9 अक्टूबर, 2026 को हॉटमेल के सह-संस्थापक सबीर भाटिया के यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड हुआ. ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया और इसे कई सोशल मीडिया यूज़र्स और विपक्षी नेताओं ने शेयर किया.

इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी समूह के बीच अनुचित सांठ-गांठ के आरोप लगाए गए थे. मोदी और अडानी के बीच के रिश्ते को दर्शाने के लिए पुराने फुटेज और खबरों का इस्तेमाल किया गया था. अडानी समूह ने इस पर मानहानि याचिका दायर की. 26 अक्टूबर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक अंतरिम आदेश देते हुए इस वीडियो का एक्सेस ब्लॉक करने का निर्देश दिया है.

आखिर ऐसा क्या है वीडियो में?

वीडियो में आरोप लगाया गया है कि कैसे पैसे से सत्ता, सत्ता से कानून और कानून से दोबारा पैसे का यह चक्र एक ऐसे ‘चक्रव्यूह’ में बदल गया है, जिसमें पूरा देश फंस गया है. 36 मिनट के इस वीडियो का टाइटल ‘हाउ मोदी एंड अडानी स्टोल इंडिया | द फ्रेंडशिप फाइल्स’ था. ये वीडियो अभी भारत में रीस्ट्रिक्टेड कर दिया गया है. बीक्यूब्ड (ब्रेकिंग बाउंड्रीज विद सबीर भाटिया) नाम के चैनल ने शैडो सिटिजन्स नाम के यूट्यूब चैनल के सहयोग से 9 अक्टूबर 2026 को इस वीडियो को अपलोड किया था.

वीडियो का शुरुआती हिस्सा 2002 में हुए गुजरात दंगों से शुरू होता है, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भारी आलोचना हुई थी. वीडियो में बताया गया है कि इस दंगे के बाद बड़े बिजनेस लॉबी, यहां तक कि उनकी पार्टी ने भी उनसे दूरी बना ली थी. उस वक्त गौतम अडानी ने नरेंद्र मोदी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. अडानी समेत कुछ अन्य बिजनेस ग्रुप ने उस वक्त ‘रिसर्जेंट ग्रुप ऑफ गुजरात’ नाम का एक अनौपचारिक समूह बनाया, जिसका मकसद था दंगों से हुई बदनामी का जवाब देना और जो भी उंगली उठाए, उसको सबक सिखाना. दंगों को लेकर हो रहे ग्लोबल क्रिटिसिज्म को गुजरात को बदनाम करने के लिए सुनियोजित कैपेंन बताया जाने लगा. उसी दौरान 2003 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात में एक बड़ी बिजनेस समिट ऑर्गेनाइज की, जिसमें कई निवेशकों को न्योता दिया गया, इसी समिट में गौतम अडानी ने समूचे बिजनेस समुदाय के सामने खड़े होकर 15,000 करोड़ गुजरात में इन्वेस्ट करने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद नरेंद्र मोदी की छवि एक विकास-केंद्रित नेता के रूप में दोबारा गढ़ी गई.

इसी प्रकार वीडियो के आगे के हिस्से में सरकार की नीतियों और भूमि आवंटन से जुड़ी है जिसमें नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी के बीच अनुचित सांठगांठ का आरोप लगाया गया है. वीडियो में आरोप है कि 2003 से 2011 के बीच अडानी समूह ने मुंद्रा में बेहद मामूली दरों पर लगभग 15,000 एकड़ ज़मीन हासिल की, जबकि अन्य कंपनियों से कहीं अधिक शुल्क लिया गया. 2014 में नरेंद्र मोदी सबसे बड़ी राजनीतिक जीत हासिल कर भारत के प्रधानमंत्री बने, पूरे देश की नज़र उनपर थी. जब वे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने गुजरात से दिल्ली के लिए रवाना हुए तो उनके प्लेन पर बड़े-बड़े अक्षरों में अडानी लिखा हुआ था, यह एक किस्म का संदेश था कि वे दोस्त हैं.

वीडियो में आरोप लगाया गया है कि सरकार द्वारा 2016 में कोयला नीलामी के नियमों में बदलाव से अडानी समूह को बड़ी संख्या में कोयला ब्लॉक हासिल करने में मदद मिली, इसके अलावा 2018 में छह हवाई अड्डों के निजीकरण से पहले पूर्व अनुभव की शर्त हटा दी गई और बोलियों की सीमा समाप्त कर दी गई, जिससे अडानी समूह ने सभी छह हवाई अड्डे जीत लिए.

इसके अलावा वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच अनुचित सांठगांठ के कई अन्य आरोप भी लगाये गए हैं कि कैसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर, एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाया.

