15 अक्टूबर, 2026 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा चाहती है कि भारत में बांग्लादेश के ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) विद्रोह जैसा ही अराजक आंदोलन हो.
Delhi: BJP National Spokesperson Pradeep Bhandari says, “Over the past few days, you may have heard Rahul Gandhi using the term ‘political resistance’. Today, the facts I am presenting will prove that Rahul Gandhi’s objective is not democratic opposition, but to dismantle Indian democracy under the guise of anarchy. You must have watched this video of Neha Bora and Rahul Gandhi. When Rahul Gandhi was taking out his march, he made Neha Bora the face of that march. This means that Neha Bora shares Rahul Gandhi’s ideology. In an interview yesterday, Neha Bora said that she is inspired by the Bangladesh movement and wants the same thing to happen in India as happened in Bangladesh…”
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
उसी दिन, भाजपा के ऑफ़िशियल X अकाउंट ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें प्रदीप भंडारी की टिप्पणियों के साथ-साथ नेहा बोरा के भाषण का एक छोटा सा हिस्सा भी शामिल था. इस क्लिप में वो कहती हैं, “पूरे देश में हम जो ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) विरोध-प्रदर्शन देख रहे हैं, उनकी शुरुआत सबसे पहले बांग्लादेश में हुई थी. हमें रास्ता दिखाने और इस देश के युवाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आपको बधाई.”
युवाओं को ढाल बनाकर भारत को ‘बांग्लादेश’ बनाने की साजिश!
राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’ नेहा बोरा के खुलासे से कांग्रेस की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राहुल गांधी युवाओं को भड़काकर देश में अराजकता फैलाना और सत्ता हथियाने के लिए भारत को अस्थिर करना चाहते हैं?
देश का युवा आपके ऐसे मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगा!
– भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी एवं प्रवक्ता श्री @pradip103 ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के ‘डार्क प्लान’ पर किए बड़े खुलासे। खुद सुनिए…
— BJP (@BJP4India) October 15, 2026
अभिजीत अय्यर-मित्रा, मेघ अपडेट्स और जयपुर डायलॉग्स समेत राईटविंग कमेंटेटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने इसी तरह के दावों को और हवा दी — कि नेहा बोरा “भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति” चाहती हैं, या फिर “हिंसक और गैर-कानूनी तरीके से सरकार को उखाड़ फेंकना और साथ ही हिंदुओं का कत्लेआम” चाहती हैं.
रिपब्लिक चैनल के एक बुलेटिन में चैनल के एडिटर-इन-चीफ़ अर्नब गोस्वामी ने दावा किया कि नेहा “भारत में बांग्लादेश मॉडल लागू करने की वकालत कर रही थीं.”
जुलाई और अगस्त 2024 में, बांग्लादेश में एक बड़ा जन-विद्रोह हुआ था. इसकी शुरुआत सरकार की सिविल सेवा नौकरी कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से हुई, जो बाद में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग करने वाले एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया. सरकार की सख्ती और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल के कारण सैकड़ों लोग मारे गए, जबकि पुलिस और सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों पर भी हमले हुए. 5 अगस्त को बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर चली गईं, जिससे उनके 15 साल के शासन का अंत हो गया. सरकार के गिरने के बाद वहां भारी हिंसा हुई और अल्पसंख्यकों तथा अन्य समूहों पर हमले किए गए.
नेहा के वायरल वीडियो का पूरा संदर्भ
13 अक्टूबर को, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के ‘सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट’ (SSF) को उनके छठे केंद्रीय सम्मेलन के मौके पर एक वीडियो मैसेज भेजा. ये वीडियो SSF की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल पर अपलोड किया गया था.
1 मिनट 49 सेकंड के इस मैसेज में, नेहा बोरा ने बांग्लादेश में छात्र आंदोलनों में संगठन की भूमिका के लिए उन्हें बधाई दी और उनके कार्यकर्ताओं के प्रति एकजुटता जताई. उन्होंने बांग्लादेश और भारत के छात्रों के संघर्षों के बीच समानताएं बताईं—खासकर लोकतांत्रिक और चुनावी अधिकारों, धार्मिक कट्टरवाद, शिक्षा के निजीकरण और शिक्षा के भगवाकरण के मुद्दों पर.
