“जिस वेबसाइट की आप बात कर रहे हैं, उसे एक ऐसे व्यक्ति चलाते हैं जिनकी मोदी-विरोधी के रूप में एक मजबूत पहचान है, और उनकी वेबसाइट सिर्फ इसलिए मौजूद है ताकि वह मोदी-विरोधी लेख लिख सके, उन्होंने आज तक एक भी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में लेख नहीं लिखा है। (अनुवाद)” यह बयान इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल ने इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2018 के पैनल चर्चा के दौरान दिया था। उसी विडियो का यह हिस्सा नीचे देखा जा सकता है। पुरे वार्तालाप का विडियो जिसमें उपरोक्त दावा किया गया था, इंडिया टुडे के वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

राहुल कंवल के दावे का पहला हिस्सा

“जिस वेबसाइट की आप बात कर रहे हैं, उसे एक ऐसे व्यक्ति चलाते हैं जिनकी मोदी-विरोधी के रूप में एक मजबूत पहचान है”

हर पत्रकार की राजनीति को लेकर एक व्यग्तिगत समझ होती हैं, इंडिया टूडे ग्रुप में भी राहुल कंवल के सहभागियों के अलग-अलग व्यग्तिगत राजनैतिक विचार रहे हैं। देश के हर मिडिया संस्थान में मौजूद पत्रकारों का अपना एक राजनैतिक दृष्टिकोण होता है। किसी भी पत्रकार या मीडिया संगठन को व्यक्तिगत राजनितिक विचारधारा नहीं बल्कि संतुलित रिपोर्टिंग के माध्यम से आंका जाना चाहिए कि व्यक्तिगत रूप से वह पत्रकार या समाचार मीडिया संस्थान कैसा है।

राहुल कंवल के दावे का दूसरा हिस्सा

“और उनकी वेबसाइट सिर्फ इसलिए मौजूद है ताकि वह मोदी-विरोधी लेख लिख सके, उन्होंने आज तक एक भी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में लेख नहीं लिखा है।”

यहाँ यह दावा किया जा रहा है कि ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक के व्यक्तिगत राजनैतिक विचारधारा के कारण इसका कार्य पक्षपातपूर्ण और राजनैतिक दिशा के केवल एकतरफा रहा है। “आज तक एक भी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में लेख नहीं लिखा हैं” यहाँ हम राहुल कंवल के इन शब्दों से यह उम्मीद करते हैं कि राहुल कंवल वास्तव में सुझाव नहीं दे रहे हैं कि एक समाचार संगठन को संतुलित रहने के लिए ‘भाजपा के पक्ष में’ लेख लिखना आवश्यक है। पत्रकारिता का मतलब सरकार से सवाल करना होता है, जो कि ज्यादातर भारतीय मुख्यधारा के मीडिया संगठन ऐसा करने से चूकते हैं। हम मानते हैं कि “प्रो-मोदी” वाक्यांश से कंवल का शायद यह मतलब है कि ऑल्ट न्यूज गैर-भाजपा राजनीतिक दलों की फैक्ट-चेक नहीं करता है।

अगर हम ऊपर की धारणा पर चलें तो राहुल कंवल का यह दावा स्पष्ट रूप से गलत साबित होता है। ऑल्ट न्यूज़ पर हमने कई राजनीतिक दलों और अफवाहों के तथ्य-जांच की है। ऑल्ट न्यूज़ के कुछ हाल के लेख दिए गए हैं जो दर्शाते हैं कि राहुल कंवल का यह दावा इस जानकारी से बेखबर था:

1. क्या पीएम मोदी सिर्फ हाईस्कूल तक पढ़े हैं? इस वायरल विडियो की सच्चाई जानिए

2. कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने झूठी खबर के आधार पर ट्विटर सर्वेक्षण आयोजित किया

3. पीएनबी घोटाला पर नेशनल हेराल्ड के ट्विटर सर्वेक्षण हुए नाकाम

4. क्या पीएम मोदी ने कहा कर्नाटक के ‘7 लाख गाँव’ में नहीं पहुंची बिजली?

5. तथ्‍य जाँच: भारत की आर्थिक असमानता पर राहुल गांधी का दावा

6. क्या जज लोया के बेटे की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस अमित शाह ने आयोजित करवाई थी?

यह आरोप कि हम अन्य पार्टी के अफवाहों की जाँच नहीं करते, शायद इसलिए लगाया जाता है क्योंकि दक्षिणपंथी तंत्र में ज्यादा फर्जी समाचार और अफवाहें है। यह दक्षिणपंथी तंत्र फर्जी समाचार वेबसाइटों से भरा पड़ा है जैसे – Postcard.news, Hindutva.info, Dainikbharat.org और ऐसी 100 से अधिक वेबसाइट्स। देश के अल्पसंख्यकों को नियमित तौर पर निशाना बनाने के लिए नकली खबरों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है और यह सभी फर्जी समाचार दक्षिणपंथी वैचारिक पारिस्थितिक तंत्र बनाते हैं। फर्जी समाचार नियमित रूप से सरकार के आलोचकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए, यदि ऑल्ट न्यूज़ जैसी तथ्य-जांच करने वाली वेबसाइट दक्षिणपंथियों को निशाना बनाने जैसा लगने वाली लेख लिख रही है तो ऐसा आज देश में वास्तविक स्थितियों के कारण है।

ऐसे तो राहुल कंवल के इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है लेकिन हो सकता है कि वो हमारी सभी लेखों से अवगत ना हो। इसके अलावा ऑल्ट न्यूज़ के वो लेख जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी और उनके सदस्यों के दावे की जाँच की जाती है, वैसे लेख निश्चित रूप से सोशल मीडिया पर अधिक पहुँच प्राप्त करते हैं, क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया ऐसा करने में अनिच्छुक है।

ऑल्ट न्यूज़ की स्थापना ऐसे समय हुई है जब देश के सर्वोच्च मीडिया संगठन सरकार से सवाल करना तो दूर प्रशंसा करने में लगे हैं। ऐसी परिस्थितियों में हम सत्ता पर सवाल करना जारी रखेंगे और ऐसे लेख लिखने के लिए हम कतई मजबूर नहीं है जो किसी खास नेता या राजनीतिक दल के “समर्थन” में हैं। हमें विज्ञापन से कमाई या TRP के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है। हमारी वेबसाइट सार्वजनिक रूप से आम लोगों के योगदान से चलती है और हम लोगों के मुद्दों के लिए काम करना जारी रखेंगे। जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा।

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