दिल्ली में विशेष गहन संशोधन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान ऑल्ट न्यूज़ की ग्राउन्ड रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ ऐसे घटनाओं के दृश्य हैं, जिससे दिल्ली पुलिस व सुरक्षाकर्मियों पर दोहरा बर्ताव करने का आरोप लग रहा है.
- हिन्दुत्ववादी भीड़ द्वारा पकड़कर लाए गए प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस क्यूं हिरासत में ले रही थी?
- हिन्दुत्ववादी इंफ्लुएंसर गौरभ, दिल्ली ACP अर्शदीप सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है फिर प्रदर्शनकारी महिलाओं और पत्रकारों को परेशान करता है.
- धारा 163 लागू होने के बाद भी 100 से अधिक की संख्या में हिंदूवादी और भाजपा समर्थक समूह एकत्रित होकर प्रदर्शनकारियों को गोली मारने की धमकी देते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे.
- दिल्ली पुलिस ने हिंदुत्ववादी समूह के एक व्यक्ति को पकड़ा, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसे छोड़ दिया.
इन सभी बातों से एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली पुलिस ने उग्र हिंदू समूहों को खुले छूट दे रखी थी कि वो प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और महिलाओं को धमकाना और उनपर खुलेआम हमला कर सकें? आख़िर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होते हुए भी इतनी बड़ी संख्या में हिंदूवादी समूह दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में कैसे मौजूद थे?

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर के कनॉट प्लेस में BNSS 163 की वजह से प्रदर्शनकारियों को खड़े होने या मीडिया से बात करने नहीं दिया जा रहा था. जब भी प्रदर्शनकारी बात करने आगे आते उन्हें पुलिसकर्मी जबरदस्ती हिरासत में ले लेते थे. और तो और कई पत्रकारों को भी रिपोर्टिंग करने से रोककर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा था.
‘दिल्ली पुलिस तुम लट्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं’
हिन्दुत्ववादी समूह और भाजपा समर्थकों की भीड़, प्रदर्शनकारियों के साथ पहले मारपीट करते हैं. फिर उन्हें पकड़कर सुरक्षाकर्मी के पास हिरासत के लिए लेकर जाते हैं. सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेकर जैसे ही आगे बढ़ते हैं, इनके पीछे इन हिन्दुत्ववादी समूहों के लोगों द्वारा ‘जय श्री राम’, ‘जय भवानी’ और ‘दिल्ली पुलिस तुम लट्ठ बजाओ हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे नारे लगाए जा रहे थे. सुरक्षाकर्मी इन लोगों को हिरासत में लेने के बजाय केवल समझा कर उन्हें पीछे रहने को कहते हैं.
दिल्ली पुलिस का दोहरा बर्ताव
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमने देखा कि दिल्ली पुलिस ने हिन्दुत्ववादी समूह के एक व्यक्ति को पकड़ा लेकिन उसकी खातिरदारी कैमरे में कैद हो गई. कनॉट प्लेस के इंदिरा चौक पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) अचानक प्रदर्शनकारियों को पकड़ने आती है. सभी लोग यहां-वहां भागने लगते हैं, लेकिन हिंदू जन जागृति समूह के संस्थापक व अध्यक्ष मनजीत यादव उर्फ मनु वहीं खड़ा रहता है. पहले तो पुलिसकर्मी उसे बाकी प्रदर्शनकारी की तरह दोनों हाथों से कसकर पकड़ा होता है, लेकिन जैसे ही कुछ कदम चलने पर मनजीत पुलिसकर्मी से बोलता है कि वो उनके समर्थन में है तो वो पुलिस अपने हाथ ढीले कर एक हाथ कंधे में रखकर शांति से साथ चलने को बोलता है.
