भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पिछले कई हफ्तों से विवाद चल रहा है. विपक्ष और कई संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसी क्रम में कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन का आहवाहन किया था. यूट्यूबर ध्रुव राठी इससे पहले 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में CJP के एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे. 10 अक्टूबर को जंतर मंतर वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें गुरुग्राम में उनके घर से हिरासत में लिया और 11 अक्टूबर को उन्हें रिहा कर दिया गया.

इसके बाद 16 अक्टूबर को ध्रुव राठी ने एक्स पर लिखा कि वो लंदन पहुंच गए हैं और अगले दिन दोपहर 12 बजे पार्लियामेंट स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास प्रदर्शन होगा. ट्वीट में उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि दुनिया ‘वोट चोर’ और लोकतंत्र के हत्यारे की असलियत देखे.”

17 अक्टूबर को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में गांधी प्रतिमा के पास “स्टॉप वोट चोरी” नाम से प्रदर्शन हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए. प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हुई और “वोट चोर, गद्दी छोड़”, “भारत माता की जय” जैसे नारे लगे. यूट्यूबर ध्रुव राठी भी इस प्रदर्शन में आयोजक के रूप में शामिल हुए थे. इस प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई राइट-विंग इनफ़्लूएंसर्स ने इसको लेकर कई तरह के भ्रामक दावे करने शुरू कर दिए.

18 अक्टूबर को राइट-विंग हैंडल ‘@Bharatrastrsena’ ने एक कोलाज शेयर किया. इसमें प्रदर्शन के वीडियो का एक स्क्रीनशॉट था जिसमें एक शख्स के चेहरे पर गोल घेरा लगा था. साथ में एक तस्वीर थी जिसमें वही शख्स हाथ में पाकिस्तानी झंडा लिए दिख रहा था. कैप्शन में लिखा था कि “सद्दाम हुसैन पाकिस्तान से है और लंदन में ध्रुव राठी के साथ भारतीय लोकतंत्र के लिए लड़ रहा है.” यूट्यूबर जोड़ी ‘Abhi and Niyu’ ने इस पोस्ट को कोट करते हुए ध्रुव राठी पर तंज कसते हुए “What a patriotic Indian!” लिखकर आगे बढ़ाया, काफी आलोचना के बाद उन्होंने ये पोस्ट डिलीट कर दिया. दिल्ली भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल ने भी ये तस्वीर शेयर की.

इसी बीच एक दूसरा वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग गाना गाते दिख रहे हैं और कुछ के हाथों में भारत और पाकिस्तान, दोनों के झंडे हैं. राइट-विंग यूज़र्स ने दावा किया कि ध्रुव राठी ने ऐसा प्रदर्शन आयोजित किया जिसमें भारतीय झंडे वालों से ज्यादा पाकिस्तानी झंडे वाले लोग थे. राइट-विंग यूट्यूबर संभव शर्मा ने ये वीडियो इसी दावे के साथ पोस्ट किया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ये वीडियो इसी क्लैम के साथ शेयर किया.

फैक्ट चेक 1: पाकिस्तानी झंडे वाली तस्वीर

वायरल तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ कथित शख्स तक पहुंच पाया. इस व्यक्ति का नाम सद्दाम हुसैन मकरानी है. उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 17 अक्टूबर 2026 की वह पोस्ट मिली, जिसके वीडियो का स्क्रीनशॉट, वायरल कोलाज में इस्तेमाल हुआ था. अकाउंट खंगालने पर हमें ऑरिजनल तस्वीर भी मिली जो 17 अगस्त 2021 को अपलोड की गई थी. उसमें वो हाथ में आईफोन पकड़े हैं, पाकिस्तानी झंडा नहीं. यानी वायरल तस्वीर में फोन की जगह पाकिस्तान का झंडा एड किया गया.

हमने वायरल तस्वीर को AI डिटेक्शन टूल SynthID से भी जांचा और हमें मालूम हुआ कि ये तस्वीर OpenAI की तकनीक का उपयोग करके बनाई या एडिट की गई है.

सद्दाम हुसैन मकरानी ने इस मामले पर खुद एक वीडियो जारी किया है. उन्होंने कहा कि उनकी तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है और वो गुजरात के रहने वाले भारतीय हैं. वीडियो में उन्होंने अपना पासपोर्ट भी दिखाया.

कुल मिलाकर, कई राइट-विंग यूज़र्स ने लंदन के एक प्रदर्शन में शामिल हुए भारतीय नागरिक की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर उसके हाथ में पाकिस्तानी झंडा थमा दिया. साथ ही ये झूठा दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन में शामिल शख्स पाकिस्तान का रहने वाला है.

फैक्ट चेक 2: पाक्सितानी झंडों वाला वीडियो

वहीं हमने दूसरे वायरल वीडियो के अलग-अलग फ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें इसी जगह का वीडियो दूसरे एंगल से रिकॉर्ड किया हुआ मिला जिसे आमिर हाशमी नाम के आर्टिस्ट ने 24 अगस्त को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था. दोनों वीडियो में नजर आ रहे लोग एक ही हैं. यानी, दोनों क्लिप्स एक ही मौके पर रिकॉर्ड किये गए हैं.

हमें आर्टिस्ट आमिर हाशमी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 13 अगस्त को पोस्ट किया हुआ एक ग्राफिक भी मिला जिसमें 15 अगस्त को पाकिस्तान-इंडिया शो का आयोजन पिकाडिली सर्कस पर किये जाने का कॉल था. इस पोस्ट में दोनों देशों के लोगों को अपने देश का झंडा लाने को कहा गया था. वायरल वीडियो इसी जगह पर शूट किया गया है जो लंदन के वेस्ट एंड का एक सार्वजनिक स्थान है जहां अक्सर ऐसे इवेंट्स होते हैं.

कुल मिलाकर, ये वीडियो अगस्त में लंदन में रहने वाले भारतीयों और पाकिस्तानियों के स्वतंत्रता दिवस समारोह का है. इसका 17 अक्टूबर के प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.

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