नेहा ने कहा:
“इस देश में हम हर जगह जो ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) के विरोध-प्रदर्शन देख रहे हैं, उनकी शुरुआत सबसे पहले बांग्लादेश में हुई थी. हमें रास्ता दिखाने और इस देश के युवाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आपको बधाई. हम जानते हैं कि बांग्लादेश में जो आंदोलन शुरू हुआ था, वो लोकतांत्रिक अधिकारों और वोट देने के अधिकारों के लिए था; आज जिस आंदोलन में युवा हिस्सा ले रहे हैं और जिसका नेतृत्व कर रहे हैं, वो भी लोकतांत्रिक और वोट देने के अधिकारों के लिए ही है. हम जानते हैं कि आप अपने देश में धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ़ जो लड़ाई लड़ रहे हैं, वैसी ही लड़ाई आज इस देश के युवा और ‘जेन ज़ी’ भी लड़ रहे हैं. हम समझते हैं कि बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों — ढाका यूनिवर्सिटी और जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी — पर लगातार खतरे बढ़ रहे हैं और उन पर हमले हो रहे हैं; भारत में भी हमारे सार्वजनिक संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों का यही हाल है. यहां छात्रों के अधिकारों को बुरी तरह दबाया जा रहा है और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. यहां हम शिक्षा के ‘भगवाकरण’ और आलोचनात्मक सोच को कुचले जाने की प्रक्रिया देख रहे हैं. ठीक इसी तरह, बांग्लादेश में भी हम देख रहे हैं कि आलोचनात्मक सोच को दबाया जा रहा है. साथ ही, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवाओं पर राजनीतिक प्रोपेगेंडा थोपा जा रहा है. हम आपके साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं. हम आपसे प्रेरणा लेते हैं, आपके नेतृत्व वाले आंदोलनों से सबक सीखते हैं, और हमें उम्मीद है कि हम सब मिलकर — बांग्लादेश में आप और भारत में हम — एक बेहतर दक्षिण एशिया और एक बेहतर दुनिया के लिए साथ मिलकर लड़ सकते हैं.”
सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) एक वामपंथी छात्र संगठन है, जो बांग्लादेश की सोशलिस्ट पार्टी से जुड़ा हुआ है. SSF की स्थापना 1984 में हुई थी.
अपने छठे केंद्रीय सम्मेलन के लिए, दक्षिण एशियाई देशों के कई वामपंथी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को SSF ने आमंत्रित किया था. आमंत्रित लोगों में भारत से AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और पाकिस्तान के डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के नेता रफ़ी खोसा शामिल थे. सम्मेलन में श्रीलंका के SSU और नेपाल के ANNISU (क्रांतिकारी) की राष्ट्रीय समितियों के सदस्य वक्ता के रूप में मौजूद थे. पासपोर्ट और वीज़ा संबंधी समस्याओं के कारण बोरा और AISA की एक अन्य नेता, अदिति मिश्रा, इस सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकीं. उन्होंने वीडियो मैसेज भेजकर SSF को बधाई दी और संगठन की सफलता की कामना की.

इस मैसेज का संदर्भ महत्वपूर्ण है. ये मैसेज SSF और उसके कार्यकर्ताओं को उनके केंद्रीय सम्मेलन के अवसर पर दिया गया था, न कि बांग्लादेश के जन-आंदोलन में शामिल सभी लोगों को. वीडियो मैसेज में कहीं भी, नेहा भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा का आह्वान नहीं करती हैं.
नेहा के शब्दों को ध्यान से पढ़ने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि जब वो कहती हैं कि बांग्लादेश की ‘जेन ज़ी’ (नई पीढ़ी) “हमें रास्ता दिखा रही है”, तो उनका इशारा उन युवाओं की ओर है जिन्होंने बांग्लादेश में “लोकतांत्रिक और मतदाता अधिकारों” के लिए, तथा “धार्मिक कट्टरवाद” और “सार्वजनिक संस्थानों व केंद्रीय विश्वविद्यालयों” पर सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था.
किसी भी तर्कसंगत व्याख्या के आधार पर, इसे भारत में बांग्लादेश जैसी तख्तापलट की कोशिश के आह्वान के रूप में नहीं देखा जा सकता. BJP समर्थक पक्षों ने SSF सम्मेलन और उसके कार्यकर्ताओं के सामने दिए गए नेहा के भाषण के संदर्भ को छिपा दिया है, और उनके शब्दों को इस तरह पेश किया है मानो वे हिंसा का समर्थन कर रही हों.