आगे कुछ कदम पर एक और पुलिसकर्मी आता है. रोककर “कौन सा स्टाफ” पूछता है. जवाब में दूसरा पुलिसकर्मी “7 नंबर” बताता है और आगे चलता चला जाता है. धीरे-धीरे पुलिस और मनजीत आपस में बात करते जाते हैं लेकिन उनके बग़ल से ही दो RAF जवान एक प्रदर्शनकारी को जोर-जबरदस्ती से पकड़कर खींचते हुए ले जाते नज़र आते हैं. इसके बाद एक समय पर पुलिस वाला मनजीत के कंधे से भी हाथ हटा देता है और दोनों रोड के एक किनारे होकर किसी पुराने यार दोस्त की तरह उस प्रतिबंधित क्षेत्र में चले जाते है जहां मीडिया और किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी. वहां केवल पुलिस वाले प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते और बसों में भर देते थे. हमने आगे जाने का प्रयास किया पर हमें रोककर वीडियो रिकॉर्ड करने से भी मना कर दिया गया.
हमने वहीं थोड़ी देर रुककर ये देखने की कोशिश की कि मनजीत को पुलिस हिरासत में लेती है या नहीं. बार-बार हमें पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा सड़क के दूसरी तरफ जाने को कहा गया. लेकिन हमने भी हार नहीं मानी और वही इंतज़ार किया. 9 मिनट से भी कम समय के अंतराल में मनजीत को पुलिस ने छोड़ दिया और वापस मनजीत अपने हिन्दुत्ववादी समूह के बीच चला गया.
कनॉट प्लेस के सभी क्षेत्र में सुरक्षाकर्मी पूरी ताक़त के साथ प्रदर्शनकारियों को पकड़कर-पकड़कर हिरासत में ले रहे थे.
कनॉट प्लेस में बड़ी संख्या में हिन्दुत्ववादी समूहों की मौजूदगी
कनॉट प्लेस के इंदिरा चौक के बंगला साहिब जाने वाले रोड पर बेरीकेटिंग के साथ दिल्ली पुलिस व सुरक्षाकर्मी तैनात थे. तैनात सुरक्षाकर्मियों से महज़ 50-100 मीटर दूर सामने इंदिरा चौक के रेडियल रोड नंबर 2 में BNSS की धारा 163 लागू होने के बाद भी 100 से अधिक की संख्या में हिन्दुत्ववादी और भाजपा समर्थक समूह एकत्रित होकर प्रदर्शनकारियों को गोली मारने और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे.
सुरक्षाकर्मियों के सामने ही लोगों को मारा-पीटा जा रहा था. लेकिन एक भी सुरक्षाकर्मी बचाव करते नहीं दिखे. बल्कि हिन्दुत्ववादी समूह की एक भीड़ पहले प्रदर्शनकारी पर हमला करती फिर उसे पकड़कर सुरक्षाकर्मी को देने जाती थी. सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेकर उन्हें वापस सड़क के दूसरी ओर भेज देते थे.
ACP अर्शदीप सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया फिर प्रदर्शनकारियों को परेशान किया
10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के इंदिरा चौक पर सुरक्षाकर्मियों के मार्च के बीच सफेद शर्ट पहने गौरभ दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है और उन्हीं के साथ बात करते हुए साथ-साथ चलता है.
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11 अक्टूबर को भी ऐसा ही एक और वीडियो समाने आया जिसमें फिर एक बार फिर गौरभ उसी पुलिस अधिकारी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है. वो अधिकारी उसके पीठ पर हाथ थपथपा कर साथ-साथ आगे चलते हुए नज़र आते हैं.
Jab sar par Daroga ji ka saaya ho, toh koi kya hi ukhaad lega! – Every Right Wing content creator and goon. https://t.co/kILaNuo9dO
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) October 12, 2026
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि गौरभ जिस पुलिस अधिकारी का पैर छूकर आशीर्वाद ले रहा है वो दरअसल में दिल्ली ACP अर्शदीप सिंह हैं.

हालिया दिल्ली विरोध प्रदर्शन में भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था संभालने का जिम्मा इन्हीं के हाथ है. लेकिन गौरभ इनके पैर छूकर कनॉट प्लेस में लगातार प्रदर्शनकारियों को मारता है, उन्हें परेशान करता है, प्रदर्शनकारियों को पकड़कर पुलिस को सौंपते हुए भी नज़र आता है.
