपा के उत्तर प्रदेश में कैसा रामराज है दलितों के साथ कैसा व्यहवार हो रहा है। “

उत्तर प्रदेश

देखिए भाजपा के उत्तर प्रदेश में कैसा रामराज है दलितों के साथ कैसा व्यहवार हो रहा है

Posted by Imran Bankwi on Monday, 27 January 2020

यह वीडियो ट्विटर पर इस संदेश के साथ शेयर किया जा रहा है, “#UP गोरखपुर में दलितों के जमीनों पर उंचे जाती के लोग कब्जा कर रहे थे , जब दलितों ने विरोध किया तो गोरखपुर कि पुलिस उन दलितो पर ही गोलियां चलाई, उन्हें बुरी तरह मारी , भेंड बकरियों कि तरह गाडी में भर कर थाना में लायी। UP में दलितों पर बढते अपराध का कारण मुख्यमंत्री योगी है।”

तथ्य-जाँच

इस वीडियो के एक की-फ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च करने से हमें ABP न्यूज़ के मई, 2018 का ट्वीट मिला, जिसमें लिखा था, “यूपी में दलितों से ठाकुरों और पुलिस के जानवरों जैसे व्यवहार का #वायरलसच रात 8 बजे”

एक की-वर्ड सर्च से हमें ABP न्यूज़ का यह फैक्ट-चेक रिपोर्ट मिला। इस रिपोर्ट के अनुसार, दलित के दो वर्गों ने इस सरकारी ज़मीन के लिए आपस में लड़ाई की, जहाँ एक ईमारत का निर्माण कार्य जारी था। एक वर्ग इस निर्माण कार्य का विरोध कर रहे थे, उनका कहना था कि इससे गाँव में शादी-विवाहों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली खाली ज़मीन बहुत कम रह जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, “लालचंद नाम के व्यक्ति ने आदमी ने सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की और गांव वालों ने विरोध कर सरकारी जमीन पर बनाए जा रहे दीवार को गिरा दिया।”

यह विवाद लालचंद के लोगों और एक अन्य वर्गों के बीच था, जो इस निर्माण कार्य का विरोध कर रहे थे। पुलिस ने ABP न्यूज़ को बताया कि लगभग 200 लोग थाने आए और हिंसक रूप से विरोध करने लगे। बासगांव, गोरखपुर के सीओ तारकेश्वर पांडेय ने बताया, “जो वर्ग माकन बना रहा था वो भी दलित है और जो वर्ग ने ढाया है वो भी दलित है।”

मीडिया संगठन UttarPradesh.org ने भी इस घटना पर खबर प्रकाशित की थी। “गोरखपुर- सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से आवास बनवाए जाने के विरोध में आक्रोशित भीड़ ने गगहा थाने पर किया पथराव, पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए चलाई रबर की गोलियां, तीन ग्रामीण सहित कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना।”

पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस मामले में 13 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है।

पत्रिका के अनुसार, “सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के विरोध में गुस्साई भीड़ ने गगहा थाने पर हमला बोल दिया। थाने पर पथराव किया। बेकाबू भीड़ पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने रबर बुलेट दागे। इसमें कई गांव वाले घायल हो गए। गांववालों के पथराव में कई पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की सूचना है।”

इस तरह सरकारी ज़मीन पर निर्माण कार्य को लेकर दो दलित वर्गों के बीच विवाद का पुराना वीडियो सांप्रदायिक संदेश के साथ सोशल मीडिया पर फिर से प्रसारित किया गया है। गोरखपुर के एक गाँव में दलितों के साथ ऊँचे वर्गों द्वारा अत्याचार किए जाने का दावा झूठा है। इसके अलावा, यह घटना लगभग दो साल पहले की है।

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