प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में 15 अक्टूबर को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था. इसमें CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, दिल्ली यूनिवर्सिटी AISA की सचिव अंजली, अभिनेता प्रकाश राज, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आइशी घोष मौजूद थीं. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों को उठाया गया था. लेकिन चर्चा का केंद्र इन मुद्दों की जगह कुछ और बन गया.

इस दौरान रिपब्लिक चैनल के दो रिपोर्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर करने के बजाय शोर-शराबा और हंगामा करने में लग गए. प्रेस क्लब से आए वीडियोज़ में कुल तीन रिपोर्टर रिपब्लिक का माइक हाथ में लिए दिखाई दे रहे थे और साथ में उनके कैमरापर्सन भी थे.

नेशनल हेरल्ड द्वारा पोस्ट की गई वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने मीडिया को संबोधित करना शुरू किया, रिपब्लिक टीवी के दो रिपोर्टर, हर्ष त्रिवेदी और सौरभ गुप्ता, कुर्सी के ऊपर चढ़कर लगातार ऊंची आवाज़ में सवाल करने लगे, “नेहा, आप हिंदुस्तान को बांग्लादेश बनाना चाहते हो?” वे बार-बार बीच में टोक कर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाधा डाल रहे थे.

 

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क्या था संदर्भ?

बांग्लादेश वाले सवाल की जड़ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा बांग्लादेश के ‘सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट’ (SSF) के छठे केंद्रीय सम्मेलन को भेजे गए एक वीडियो मैसेज था. इस वीडियो को भारतीय जनता पार्टी और राइट-विंग यूज़र्स द्वारा संदर्भ से हटाकर भ्रामक रूप से शेयर किया गया, जिसमें यह दावा किया गया कि उन्होंने भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा या तख्तापलट का आह्वान किया है.

जबकि, असल में नेहा ने एसएसएफ के लोकतांत्रिक अधिकारों, धार्मिक कट्टरता के विरोध और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ़ किए जा रहे शांतिपूर्ण छात्र संघर्षों की सराहना की थी और भारत के छात्र आंदोलनों से इसकी समानता बताई थी. नेहा बोरा के वीडियो को संदर्भ से हटाकर शेयर किये जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए एसएसएफ नेतृत्व, माकपा (CPI-ML) की नेत्री सुचेता और खुद नेहा बोरा ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो पूरी तरह से एसएसएफ के सम्मेलन और प्रगतिशील छात्र एकजुटता के लिए था, जिसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. इसपर ऑल्ट न्यूज़ ने एक डिटेल्ड रिपोर्ट पब्लिश की है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाधा उत्पन्न होने की वजह से हॉल में मौजूद बाकी पत्रकार इससे नाराज़ हो गए. कई पत्रकारों ने एक साथ आवाज़ उठाई कि जो लोग हंगामा कर रहे हैं उन्हें परिसर से बाहर किया जाए ताकि प्रेस कॉन्फ्रेंस शांति से चल सके. नेहा बोरा ने भीड़ को शांत कराने की कोशिश की और शोर करने वालों से बैठ जाने को कहा. इसी बीच अभिजीत दीपके ने माइक संभाला और हंगामा खड़ा कर रहे रिपब्लिक के रिपोर्टर्स पर तंज़ करते हुए कहा, “इन्हें 50-100 रुपये दे दो और बाहर कर दो, ये यही काम 50-100 रुपये के लिए कर रहे हैं.” वहाँ मौजूद लोगों ने रिपब्लिक के रिपोर्टरों को नोट दिखाकर विरोध दर्ज भी किया.

 

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इसके बाद अन्य पत्रकारों और आयोजकों ने मिलकर रिपब्लिक के रिपोर्टरों को प्रेस क्लब परिसर से बाहर कर दिया.

इसके कई वीडियोज़ सामने आए, जिसमें वहां मौजूद अन्य पत्रकार नाराज़गी जता रहे थे. वहां मौजूद लोग और पत्रकार रिपब्लिक के रिपोर्टरों को कुर्सी के ऊपर से उतार रहे थे, इसी वक्त “गोदी मीडिया गो बैक” के नारे भी लग रहे थे.

 

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रेड माइक के सौरभ शुक्ला समेत कई पत्रकारों ने घटना की रिपोर्टिंग ठीक उसी जगह और उसी समय की, जब रिपब्लिक के रिपोर्टर हंगामा कर रहे थे. पत्रकार उनसे बाहर जाने को कह रहे थे ताकि वे बिना बाधा के प्रेस कॉन्फ्रेंस कवर कर सकें.

पीक टीवी के वेदान्त अग्रवाल ने मौके से रिपोर्ट किया जब रिपब्लिक के रिपोर्टर्स को प्रेस क्लब से बाहर किया जा रहा था. वीडियो रिपोर्ट में वेदान्त कहते हैं कि ये लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस होने नहीं दे रहे थे, जिसके बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

 

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दूसरी तरफ रिपब्लिक टीवी ने अपने चैनल पर अलग ही तस्वीर पेश की. चैनल ने खबर चलाई कि जब बांग्लादेश के अराजकता मॉडल को बढ़ावा देने के बारे में सवाल पूछा गया, तो नेहा बोरा और अभिजीत दीपके भाग खड़े हुए और रिपब्लिक के रिपोर्टरों को हेकल किया गया. जबकि, रिपब्लिक के अपने वीडियो में भी साफ़ दिखता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कवर करने आए दूसरे पत्रकार ही रिपब्लिक के रिपोर्टरों को बाहर धकेल रहे थे.

इस मामले में अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में खलल डालने की कोशिश करने वाले रिपब्लिक के रिपोर्टर ने उनकी एक महिला साथी को कोहनी भी मारी. उन्होंने लिखा कि यही रिपब्लिक की पत्रकारिता का “गोल्ड स्टैंडर्ड” है, जहां पत्रकार का मुखौटा पहनकर गुंडे घूमते हैं.