इस गौरभ को पूरे प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों व महिलाओं समेत पत्रकारों को भी परेशान करते हुए देखा गया. और ये सब कनॉट प्लेस में तैनात सुरक्षाकर्मियों के सामने होता है लेकिन मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारी इस पर कोई प्रतिक्रिया देते नहीं दिखते हैं.
इन सभी दृश्य का आख़िर क्या अर्थ निकाला जाए कि दिल्ली पुलिस ने हिंदुत्व समूहों खुली छूट दे रखी है? या फिर उन्हें बिना वर्दी के पुलिस के कार्यों का निर्वाहन करने का निर्देश दिया गया है?
पुलिस ने एक कार को बिना जांचे जाने दिया जबकि कार में लाठियों के होने का दावा कर रहे थे पत्रकार
सोशल मीडिया पर 11 अक्टूबर के कुछ ऐसे भी वीडियो सामने आए, जहां दिल्ली के कनॉट प्लेस में हिंदू रक्षा दल के दीपक सिसोदिया व उसके समूह लाठी से प्रदर्शनकारियों और महिला पर हमला करने की कोशिश करते नज़र आ रहे थे.
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न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार अवधेश समेत अन्य पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में खड़ी एक सफ़ेद रंग Fronx कार की पहचान की, जिसका नंबर UP14HA4945 था. इसमें लाठी-डंडे होने का आरोप लगाते हुए वहां मौजूद दिल्ली पुलिस से उस कार की जांच करने की मांग करते रह गए. लेकिन दिल्ली पुलिस ने कार की जांच करने के बजाय पत्रकार अवधेश को डांटते हुए हटा दिया और कार को वहां से निकलने में मदद किया.
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कार को बिना जांच के जाते देखकर न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार अवधेश, बसंत और दैनिक भास्कर के पत्रकार उदय समेत मॉलिटिक्स न्यूज़ की पत्रकार गीतांजलि ने कार को आगे जाकर रोकने का प्रयास किया. लेकिन दिल्ली पुलिस ने धक्का-मुक्की कर उन्हें हटा दिया. उसी दौरान दिल्ली पुलिस के हैड कॉन्स्टेबल चन्द्रवीर अत्री पत्रकार ने गीतांजलि के वीडियो रिकॉर्ड किए जाने वाले मोबाइल को छीनकर नीचे ज़मीन पर फेंक दिया.
सोशल मीडिया पर जब दिल्ली पुलिस को टैग कर कार के विषय में सवाल पूछा जाने लगा, तो DCP NewDelhi ने आधिकारिक एक्स-अकाउंट जवाब देते हुए बताया कि वाहन को नियमित जांच के लिए पुलिस स्टेशन लाया गया था. जांच के दौरान वाहन में कोई अवैध या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. पुलिस ने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया. जांच पूरी होने के बाद उसे जाने की अनुमति दे दी गई.
The truth about the vehicle check
Vehicle was taken to the police station strictly for routine verification.
The individual’s profile was fully vetted, and they have zero criminal record.
Nothing found: A thorough inspection of the vehicle revealed absolutely nothing illegal or objectionable.
Following standard due verification, the individual was cleared and allowed to leave immediately.
— DCP New Delhi (@DCPNewDelhi) October 11, 2026
एक तरफ दिल्ली पुलिस कार में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलने का दावा करती है जबकि सोशल मीडिया में कई ऐसे वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं जिसमें साफ-तौर पर दिख रहा है कि उसी कार से हिंदू रक्षा दल के दीपक सिसोदिया व अन्य लाठी निकालकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करते हैं. भूरे रंग का कपड़ा पहने एक युवक उस कार से दो लाठी निकाल कर एक लाठी दीपक सिसोदिया को देता है और दोनों मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करने की कोशिश करते हैं.