दावों को साबित करने वाले ठोस प्रमाण नहीं: कोर्ट

कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस आर्यक दत्त ने 26 अक्टूबर को एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए माना कि यह मामला मुकदमे की सुनवाई से पहले इनजंक्शन के असाधारण दायरे में आता है, क्योंकि इसमें, बिना किसी आधिकारिक निष्कर्ष के गंभीर आरोपों को तथ्यों के रूप में प्रस्तुत किया गया था. यह इनजंक्शन उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष दायर याचिका के बाद आई. अदालत ने स्वीकार किया कि जनहित से जुड़े मानहानि के मामलों में सुनवाई से पहले निषेधाज्ञा बहुत सावधानी से दी जानी चाहिए, लेकिन उन्होंने इस मामले को एक अपवाद माना.

यह अंतरिम इनजंक्शन 31 जनवरी 2027 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी. यानी, जनवरी 2027 से पहले इस वीडियो को प्रसारित किये जाने पर रोक लगा दी गई है. रेसपोनडेंट्स को आदेश मिलने के 2 सप्ताह के भीतर ऐफिडेविट फ़ाइल करने का निर्देश दिया गया, और आवेदन को जनवरी 2027 की मासिक सूची में सुनवाई के लिए रखा गया है.

कोर्ट के अनुसार, यह वीडियो किसी आधिकारिक कार्यवाही या निष्पक्ष समाचार का हिस्सा न होकर एक नाटकीय प्रस्तुति थी. वीडियो के टाइटल और कॉन्टेन्ट में तथ्यों के रूप में यह दर्शाने की कोशिश की गई कि याचिकाकर्ता समूह ने एक संवैधानिक पदधारक की मिलीभगत से देश को लूटा है. साथ ही, अडानी ग्रुप पर ड्रग तस्करी, आतंकी फंडिंग, पुलिस हिंसा और फ़र्ज़ी मुकदमों जैसे गंभीर आरोप बिना किसी ठोस आधार के मढ़े गए. कोर्ट ने पाया कि पेश किए गए दस्तावेजों में इन दावों को साबित करने वाला किसी भी आधिकारिक संस्था का कोई प्रमाण मौजूद नहीं था.

अदालत ने कहा कि किसी भी अथॉरिटी का ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है कि अडानी समूह इन मामलों में संलिप्त था या उसने जवाबदेही से बचने की कोशिश की. अदालत ने यह भी पाया कि वीडियो सीधे तौर पर कंपनी को टारगेट करता है. वीडियो बार-बार अडानी और अडानी समूह का संदर्भ देता है और वादी द्वारा संचालित व्यवसायों का उल्लेख करता है, जिससे प्रथम दृष्टया निष्कर्ष निकलता है कि ये आरोप कंपनी से संबंधित हैं.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये आदेश विवादित वीडियो, उसके रीप्रोडक्शन या संदर्भित मानहानिकारक बयानों के अलावा, अडानी समूह या सरकार की किसी नीति पर रचनात्मक आलोचना या निष्पक्ष रिपोर्टिंग को नहीं रोकता है. साथ ही स्पष्ट रूप से कहा कि उसकी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया हैं और वे इस बात पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं कि कोई आरोप सच है या नहीं.

वीडियो ऑनलाइन शेयर करने वालों को नोटिस

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और मनसे नेता राज ठाकरे इसे शेयर करने वालों की लिस्ट में शामिल हैं. वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस के वेस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई हैंडल अडानी समूह को निशाना बनाकर अत्यधिक आपत्तिजनक कॉन्टेन्ट पब्लिश कर रहे हैं. नोटिस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 और 356 का हवाला दिया गया, जो जानबूझकर अपमान करने और मानहानि से संबंधित हैं. नोटिस के अनुसार, पोस्ट में कथित तौर पर भ्रामक, झूठे और अपमानजनक बयान थे जो कंपनी की छवि और साख को नुकसान पहुंचा सकते थे. 18 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने 24 यूज़र्स को इस वीडियो से संबंधित नोटिस भेजे.

कई यूज़र्स ने मुंबई पुलिस की नोटिस का पालन करते हुए क्लिप हटा दिया, जबकि कई यूज़र्स ने नोटिस के बारे में पोस्ट करते हुए इस कार्रवाई को अधिकारों का हनन बताया. 21 अक्टूबर को सबीर भाटिया ने लिखा, “मुंबई पुलिस ने मुझसे कुछ ‘बेहद आपत्तिजनक ट्वीट’ हटाने को कहा, मैंने चिन्हित पोस्ट हटाकर इसका पालन किया.”

