पुलिस द्वारा भीड़ पर गोलियां चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित है। इसके साथ साझा संदेश में बताया गया है कि पुलिस निजीकरण के विरोध में खड़े छात्रों पर गोलियां चला रही है। शमशाद खान नामक एक शख्स ने वीडियो को इस संदेश के साथ ट्वीट किया है, “निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सरकार ने गोलियां चलवाई।पूरा तानासाही आ गया है भारत मे।” यह वीडियो भारतीय रेलवे के निजीकरण को लेकर सरकार के खिलाफ बिहार में हाल ही में हुए छात्रों के विरोध के सन्दर्भ में साझा किया जा रहा है। हालांकि, पियूष गोयल ने निजीकरण से इनकार किया है। मीडिया को संबोधित करते हुए, रेल मंत्री ने कहा, “यह भारत सरकार की इकाई बनी रहेगी”

कुछ फेसबुक उपयोगकर्ता समान संदेश के साथ वीडियो को साझा कर रहे हैं।

यह वीडियो व्हाट्सअप पर भी समान दावे से साझा किया गया है।

2017 के झारखंड मॉक ड्रिल का वीडियो

यह वीडियो वास्तव में 2017 में झारखंड के खूंटी में हुए मॉक ड्रिल को दर्शाता है।

ऑल्ट न्यूज़ पहले भी तीन बार इस वीडियो की पड़ताल कर चूका है, जब इसे कश्मीर में पुलिस द्वारा गोलीबारी करने के रूप में और मंदसौर में पुलिस द्वारा किसानों पर गोलियां चलाने के दावे से साझा किया गया था। इस वीडियो को, सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को अप्रभावी करने के बाद भी प्रसारित किया गया था

वीडियो में दिख रही जगदम्बा स्टील नामक दुकान के मालिक ने ऑल्ट न्यूज़ से हुई बातचीत में हमें इस बात की पुष्टि कर बताया कि 31 अक्टूबर, 2017 को उनकी दुकान के बाहर पुलिस द्वारा मॉक ड्रिल आयोजित किया गया था। यह दोहराया जा सकता है कि वीडियो में पृष्भूमि में हो रही घोषणाओं के आधार पर सोशल मीडिया में प्रसारित हो रहे दावे पर संदेह होना निश्चित है। आप इसकी विस्तृत पड़ताल यहां पढ़ सकते हैं।

झारखंड पुलिस द्वारा किए गए मॉक ड्रिल का दो साल पुराना वीडियो, निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोलियां चलाने के गलत दावे से साझा किया जा रहा है।

ग़लत
दावा:
निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने चलाई गोलियां

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