इन वीडियोज़ के ज़रिए दैनिक भास्कर के पत्रकार उदय, boom live, quint सभी ने अपने अपने रिपोर्टिंग में दिल्ली पुलिस की जांच पर सवालिया निशान खड़े किये. आख़िर क्यों दिल्ली पुलिस ने पहले उस कार को बिना जांच के जाने देती है फिर बाद में जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलने का दावा कर देती है. जबकि वीडियो में साफ दिख रहा है कि जिस व्यक्ति द्वारा कार से लाठियां निकाल कर हमला किया जा रहा था वही व्यक्ति उस कार में मौजूद था जब पुलिस उन्हें भगा रही थी.
Proof- ये उसी गाड़ी से राइट विंग के गुंडे लाठी निकाल रहे हैं, जिस गाड़ी को कल अवधेश कुमार, मैंने, बसंत, गीतांजलि और बाकी साथियों ने रोका था। Delhi Police ने इस गाड़ी को भागने की जगह दी, बाद में ट्वीट कर दावा किया कि गाड़ी में कुछ नहीं मिला। इस वीडियो से सब सच बाहर आ रहा है।
@ImAvdheshkumar
@Basantrajsonu— Uday Bhatnagar (@udayfromearth) October 12, 2026
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ‘भारत एक नयी सोच‘ नामक यूट्यूब न्यूज़ चैनल के पत्रकारों के साथ उसी कार में मौजूद भूरे रंग के कपड़े में दिख रहे युवक और उसके अन्य साथियों ने गाली-गलौज कर कैमरे तोड़ने की भी कोशिश की. इतना ही नहीं पत्रकार द्वारा सवाल करने वह युवक खुद को डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस DCP का बेटा होने का दावा करता है.
दिल्ली पुलिस को ये जवाब देना चाहिए कि क्या वो लड़का दिल्ली DCP सचिन शर्मा का बेटा है?
दिल्ली पुलिस के इशारे पर हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता ने कैमरे पर मारा
10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दिन हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता रविंदर उर्फ गोविंदा, रमन सैनी, विवेकानंद और कपिल कुमार मिलकर कुछ प्रदर्शनकारियों को मार रहे थे जिसकी रिपोर्टिंग न्यूज़ कैप्सूल की महिला पत्रकार कर रही थी. वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि हिंदू रक्षा दल के सदस्य प्रदर्शनकारियों को ज़मीन पर गिराकर मार रहे होते हैं. कुछ पुलिसकर्मी वहां आते हैं और हमला करने वालों के बजाय प्रदर्शनकारियों को पकड़ लेते हैं. उस दौरान पुलिस के मौजूदगी में भी खुलेआम हिन्दूवादी सदस्य प्रदर्शनकारी को मारते-पीटते और धमकाते रहते हैं और यह सब घटना कैमरे में क़ैद होते देख एक पुलिसकर्मी रमन सैनी कान में कुछ कहकर इशारा करता है और वो कैमरा बंद कराने झपट कर आता है.
RSS के गुंडे कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट
पत्रकारों के साथ भी की हाथापाई, दिल्ली पुलिस बनी रही मूकदर्शक https://t.co/gcaoL61vLU
— News Capsule (@newscapsule_) October 10, 2026
यह उस दिन की केवल पहली घटना नहीं थी. पत्रकार प्रणव प्रधी ने अपने एक्स-अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता रविंदर उर्फ गोविंदा दिल्ली पुलिस के सामने उनके सुरक्षा बैरिकेट के पास खड़ा होकर प्रदर्शनकारियों को धमकाने और पुलिस की समर्थन में इकट्ठा होने की बात करता है. लेकिन उसे ना ही हिरासत में लिया जाता है और न ही किसी प्रकार से उसे भीड़ बढ़ाने से मना किया जाता है.
पत्रकार प्रणव प्रधी ने सीधे सरल शब्दों में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से सवाल किया कि अगर धारा 163 के तहत आम नागरिकों को इकट्ठा होने की इजाज़त नहीं है, तो इन समूहों को इकट्ठा होकर प्रदर्शनकारियों को खुलेआम धमकाने की इजाज़त कैसे मिल रही है? लेकिन दिल्ली पुलिस पत्रकार के इन सवालों का जवाब नहीं देती.
