सुरक्षाकर्मियों को ले जा रहे वाहनों के काफ़िले का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया गया है कि ये दृश्य पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान के हैं. कई राईटविंग इंफ्लुएंसर ने इसे शेयर करते हुए कहा है कि ऐसी सेनाएं राज्य के हिंदुओं की रक्षा के लिए तैनात की गई हैं.

इस वीडियो को शेयर करते हुए बीजेपी समर्थक ओसियन जैन (@ocjain4) ने लिखा, “…अब बातचीत नहीं, सीधे-सीधे भारी कार्रवाई शुरू हो गई है. बंगाल में अब मुस्लिम शासन नहीं, केवल हिंदू शासन चलेगा.” पोस्ट को करीब 71 हज़ार बार देखा गया. (आर्काइव)

X हैंडल द जाट एसोसिएशन (@Jatassociation) ने भी क्लिप शेयर करते हुए दावा किया कि हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य में बड़ी संख्या में सशस्त्र बलों को तैनात किया जा रहा है. यूज़र ने अपने कैप्शन में लिखा, “मैसेज साफ है: अगर हिंदुओं को दबाने या उन्हें मारने के लिए दंगे भड़काने की कोशिश की गई तो कार्रवाई का एक नया अध्याय लिखा जाएगा.” (आर्काइव)

कई अन्य लोगों ने भी इसी दावे के साथ वायरल वीडियो को आगे बढाया.

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कई फ़ेसबुक यूज़र्स ने भी इस वीडियो को काफी शेयर किया. (लिंक-  12)

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फ़ैक्ट-चेक

रिवर्स इमेज सर्च करने पर, हमें X पर यूट्यूबर नेहा गुरुंग की फ़रवरी 2025 की एक पोस्ट मिली, जिसमें वही वीडियो था. उन्होंने लिखा कि वीडियो में भारतीय सेना के जवानों को इंफाल, मणिपुर में फ्लैग मार्च करते हुए दिखाया गया है.

वीडियो की क्वालिटी अच्छी होने के कारण, हम स्वतंत्र रूप से इसे इंफाल शहर में जियोलोकेट कर सकते हैं.

उपरोक्त तस्वीर में हाइलाइट किया गया हरा साइन बोर्ड इलाके का नाम दिखाता है: इंफाल में सौगैजम लीराक.

ये निर्णायक रूप से साबित करता है कि वायरल वीडियो बंगाल का नहीं है और विधानसभा चुनावों से संबंधित नहीं है. ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो में दिखाई गई जगह की जियो-लोकेशन की और पाया कि फ़ुटेज इंफाल का था.

लेकिन ये सच है कि चुनाव से पहले बंगाल में रिकॉर्ड संख्या में CAPF कर्मियों को तैनात किया गया था. बुलेटप्रूफ मल्टीपर्पस नाईट व्हीकल्स को पूरे कोलकाता में कई जगहों पर देखा गया.

ग़लत
दावा:
बंगाल के 'हिंदुओं की रक्षा' के लिए CRPF की तैनाती

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