एक अन्य पोस्ट में सबीर भाटिया ने कहा, “मैं बहुत निराश हूं, 1.45 अरब लोगों वाले देश में नागरिक अपना मुंह खोलने और जो वे देख रहे हैं, उसके बारे में बात करने से डरते हैं. जब डर ने लोगों को चुप करा दिया हो, तो कोई भारत को सुधारने की उम्मीद कैसे कर सकता है? कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता, जब सच बोलने के लिए हिम्मत की ज़रूरत पड़े.”

22 अक्टूबर को राज ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह डॉक्यूमेंट्री पोस्ट की और नागरिकों से इसे देखने का आग्रह किया, जिसमें सिर्फ X पर ही करीब 48 लाख व्यूज़ आ गए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 अक्टूबर को मनसे के एक पार्टी कार्यालय में भी यह वीडियो दिखाया गया था.

25 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने मुंबई पुलिस प्रमुख के अनुरोध का सम्मान करते हुए डाक्यूमेंट्री को हटा दिया है. उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री हटाने से एकाधिकारवादी प्रथाओं के खिलाफ़ उनके अभियान पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

ज्ञात हो कि 2026 के शुरुआत में 15 जनवरी को प्रस्तावित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले, उद्धाव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक साथ प्रचार किया था. इस दौरान उन्होंने भाजपा पर बांटने की राजनीति और मराठियों को सुनियोजित तरीके से ‘अलग-थलग’ करने का आरोप लगाया था और कहा था कि भाजपा अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए ज़मीन हड़पने में मदद कर रही है. 13 जनवरी 2026 को राज ठाकरे ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था कि 2014 से 2025 के बीच, महज ग्यारह वर्षों में सरकार के आशीर्वाद से अडानी समूह ने पूरे देश में अभूतपूर्व गति से विस्तार किया है और कई क्षेत्रों में लगातार अपना दबदबा कायम किया है. राज ठाकरे ने उस वक्त इस मुद्दे को लगातार उठाया था.

अडानी एंटरप्राइजेज की दलीलें

अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसमें मानहानि के लिए हर्जाने और स्थायी तथा अनिवार्य इनजंक्शन की मांग की. इसमें सबीर भाटिया, यूट्यूब, एक्स और इंस्टाग्राम सहित दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों को प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया जो कथित तौर पर वीडियो को अपलोड करने और उसके प्रसार में शामिल थे. सबीर भाटिया ने एक्स पर लिखा कि अडानी ने उनपर 50 करोड़ रुपये का मुकदमा किया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का पक्ष कई बिंदुओं पर आधारित था जिसमें अडानी समूह पर झूठे तरीके से गंभीर गलत कार्यों का आरोप लगाया गया है, और प्रतिष्ठा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा है. कंपनी ने कहा कि वीडियो में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया. इसमें कई भूमि परियोजनाओं के लिए प्रीमियम का भुगतान शामिल है और प्रकाशन के बाद निवेशकों तथा अन्य लोगों से पूछताछ का सामना करना पड़ा. कंपनी ने कहा कि मूल वीडियो हटाए जाने के बावजूद, अन्य यूट्यूब चैनलों पर उसे वापस अपलोड किया जा रहा है और एक्स के अलावे इंस्टाग्राम रील्स पर रीपोस्ट किए जाने से वीडियो का फैलना जारी है.

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्योगपति गौतम अडानी को लाभ पहुंचाने के आरोप नए नहीं हैं. विपक्ष अक्सर उन पर अडानी से करीबी संबंध रखने और वर्षों से उन्हें अनुचित लाभ देने का आरोप लगाते रहा है, जबकि केंद्र सरकार और अडानी समूह ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है. सरकार का कहना है कि सभी नियमों का पालन किया गया और कोई पक्षपात नहीं हुआ.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2023 की शुरुआत से ही इस मुद्दे को अपनी आलोचना का मुख्य बिंदु बना लिया था. उन्होंने कहा था कि अडानी समूह के खिलाफ जांच करने की अनिच्छा यह दर्शाती है कि नरेंद्र मोदी अपने मित्र उद्योगपति को बचा रहे हैं. सरकार और भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया था. राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री अडानी पर चर्चा से बचने की पूरी कोशिश करेंगे. 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री ने यह आरोप वापस राहुल गांधी पर लगाते हुए पूछा था कि अडानी और अंबानी पर उनकी अचानक चुप्पी क्यों है, क्या उन्हें उद्योगपतियों से पैसा मिला है. हालांकि ये आरोप झूठा था, जिस पर राहुल गांधी ने उन्हें जांच एजेंसियां भेजने की चुनौती दी थी.