Delhi Police is stopping ordinary citizens from gathering or protesting, citing Section 163 of the BNSS. But Hindutva groups are gathering openly and threatening protesters.
They claim the protesters are raising anti-India slogans. I have covered these protests and haven’t witnessed this. And frankly, this is an old tactic. Nothing new here.
So I asked Delhi Police a simple question: if ordinary citizens aren’t allowed to gather, how are these groups allowed to assemble and openly threaten protesters?
They had no answer.
— pranav pradhi (@pranavpradhi1) October 10, 2026
पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर को घेरकर निशाना बनाया गया
कनॉट प्लेस के इनर सर्कल के पास @peeinghuman के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर रमित वर्मा को कुछ हिन्दुत्ववादी लोगों ने बहस करके रोके रखा और दूसरी ओर कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मी की एक टुकड़ी को बुलाया. हिंदुत्व समूह के लोग रमित की ओर इशारा करते हैं और सुरक्षाकर्मी रमित को जबरदस्ती उठाकर ले जाने लगते हैं, इतने में हिंदुत्व समूह में से के एक व्यक्ति रमित को पीछे से मारता रहता है.
Ramit Verma, founder and content creator behind @thepeeinghuman was picked up near Connaught Place’s Inner Circle following a prolonged scuffle with a group of right-wing men who falsely accused him of trying to set a shop on fire.
The affiliation of these men remains unclear. However, groups of men appear to be operating together across CP, confronting students and members of Left unions who have turned up to protest. Our reporters @Basantrajsonu and @ImAvdheshkumar were at the spot.
— newslaundry (@newslaundry) October 11, 2026
ठीक इसी तरह की एक घटना पत्रकार श्याम मीरा सिंह के साथ भी देखने को मिली. कथित मुस्लिम वेशभूषा में झूठी नफ़रत फैला रहे व्यक्ति के बारे में श्याम मीरा सिंह कथित तौर पर रिपोर्टिंग कर रहे थे. श्याम मीरा ने आरोप लगाया कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हिंदूवादी संगठन के लोगों ने उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोका और उनके खिलाफ नारे लगाने लगे. श्याम मीरा ने अपने वीडियो में बताया कि वह ख़ुद की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी के पास गए तभी हिन्दुत्व समूहों के कहने पर सुरक्षाकर्मी उन्हें जबरदस्ती पुलिस वाहन के अंदर धक्का देकर हिरासत में ले लेती है.
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ऐसा ही कुछ BBC के पत्रकार दिलनवाज पाशा के साथ भी हुआ. खबर इंडिया, हैडलाइन न्यूज़, ग्लोबल भारत जैसे सारे दक्षिणपंथी चैनल्स से जुड़े लोग पत्रकार को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे. वो बार-बार दिल्ली पुलिस से भिड़ने, बदतमीजी करने का आरोप लगाकर उन्हें घेरे खड़ी हुए थे. जब पत्रकार दिलनवाज पाशा के समर्थन में कुछ लोग खड़े होने की कोशिश किये तो उस भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया.
इस पूरे रिपोर्ट में देखा जा सकता है कि कैसे सुरक्षाकर्मी और दिल्ली पुलिस, आम लोगों व प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ अजीब बर्ताव करती दिख रही है. वहीं दूसरी तरफ़ हिंदूवादी संगठन के लोगों के साथ अलग व्यवहार कर रही थी और उनके कहने पर पुलिस किसी को भी हिरासत में ले रही थी.
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर हो रहे इस पूरे प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पत्रकारों के लिए जारी गाइडलाइन्स के खिलाफ जाकर पत्रकारों को पत्रकारिता करने से रोका गया और उन्हें जबरदस्ती हिरासत में लिया गया. साथ ही प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की एकतरफा सख्ती भी गंभीर सवाल खड़े करती है.





