दिल्ली पुलिस ने 6 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. एडिशनल DCP मंजीत श्योराण ने बताया कि हरियाणा के रहने वाले 24 साल के नदीम अहमद को AI से बने एक वीडियो को फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया. इस वीडियो को असली CCTV फ़ुटेज की तरह दिखाया गया था, जिसमें पुलिस अफ़सर की वर्दी पहने एक व्यक्ति को एक महिला के साथ गलत व्यवहार करते हुए दिखाया गया था और साथ ही ACP विवेक भगत की फ़ोटो, नाम और पद भी दिखाया गया था.
पुलिस ने बताया कि उस इंस्टाग्राम अकाउंट के करीब 24,000 फ़ॉलोअर्स थे और 4 अक्टूबर को जालसाज़ी और मानहानि समेत BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. वे पुलिस फ़ोर्स की छवि खराब करने की किसी बड़ी साज़िश की भी जांच कर रहे हैं.
Team of Cyber Police station, @DCPNewDelhi arrested one self claimed independent journalist for circulating a fabricated video falsely portraying Sh. Vivek Bhagat, ACP, Delhi Police in bad light.
The accused person circulated the incriminating video reel through one Instagram account as authentic. The mobile phone used for its circulation was also recovered.
@LtGovDelhi
#DPUpdates
#HelloDelhiPolice— Delhi Police (@DelhiPolice) October 6, 2026
क्या है पूरा मामला?
3 अक्टूबर 2026 को छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अन्य प्रदर्शनकारी, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न में गड़बड़ियों के आरोप के आरोप पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफ़े की मांग को लेकर नई दिल्ली में जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन को कवर करने को कई पत्रकार भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे.
इस दौरान रोज़ी नाम की महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा जब प्रदर्शनस्थल से ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की छात्र नेता नेहा बोरा को डिटेन किया जा रहा था, तब रोज़ी उनका वीडियो बना रही थी. उसी वक्त दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत ने उनके ब्रेस्ट को स्क्वीज़ किया और उन्हें धक्का दिया और जब उन्होंने उस पुलिस अफसर से सवाल पूछा तो वह वहाँ से भाग गए.
पत्रकारों ने धरना दिया लेकिन पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने का आरोप
पत्रकार रोज़ी ने आरोप लगाया कि जब वह ACP विवेक भगत के खिलाफ FIR दर्ज करवाने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंची तो उनकी FIR नहीं लिखी जा रही थी. एक वीडियो में उन्होंने कहा, “मुझे सिर्फ टाइम दिया जा रहा है और कोई भी एक्शन नहीं लिया जा रहा है.”
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में किए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार रोज़ी ने कहा, “मैं क्राइम ब्रांच गई हूं, वहां भी मुझसे पूछा जा रहा है किस एंगल में पकड़ा था? कितने दबाव में पकड़ा था? आगे था या पीछे था? मुंह पे देख रहा था या यहां (स्तनों पर) देख रहा था? मतलब, पहले तो जो मुज़रिम है, जो गलत कर रहा है, मैं उसका गलत सहूं, फिर आपकी बातों से बलात्कार सहूं?”
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इस मुद्दे को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में पत्रकार जमा हो गए और FIR दर्ज करवाने के लिए धरना देने लगे.
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार के साथ पुलिस अधिकारी ने की बदसलूकी !
महिला का आरोप- सीने पर हाथ मारकर भागा
2 घंटे से सैकड़ों पत्रकार FIR दर्ज करवाने के लिए धरना दे रहे हैं, पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही है https://t.co/RBjVRjrf8h
— Bolta Hindustan (@BoltaHindustan) October 3, 2026
कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मामले पर ट्वीट करते हुए कहा कि एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर गलत व्यवहार का आरोप लगाया है और सैकड़ों पत्रकार FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में घंटों से बैठे हैं. उन्होंने केस दर्ज न करने के लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना की, राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग की.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के बर्ताव और कार्रवाई पर खेद व्यक्त करते हुए महिला पत्रकार की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की मांग की.
The Press Club of India’s statement on Delhi Police’s action against journalists and imposition of Internet ban in and around Jantar Mantar area:—
The Press Club of India is shocked and dismayed at the Delhi Police’s actions against and treatment of journalists during the protests at Jantar Mantar against the chief election commissioner on Friday and Saturday.
Behaviour of this kind cannot be normalised in a democracy.
Journalists must be allowed to work freely, without fear, and document those who gather to raise various issues. That this is not being allowed even at the heart of the national capital does not bode well for the trajectory of media freedom in India.
The Delhi Police (@DelhiPolice) must immediately act on the female journalist’s complaint and ensure that it gives mediapersons the space to do their jobs without having to face aggression and threats.
— Press Club of India (@PCITweets) October 4, 2026
इसी बीच, ACP विवेक भगत को एडिशनल DCP के पद पर प्रमोट करने की भी खबर आई, जिसकी लोगों ने जमकर आलोचना की. कई लोगों ने इसे सरकार के तरफ से पत्रकारों से बदसलूकी करने के रिवार्ड के रूप में भी बताना शुरू कर दिया. आरोपों के बाद विवेक भगत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर उनसे संबंधित आदेश को जांच पूरी होने तक उनके प्रमोशन को स्थगित रखने को कहा.
हालांकि, इस मामले पर सरकार ने स्पष्ट किया कि विवेक भगत सहित 12 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही शुरू किया गया था, जो हाल में हुई घटनाओं से पहले का है. 5 अक्टूबर को रिव्यू के बाद आदेश जारी किए गए थे.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 8 अक्टूबर को एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए बताया कि उन्होंने 3 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस कर्मियों द्वारा तीन पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न का स्वत: संज्ञान लिया. आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
NHRC, India takes suo motu cognizance of the reported sexual harassment of three journalists by Delhi Police personnel during a protest at Jantar Mantar, New Delhi on 3rd October 2026. May like to refer to the press release at: https://t.co/7wZt6vtTrS @PIB_India @ANI @PTIofficial https://t.co/ewbhatGCUo
— NHRC India (@India_NHRC) October 8, 2026
इसी बीच AI से बने एक वीडियो को फैलाने के आरोप में त्वरित गिरफ़्तारी की गई जबकि ACP विवेक भगत के ख़िलाफ़ महिला पत्रकार द्वारा की गई शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं किया गया था, जिससे आम लोगों में भारी गुस्सा भी था. पुलिस का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ नकली वीडियो पुलिस की छवि धूमिल करने, अराजकता फैलाने और अशांति का माहौल बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा था. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इन दोनों मुद्दों को मिला दिया और दावा किया कि कोई उत्पीड़न हुआ ही नहीं था और यह सब महज़ एक अफ़वाह थी जिसे पुलिस ने गलत साबित कर दिया.
जबकि, यह दावा सही नहीं था. पुलिस ने जिस चीज़ को गलत साबित किया, वह एक नकली वीडियो था. पत्रकारों की शिकायतें उस वीडियो के सामने आने से पहले और उनके अपने अनुभव पर आधारित था, न कि किसी क्लिप के आधार पर शिकायत की गई थी.
14 अक्टूबर को ACP विवेक भगत की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने पत्रकार रोजी, गजेन्द्र और एक अज्ञात के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 356(2) और 3(5) के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत मामला दर्ज किया है.
ये धाराएं सरकारी काम में बाधा डालने, मानहानि से जुड़े आरोपों और अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति के खिलाफ कथित अपमान तथा जातिसूचक व्यवहार जैसे मामलों से संबंधित हैं.