“नेहा की बातों को संदर्भ से हटकर पेश किया जा रहा है”
बांग्लादेश की सोशलिस्ट पार्टी के सचिव बाज़लुर रशीद फ़िरोज़ ने ‘ऑल्ट न्यूज़’ को बताया कि बोरा ने बांग्लादेश में हुई हिंसा का समर्थन नहीं किया था. उन्होंने कहा, “उनकी बातों को संदर्भ से हटकर पेश किया जा रहा है.”
उन्होंने कहा, “वो वामपंथी छात्र संगठन SSF को ‘हमें रास्ता दिखाने’ के लिए बधाई दे रही थीं. उन्होंने आगे बताया कि कैसे SSF धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई में डटा रहा है, लोकतांत्रिक और मतदान अधिकारों को बहाल करने के लिए संघर्ष कर रहा है, और बेहतर शिक्षा तथा रोज़गार के अवसरों की मांग कर रहा है.” उन्होंने ये भी कहा कि नेहा बोरा ने भारत के युवाओं के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए SSF का धन्यवाद भी किया था.
‘ऑल्ट न्यूज़’ ने AISA की पूर्व अध्यक्ष और CPI(ML) की केंद्रीय समिति की सदस्य सुचेता से भी बात की. उन्होंने कहा कि नेहा बोरा का मैसेज विशेष रूप से SSF के लिए था और इसे उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “एकजुटता का ये मैसेज ‘सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट’ (SSF) के साथियों के लिए था. ये हमारे उपमहाद्वीप, खासकर बांग्लादेश में देखे गए ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आंदोलन और उस आंदोलन में धर्मनिरपेक्ष व प्रगतिशील ताकतों की भागीदारी के संदर्भ में दिया गया था.”
उन्होंने आगे कहा, “नेहा बोरा ने ‘धार्मिक कट्टरवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था. वो इस तरह की हिंसा के खिलाफ़ बोल रही हैं. राईटविंग विचारधारा वाले लोग उनके मैसेज को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और उनके भाषण को ग़लत तरीके से हिंसा से जोड़ रहे हैं.”
नेहा की सफाई: ‘मैसेज SSF के लिए था’
वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद, नेहा ने खुद इंस्टाग्राम पर एक स्पष्टीकरण पोस्ट किया.
वीडियो में वो कहती हैं, “राईटविंग अकाउंट्स ने असली फ़ुटेज से SSF के केंद्रीय सम्मेलन का लोगो और अन्य पहचान बताने वाले ग्राफ़िक्स हटा दिए, ताकि इसका इस्तेमाल मेरे खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया जा सके.” वो बताती हैं, “ये विज़ुअल संकेत बताते हैं कि ये वीडियो ‘सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट’ के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए रिकॉर्ड किया गया था. इसका मकसद लोकतंत्र, छात्रों के अधिकारों, शिक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उनके संघर्षों के प्रति एकजुटता जताना था.” उन्होंने आगे कहा, “भारत के छात्र कार्यकर्ता भी इन संघर्षों से प्रेरणा लेते हैं.”
नेहा बोरा का कहना है कि उनका मैसेज “लोकतांत्रिक अधिकारों, छात्रों के अधिकारों, सुलभ शिक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए संगठन के संघर्षों को संबोधित था.” उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से “प्रेरणा लेने” की बात करते समय उनका इशारा वहां के छात्र आंदोलन के प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष तत्वों की ओर था, न कि पूरे जन-आंदोलन या बाद में प्रभाव में आई राजनीतिक ताकतों की ओर.
For regressive forces like the RSS-BJP solidarity beyond communalism is an incomprehensible concept, hence, they’ve now resorted once again to the old tactic of circulating doctored videos and manufacturing outrage around it.
A video of mine is being circulated out of context by the Sangh IT Cell as me extending solidarity to regressive forces in Bangladesh, ironically by the most regressive communalists of our own country.
We stand with the oppressed fighting for democracy, human rights and against religious fundamentalism.
You attack us with lies because you are afraid of our movement for voter rights and democracy. You fear that the people of the country know the truth about SIR, Gyanesh Kumar and how you use both to disenfranchise 13 crore people!
— Neha (@neha_aisa) October 21, 2026





